
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अक्सर अपने अंदाज के लिए जाने जाते है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके तुरंत एक्शन लेने के कारण उन्हें लोग खूब पसंद भी करते है। इस बार भी उन्होंने कुछ ऐसा किया है जिसकी चर्चा पूरे उत्तर प्रदेश में हो रही है। दरअसल ,उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों की जमीन से अवैध कब्जा हटाने को लेकर जारी एक विवादास्पद आदेश पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है। Uttar Pradesh Samachar
बता दें कि उत्तर प्रदेश के पंचायती राज विभाग द्वारा जारी इस पत्र में सार्वजनिक भूमि से अवैध कब्जे हटाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उसमें विशेष रूप से यादव और मुस्लिम समुदाय का उल्लेख किए जाने पर सरकार की जमकर किरकिरी हुई। मामले की गंभीरता को भांपते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न केवल आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द किया, बल्कि जिम्मेदार अधिकारी पर भी कार्रवाई की है। Uttar Pradesh Samachar
उत्तर प्रदेश के पंचायती राज विभाग की ओर से जारी इस पत्र को प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों, मंडलीय उपनिदेशकों और जिला पंचायत राज अधिकारियों को भेजा गया था। इसमें उत्तर प्रदेश के 57,000 से अधिक ग्राम पंचायतों की भूमि जैसे कि ग्राम सभा की जमीन, पोखरे, खलिहान, खाद गड्ढे और श्मशान आदि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की बात कही गई थी। मगर विवाद तब गहराया जब पत्र की भाषा में विशेष रूप से "यादव" जाति और "मुस्लिम" समुदाय के लोगों द्वारा किए गए कब्जों का ज़िक्र किया गया। Uttar Pradesh Samachar
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आदेश को पूर्वाग्रह से प्रेरित और असंवैधानिक करार देते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदार पाए गए संयुक्त निदेशक (पंचायती राज) सुरेंद्र नाथ सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सीएम योगी ने दो टूक कहा है कि किसी भी सरकारी कार्रवाई में जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। शासन की नीतियां संविधान के मूल सिद्धांतों—न्याय, समानता और धर्मनिरपेक्षता—पर आधारित होती हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी अवैध कब्जे की कार्रवाई तथ्यों, साक्ष्यों और कानून के दायरे में रहकर ही की जानी चाहिए, न कि किसी समुदाय को लक्षित करके। Uttar Pradesh Samachar
सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को चेताया है कि भविष्य में किसी भी सरकारी पत्राचार में ऐसी भाषा का प्रयोग न हो जो सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक निर्णयों में संविधानिक मर्यादाओं और निष्पक्षता का हर हाल में पालन होना चाहिए। Uttar Pradesh Samachar