यूपी के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने डिजिटल लाइब्रेरी और विभागीय धनराशि को लेकर प्रमुख सचिव अनिल कुमार पर गंभीर आरोप लगाए थे। अब सरकार ने 10 वरिष्ठ IAS अधिकारियों के तबादले में अनिल कुमार को पंचायती राज से हटाकर खाद्य एवं रसद विभाग भेज दिया है।

UP News: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने रविवार रात शासन स्तर पर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 10 वरिष्ठ IAS अधिकारियों के विभाग बदल दिए। इस फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा पंचायती राज विभाग को लेकर हो रही है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर और विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव अनिल कुमार के बीच पिछले दिनों डिजिटल लाइब्रेरी परियोजना और विभागीय कामकाज को लेकर खुलकर मतभेद सामने आए थे। राजभर ने अनिल कुमार और पंचायती राज निदेशक अमित कुमार सिंह की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए थे। अब सरकार ने अनिल कुमार को पंचायती राज विभाग से हटाकर प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद, प्रमुख सचिव उपभोक्ता मामले तथा आयुक्त खाद्य एवं रसद की जिम्मेदारी सौंप दी है। उनकी जगह रविंद्र को प्रमुख सचिव पंचायती राज बनाया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सरकार के आधिकारिक तबादला आदेश में अनिल कुमार के स्थानांतरण को राजभर की शिकायत का परिणाम नहीं बताया गया है। इसलिए दोनों घटनाओं के बीच संबंध को तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि घटनाक्रम के क्रम के रूप में देखा जाना चाहिए। मीडिया रिपोर्टों में हालांकि राजभर और अनिल कुमार के बीच मतभेद को इस तबादले की पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा गया है।
पंचायती राज विभाग की ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित करने की योजना को लेकर मंत्री और विभागीय अधिकारियों के बीच विवाद सामने आया था। राजभर का कहना था कि चुनाव नजदीक होने के बावजूद डिजिटल लाइब्रेरी परियोजना के पहले चरण का काम अपेक्षित रूप से पूरा नहीं हुआ है। राजभर की मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत के मुताबिक, एक तरफ विभाग की ओर से पहले चरण का काम पूरा होने की रिपोर्ट भेजे जाने की बात सामने आई, जबकि दूसरी तरफ इसी परियोजना से संबंधित मामले में 16 जिला पंचायती राज अधिकारियों (DPROs) के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश किए जाने का मुद्दा भी सामने आया। मंत्री ने इसे विभागीय रिपोर्टिंग और जमीनी स्थिति के बीच विरोधाभास के रूप में उठाया था। विवाद उस समय और बढ़ गया जब डिजिटल लाइब्रेरी परियोजना के दूसरे चरण के टेंडर को लेकर मंत्री और अधिकारियों के बीच सहमति नहीं बन सकी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मामला आगे निर्णय के लिए मुख्य सचिव के माध्यम से भेजा गया था। राजभर ने इस पूरी प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
सितंबर के पहले सप्ताह में सामने आई शिकायत की खबरों के अनुसार, ओम प्रकाश राजभर ने प्रमुख सचिव अनिल कुमार और पंचायती राज निदेशक अमित कुमार सिंह पर सरकार के फैसलों को सही तरीके से लागू नहीं करने और विभागीय कामकाज में लापरवाही के आरोप लगाए थे। राजभर की शिकायत में डिजिटल लाइब्रेरी परियोजना के अलावा विभाग की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए उपलब्ध कराई गई धनराशि के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रचार-प्रसार के लिए आई राशि को अधिकारी मिलीभगत से मनमाने ढंग से खर्च कर रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में राजभर के आरोपों को सीधे भ्रष्टाचार और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। राजभर ने मुख्यमंत्री से दोनों अधिकारियों को उनके पदों से हटाने की मांग भी की थी। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में उपलब्ध रिपोर्टों में किसी अंतिम जांच रिपोर्ट या न्यायिक निष्कर्ष से यह साबित नहीं होता कि अनिल कुमार ने व्यक्तिगत रूप से भ्रष्टाचार किया था। इसलिए आरोपों को राजभर द्वारा लगाए गए आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
राजभर की शिकायत का एक प्रमुख आधार यह भी था कि विभागीय अधिकारी उच्च स्तर पर लिए गए फैसलों को अपेक्षित तरीके से लागू नहीं कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मंत्री का कहना था कि विभाग में अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर वह संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि डिजिटल लाइब्रेरी का काम समय से पूरा होना चाहिए, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में इस परियोजना का सीधा संबंध विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं से है। UP News:
