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Ram Mandir: पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेन्द्र मिश्रा राम जन्मभूमि निर्माण समिति के अध्यक्ष हैं। यह जिम्मेदारी संभालने से पहले तक नृपेन्द्र मिश्रा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रमुख सचिव थे। राम मंदिर चंदा विवाद के बीच नृपेन्द्र मिश्रा के बयान को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Ram Mandir: अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी का मुद्दा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस दौरान उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थापित भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण से जुड़े हुए सबसे बड़े चेहरे के रूप में प्रसिद्ध नृपेन्द्र मिश्रा का बड़ा बयाान सामने आया है। पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेन्द्र मिश्रा राम जन्मभूमि निर्माण समिति के अध्यक्ष हैं। यह जिम्मेदारी संभालने से पहले तक नृपेन्द्र मिश्रा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रमुख सचिव थे। राम मंदिर चंदा विवाद के बीच नृपेन्द्र मिश्रा के बयान को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निजी टीवी चैनल के साथ बातचीत में नृपेन्द्र मिश्रा ने कही बड़ी बात
राम जन्मभूमि निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा ने एक टीवी चैनल को लम्बा इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू में नृपेन्द्र मिश्रा ने साफ-साफ कहा है कि राम मंदिर में चंदे की गिनती तथा रख-रखाव के काम में नियमों का पालन नहीं किया गया है। नृपेन्द्र मिश्रा ने राम मंदिर की संचालन समिति में आमूल-चूल बदलाव की सलाह भी दी है। इंटरव्यू में नृपेन्द्र मिश्रा चंपत राय के ऊपर लगे आरोपों का बचाव करते हुए नजर आए।
बदली जानी चाहिए पूरी व्यवस्था
टीवी चैनल के साथ बातचीत में नृपेन्द्र मिश्रा ने कहा है कि मेरा स्पष्ट मानना है कि राम मंदिर के संचालन की पूरी व्यवस्था बदलनी चाहिए। मंदिर के पूरे मैनेजमेंट का रि-स्ट्रक्चर करके इसे अनुभवी हाथों में सौंप देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि आज पूरा प्रबंधन अलग तरीके से काम करता है। उसका स्वरूप है कि जो भी वहां पर कर्मचारी है, वे स्वयंसेवक हैं। उनको अनौपचारिक ढंग से बता दिया गया है कि काम कैसे करना है लेकिन कोई लिखित आदेश नहीं है। कोई जिम्मेदारी नहीं है। कोई डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ वर्क नहीं है. इस परिसर में करीब 1500 लोग काम कर रहे हैं। नृपेंद्र मिश्र ने कहा, "ये घटना श्रृद्धालुओं के विश्वास पर तो चुनौती है ही लेकिन उसी के साथ पूरे प्रबंधन के जो अलग-अलग अंग हैं, उन सभी के लिए एक प्रश्नसूचक संकेत भी है।"
चंदे को लेकर नहीं हुआ नियमों का पालन
चढ़ावे की व्यवस्था में बदलाव को लेकर नृपेंद्र मिश्र ने कहा, "मैंने कुछ कागजों का अध्ययन किया है, जिसमें 2023 से 2025 तक कुछ निर्देश हैं। एक तरह की एसओपी है. अगर उसका पालन हुआ होता, तो आज हमें ये दिन नहीं देखना होता. उसमें यहां तक विवरण है कि जो व्यक्ति काउंटिंग करने आएगा वो कपड़े क्या पहनेगा. वो कपड़े एसबीआई उपलब्ध कराएगा। जितनी बार वह अंदर और बाहर जाएगा जांच होगी. लेकिन अनौपचारिक रूप से मुझे जो पता लगा, इन कागजों का कोई अनुपालन नहीं हुआ है। " नृपेंद्र मिश्न ने आजतक से बात करते हुए आगे कहा, "भगवान के समक्ष जब कोई महिला अपना गहना दान करने पहुंचती है, तो उसी वक्त वो अगूंठी निकालकर उसमें डाल देती है। ये है उसका विश्वास। जब काउंटिंग के लिए बक्सा उलटा जाता है, तो रुपए को नोट, सिक्के और बहुमूल्य धातुएं भी गिरती हैं। मैं समझता हूं कि तीनों के हिसाब में गंभीर कमियां थीं। उससे भी अधिक नियंत्रण, जो सुपरविजन था, जो बैंक के दो लोगों को वहां पर रखता था, जो ट्रस्ट के दो लोग वहां पर थे, वो सुपरविजन पूरी तरह से इनफॉर्मल था।"
चंपत राय पर भी बोले नृपेन्द्र मिश्रा
इंटरव्यू में चंपत राय के विषय में पूछे जाने पर नृपेंद्र मिश्र ने कहा, "चंतप राय जी एक बहुत संस्कारी व्यक्ति हैं, एक अहम संगठन में उनका जीवन व्यतीत हुआ है। उन्होंने जीवन का हर क्षण संगठन और राष्ट्र को दिया है।" उन्होंने आगे कहा कि लोगों ने चंपत राय की शालीलता और मानवता का दुरुपयोग किया है। ये सारी व्यवस्था विश्वास पर चलती थी, उसमें एक तरीके से बैकस्टैबिंग हुई है. आप देखेंगे कि SIT की जांच में आएगा। वास्तविकता यही है, जो मैंने आपके समक्ष बताया। Ram Mandir
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