उत्तर प्रदेश में जामा मस्जिद के इमाम और उनके भाई पर 7 करोड़ का जुर्माना

सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जामा मस्जिद संभल के शाही इमाम मौलाना अफताब हुसैन वारसी और उनके भाई मेहताब हुसैन पर करीब सात करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। प्रशासन का आरोप है कि दोनों भाइयों ने ग्राम समाज की जमीन पर मस्जिद, दरगाह और मकान का निर्माण करा लिया था।

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ग्राम समाज की जमीन पर मस्जिद, दरगाह और मकान का निर्माण
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar10 Mar 2026 06:13 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के संभल जिले में सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जामा मस्जिद संभल के शाही इमाम मौलाना अफताब हुसैन वारसी और उनके भाई मेहताब हुसैन पर करीब सात करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। प्रशासन का आरोप है कि दोनों भाइयों ने ग्राम समाज की जमीन पर मस्जिद, दरगाह और मकान का निर्माण करा लिया था। तहसीलदार अदालत ने अब इस परिसर को खाली कराने का आदेश जारी किया है।

सरकारी जमीन पर निर्माण का आरोप

प्रशासन के अनुसार सैफखान सराय, संभल क्षेत्र में गाटा संख्या 452 की करीब दो बीघा जमीन ग्राम समाज की बताई गई है। आरोप है कि इस जमीन पर मस्जिद, दो मजारें और एक मकान बना लिया गया। फिलहाल इसी मकान में इमाम मौलाना आफताब हुसैन वारसी अपने परिवार के साथ रहते हैं। इसी परिसर में उनके पिता मौलाना खुर्शीद मियां की मजार भी बनी हुई है, जहां हर साल उर्स का आयोजन किया जाता है। प्रशासन का कहना है कि यह पूरा निर्माण ग्राम समाज की भूमि पर किया गया है, इसलिए इसे अवैध कब्जा माना गया है।

तहसीलदार न्यायालय का बेदखली आदेश

मामले की सुनवाई के बाद तहसीलदार अदालत ने संबंधित भूमि को कब्जामुक्त कराने का आदेश दिया है। आदेश के अनुसार इमाम और उनके भाई को 30 दिन के भीतर जमीन खाली करनी होगी। इसके साथ ही दोनों पर लगभग सात करोड़ रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय के भीतर जमीन खाली नहीं करने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, जिसमें अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया भी शामिल हो सकती है।

1972 में ही रद हो चुका था जमीन का पट्टा

राजस्व अभिलेखों के मुताबिक वर्ष 1972 में तत्कालीन तहसील प्रशासन ने इस जमीन के पट्टों को निरस्त कर इसे ग्राम समाज की संपत्ति घोषित कर दिया था। इसके बावजूद बाद के वर्षों में यहां निर्माण कर लिया गया। प्रशासन का कहना है कि जमीन के स्वामित्व को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की गई थीं। राजस्व विभाग की जांच में भी जमीन को सरकारी बताया गया है। बताया जा रहा है कि क्षेत्रीय लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर राजस्व विभाग ने कार्रवाई शुरू की। इसके बाद राजस्व कानून की धारा 67 के तहत कब्जा हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। सूत्रों के अनुसार 2016 और 2017 में भी इस जमीन को लेकर शिकायतें दर्ज हुई थीं। मामला बाद में अदालतों तक पहुंचा और लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया चलती रही।

इमाम पक्ष ने रखा अपना तर्क

मामले की सुनवाई के दौरान इमाम पक्ष की ओर से कहा गया कि यह स्थान एक धार्मिक स्थल है और मस्जिद व मजार का निर्माण कई वर्ष पहले हुआ था। उनका यह भी कहना है कि यह परिसर वक्फ बोर्ड में दर्ज है और यहां होने वाले धार्मिक कार्यक्रम प्रशासन की जानकारी में आयोजित होते रहे हैं। हालांकि राजस्व विभाग का कहना है कि उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर जमीन ग्राम समाज की है और उस पर किए गए निर्माण को वैध नहीं माना जा सकता। प्रशासन के अनुसार आदेश के बाद संबंधित पक्ष को 30 दिन का समय दिया गया है। यदि इस अवधि में जमीन खाली नहीं की जाती है तो राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन कब्जा हटाने के लिए आगे की कार्रवाई करेगा। यह मामला सामने आने के बाद पूरे जिले में सरकारी जमीनों पर कब्जे को लेकर प्रशासन की सख्ती भी चर्चा का विषय बन गई है। कई अन्य स्थानों पर भी राजस्व विभाग द्वारा जमीनों की जांच की जा रही है।



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मेरठ के सेंट्रल मार्केट में लगभग 1470 दुकानों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी

मेरठ में शास्त्री नगर के सेंट्रल मार्केट में लगभग 1470 दुकानों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी चल रही है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर होनी है, जिसमें अदालत ने इस बाजार के अधिकांश दुकानों को अवैध निर्माण बताया है।

dharna
धरना-प्रदर्शन
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar10 Mar 2026 05:41 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के मेरठ में शास्त्री नगर के सेंट्रल मार्केट में लगभग 1470 दुकानों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी चल रही है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर होनी है, जिसमें अदालत ने इस बाजार के अधिकांश दुकानों को अवैध निर्माण बताया है। अब प्रशासन ने यह काम आगे बढ़ाने की तैयारी कर ली है, जिसका असर इलाके में तनाव के रूप में देखा जा रहा है।

व्यापारियों और संगठनों की प्रतिक्रिया

इस फैसले का विरोध व्यापारी संगठनों और किसान मजदूर समूहों ने किया है। उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया और प्रशासन की नीति के खिलाफ आवाज उठाई। कई व्यापारियों तथा समर्थकों के बीच पुलिस के साथ बहस भी हुई है। अधिकारियों ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया, जिससे बाजार बंद रहने और विरोध तेज होने जैसी स्थिति बनी है। 

