
UP News : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडेय के काफिले पर कथित हमले और विरोध प्रदर्शन ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। बुधवार को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर दौरे के दौरान न सिर्फ उनका रास्ता रोका गया, बल्कि उनके काफिले पर पथराव और मारपीट की घटनाएं भी सामने आईं। उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि इस घटना में भाजपा समर्थित असामाजिक तत्व शामिल थे। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे "राजनीतिक नौटंकी" करार दिया।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडेय का काफिला जब गोरखपुर के ‘नरमल चौराहे’ से गुजर रहा था, तब भाजपा कार्यकर्ताओं और व्यापारी समुदाय के कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया। “सपा वापस जाओ” के नारों के बीच कथित तौर पर हल्की झड़प हुई, जिसमें समाजवादी पार्टी के वाहनों को नुकसान पहुंचा और कांच भी टूटे। घटना के बाद सपा कार्यकर्ताओं ने चौराहे पर धरना शुरू कर दिया। वहीं, दूसरी ओर भाजपा समर्थकों और व्यापारियों ने भी वहीं अपना विरोध प्रदर्शन प्रारंभ कर दिया।
पुलिस को हस्तक्षेप कर भाजपा समर्थकों की भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा, जिससे पांडेय कुछ स्थानीय व्यापारियों से संवाद कर पाए और फिर काफिला आगे बढ़ा। घटना के बाद मीडिया से बातचीत में माता प्रसाद पांडेय ने कहा, “हम गोरखपुर में सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित व्यापारियों की समस्याएं सुनने और निरीक्षण करने पहुंचे थे। हमें न तो प्रशासन ने रोका, न कोई नोटिस दिया, लेकिन रास्ते में भाजपा कार्यकर्ताओं और एक विधायक ने घेर लिया। हमारी गाड़ी का शीशा तक तोड़ दिया गया।
वहीं इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा विधायक विपिन सिंह ने पलटवार करते हुए कहा, जब प्रदेश में अभूतपूर्व विकास हो रहा है, तब समाजवादी पार्टी राजनीतिक लाभ के लिए ऐसी नौटंकी कर रही है। व्यापारी अब सपा की असलियत समझ चुके हैं और यही उनके विरोध की वजह है।
घटना को लेकर उत्तर प्रदेश केपूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे "लोकतंत्र पर हमला" करार दिया। उन्होंने लिखा, "गोरखपुर दौरे के दौरान माता प्रसाद पांडेय जी और पूर्व विधायक लाल बिहारी यादव पर हुआ हमला अत्यंत निंदनीय है। अगर जन प्रतिनिधियों पर सत्ताधारी दल के संरक्षण में हमले होंगे, तो इसे अराजकता का शासन ही कहा जाएगा।
अखिलेश यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो इसे "जानबूझकर की गई राजनीतिक साजिश" माना जाएगा। उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट रूप से उस मानसिकता का प्रतीक है जहां सरकार अपनी योजनाओं की असफलता और प्रतिद्वंद्वियों से डरकर दमन का रास्ता चुनती है।
सपा के आधिकारिक 'एक्स' हैंडल से जारी बयान में कहा गया, “सरकार अब सच को दबाने के लिए गुंडों पर भरोसा कर रही है। गोरखपुर में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व विधायक पर तब हमला कराया गया जब वे पीड़ित व्यापारियों से मुलाकात कर रहे थे। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस हिंसक विरोध का उद्देश्य व्यापारियों को अपनी बात रखने से रोकना था। UP News