राजभर की शिकायत केवल डिजिटल लाइब्रेरी तक सीमित नहीं थी। पंचायती राज विभाग के अंतर्गत चल रही फीकल स्लज ट्रीटमेंट यानी मल निस्तारण परियोजना में भी लापरवाही का आरोप लगाया गया था। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, राजभर ने ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित इस परियोजना के क्रियान्वयन में लापरवाही का मुद्दा भी मुख्यमंत्री के सामने उठाया था। इस तरह देखा जाए तो मंत्री और विभागीय अधिकारियों के बीच विवाद किसी एक टेंडर तक सीमित नहीं रहा था, बल्कि विभाग के कामकाज, योजनाओं की प्रगति, रिपोर्टिंग और धनराशि के इस्तेमाल तक फैल गया था।
20 सितंबर 2026 की रात हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल में सरकार ने अनिल कुमार को पंचायती राज विभाग से हटा दिया। उन्हें अब खाद्य एवं रसद विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ उन्हें उपभोक्ता मामले विभाग के प्रमुख सचिव और खाद्य एवं रसद आयुक्त की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। पंचायती राज विभाग की कमान अब रविंद्र को दी गई है। उनके पास पंचायती राज के साथ कृषि विभाग से संबंधित कुछ अन्य जिम्मेदारियां भी हैं। यानी जिस विभाग को लेकर पिछले दिनों मंत्री और प्रमुख सचिव के बीच मतभेद सार्वजनिक हुए थे, उसी विभाग में अब शीर्ष नौकरशाही का चेहरा बदल गया है।
रविवार रात हुए फेरबदल में कुल 10 वरिष्ठ IAS अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया। इनमें तीन अपर मुख्य सचिव और सात प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं—
अमित कुमार घोष को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा से हटाकर अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा बनाया गया।
अमृत अभिजात को पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य के साथ परिवहन विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।
वी. हेकाली झिमोमी को प्रमुख सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा बनाया गया।
महेंद्र प्रसाद अग्रवाल को प्रमुख सचिव वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी मिली।
अनिल कुमार को पंचायती राज से हटाकर प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद तथा उपभोक्ता मामले और खाद्य एवं रसद आयुक्त बनाया गया।
डॉ. एमकेएस सुंदरम को कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान, कृषि विपणन तथा कृषि विदेश व्यापार एवं निर्यात प्रोत्साहन की जिम्मेदारी मिली।
रविंद्र को प्रमुख सचिव पंचायती राज बनाया गया।
अमित गुप्ता के पास स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन के साथ प्राविधिक शिक्षा का अतिरिक्त प्रभार रहेगा।
रणवीर प्रसाद को प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा के साथ पावर सेक्टर की कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं।
डॉ. आशीष कुमार गोयल को ऊर्जा विभाग से हटाकर अपर मुख्य सचिव श्रम एवं सेवायोजन बनाया गया।
सवाल अब यह—क्या डिजिटल लाइब्रेरी विवाद का असर आगे भी दिखाई देगा?
अनिल कुमार का पंचायती राज विभाग से हटना ऐसे समय हुआ है जब विभाग में डिजिटल लाइब्रेरी परियोजना को लेकर मंत्री और अधिकारियों के बीच मतभेद सार्वजनिक हो चुके थे। राजभर पहले ही मुख्यमंत्री के सामने इस मामले को उठा चुके थे और प्रमुख सचिव तथा निदेशक को हटाने की मांग कर चुके थे। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए प्रमुख सचिव रविंद्र के आने के बाद डिजिटल लाइब्रेरी परियोजना की गति क्या होगी और पहले चरण के काम की वास्तविक स्थिति की समीक्षा किस तरह की जाएगी। इसके साथ ही विभागीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार के बजट, डिजिटल लाइब्रेरी के टेंडर और उन 16 DPROs के खिलाफ कार्रवाई के मुद्दे पर भी आगे क्या कदम उठते हैं, इस पर नजर रहेगी।
उत्तर प्रदेश में मंत्रियों और वरिष्ठ नौकरशाहों के बीच विभागीय अधिकारों तथा निर्णयों के क्रियान्वयन को लेकर मतभेद का मुद्दा नया नहीं है। लेकिन इस मामले में खास बात यह रही कि पंचायती राज मंत्री ने अपने ही विभाग के प्रमुख सचिव और निदेशक के खिलाफ मुख्यमंत्री को लिखित शिकायत की और दोनों को हटाने की मांग की। अब कुछ ही सप्ताह बाद हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल में प्रमुख सचिव अनिल कुमार को पंचायती राज से हटा दिया गया है। यह संयोग है या विभागीय विवाद की पृष्ठभूमि में हुआ प्रशासनिक बदलाव—सरकार के आदेश में इसका कोई कारण नहीं बताया गया है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय पूरे घटनाक्रम और आगे होने वाली विभागीय कार्रवाई पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
ताजा स्थिति
20 सितंबर 2026 के फेरबदल के बाद अनिल कुमार अब पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव नहीं हैं। उन्हें खाद्य एवं रसद तथा उपभोक्ता मामले से जुड़ी जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि पंचायती राज विभाग की कमान रविंद्र को मिली है। वहीं डिजिटल लाइब्रेरी और विभागीय धनराशि को लेकर ओम प्रकाश राजभर द्वारा लगाए गए आरोपों पर उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में अभी तक कोई अंतिम जांच निष्कर्ष सामने नहीं आया है। UP News:
विज्ञापन