प्रशासन की तैयारी

आवास एवं विकास परिषद और स्थानीय प्रशासन ने ध्वस्तीकरण कार्रवाई के लिए आवश्यक तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। अधिकारियों ने कहा है कि अवैध माने गए निमार्णों को हटाने के लिए पुलिस और मजिस्ट्रेट की मदद ली जा सकती है। कुछ हिस्सों के लिए पहले ही नियंत्रण और नोटिस जारी किए गए हैं ताकि जो दुकानदार स्वयं हटाना चाहते हैं वे समय पर कदम उठा सकें।

व्यापारियों की मांग

व्यापारी लगातार प्रशासन और सरकार से कह रहे हैं कि उन्हें स्थानांतरित, पुनर्वास या किसी वैकल्पिक व्यवस्था दी जाए ताकि उनका व्यवसाय और रोजी-रोटी प्रभावित न हो। कई लोग चाहते हैं कि मामला बातचीत और समाधान के रास्ते से सुलझाया जाए। यह विवाद कुछ समय से चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी इस बाजार के अवैध निर्माण के खिलाफ फैसले दिए हैं और कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं, जिनके अनुपालन के लिए अब प्रशासन सक्रिय हो गया है।



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उत्तर प्रदेश की बड़ी परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार, लागू हुई नई व्यवस्था

नई व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश के 41 विभागों और उनसे जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं को इस पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे अब अलग-अलग विभागों में चल रही परियोजनाओं की स्थिति पर एकीकृत तरीके से नजर रखी जा सकेगी।

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल
उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar10 Mar 2026 04:42 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में चल रही बड़ी विकास परियोजनाओं की निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए योगी सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। उत्तर प्रदेश सरकार ने अब केंद्र के पीएमजी मॉडल की तर्ज पर स्टेट PMG पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण परियोजनाएं समय पर पूरी हों और उनके निर्माण के दौरान आने वाली रुकावटों का जल्द समाधान किया जा सके। नई व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश के 41 विभागों और उनसे जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं को इस पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे अब अलग-अलग विभागों में चल रही परियोजनाओं की स्थिति पर एकीकृत तरीके से नजर रखी जा सकेगी।

मुख्य सचिव ने अफसरों को दिए सख्त निर्देश

इस नई व्यवस्था को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने शासन से लेकर जिला स्तर तक के अफसरों को स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए हैं। अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों के साथ-साथ सरकारी निर्माण एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों से कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में चल रही बड़ी विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए स्टेट PMG पोर्टल का सक्रिय और प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए। सरकार का फोकस इस बात पर है कि उत्तर प्रदेश के अहम प्रोजेक्ट्स से जुड़ी अड़चनों की पहचान समय रहते हो, ताकि विभागीय स्तर पर फाइलों में देरी और समन्वय की कमी के कारण विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित न हो।

उत्तर प्रदेश की अटकी परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

केंद्र सरकार पहले से ही अपनी वित्तपोषित और अहम परियोजनाओं के लिए प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप पोर्टल का उपयोग करती रही है। अब उत्तर प्रदेश ने इसी व्यवस्था को राज्य स्तर पर अपनाकर परियोजना प्रबंधन को और मजबूत बनाने की कोशिश की है। इस पोर्टल के जरिए उत्तर प्रदेश में निर्माणाधीन परियोजनाओं के सामने आने वाले मुद्दों को संबंधित विभागों, जिलों और जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार के मंत्रालयों तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और अटके हुए मामलों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश में वे सड़क और अन्य विकास कार्य भी इस व्यवस्था के दायरे में लाए जाएंगे, जो स्थानीय अवरोधों या धार्मिक स्थलों जैसी वजहों से लंबे समय से फंसे हुए हैं।

10 करोड़ से ज्यादा लागत वाली परियोजनाएं होंगी पोर्टल से लिंक

नियोजन विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 10 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं को स्टेट PMG पोर्टल से जोड़ा गया है। ये परियोजनाएं सीएमआईएस पोर्टल पर दर्ज हैं और अब एपीआई के माध्यम से उनकी जानकारी स्वत: स्टेट PMG प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ी परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति, लंबित अनुमतियों और निर्माण में आ रही बाधाओं की जानकारी एक ही मंच पर मिल सकेगी। इससे निगरानी अधिक व्यवस्थित होगी और जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।

समीक्षा बैठकों से होगा लंबित मामलों का निस्तारण

सरकार ने यह भी तय किया है कि पोर्टल पर दर्ज समस्याओं के समाधान के लिए समय-समय पर संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के साथ समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसका उद्देश्य यह है कि उत्तर प्रदेश में कोई भी बड़ी परियोजना सिर्फ फाइलों में अटककर न रह जाए, बल्कि जमीन पर उसका काम तेजी से आगे बढ़े। इन बैठकों के जरिए उत्तर प्रदेश में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा होगी और जिन परियोजनाओं में अनुमति, समन्वय या प्रशासनिक बाधा आ रही है, उनका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार इस नई पहल के जरिए विकास परियोजनाओं की मॉनिटरिंग को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाना चाहती है। साथ ही, अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय को बेहतर करके मल्टी-स्टेकहोल्डर कोऑर्डिनेशन को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार ने सभी विभागों से कहा है कि वे उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़े अनुमोदन, अवरोध और अन्य मुद्दों को स्टेट PMG पोर्टल पर दर्ज करें, ताकि उनका समयबद्ध समाधान हो सके। माना जा रहा है कि यह कदम उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने के साथ-साथ परियोजनाओं की निगरानी को भी नई दिशा देगा। UP News

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