उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में पराली जलाने वालों पर प्रशासन ने सख्ती की तैयारी कर ली है। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को पूरी तरह रोकने के निर्देश दिए गए।

UP News : उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में खेतों में पराली जलाने वालों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को पूरी तरह रोकने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खेत में पराली जलाने पर जमीन के रकबे के हिसाब से किसान पर 5 हजार से 30 हजार रुपये तक पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई जा सकती है।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ने फसल अवशेष जलाने से मिट्टी, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में पराली जलाने की घटनाओं को शून्य करने के लिए प्रभावी निगरानी की जाए। जिलाधिकारी ने किसानों को बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेश और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत फसल अवशेष जलाना दंडनीय है। इसके लिए पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की व्यवस्था लागू है।
बैठक में जिलाधिकारी ने फसल कटाई में इस्तेमाल होने वाली कंबाइन हार्वेस्टर मशीनों को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, स्ट्रॉ रीपर, स्ट्रॉ रेक या बेलर जैसे कृषि यंत्रों की उपलब्धता अनिवार्य होगी। प्रशासन ने साफ किया है कि बिना आवश्यक स्ट्रॉ मैनेजमेंट उपकरणों के किसी कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई की अनुमति नहीं होगी। यदि कोई कंबाइन ऐसी स्थिति में चलती मिली तो उसे तत्काल सीज किया जा सकता है। मशीन मालिक को अपने खर्च पर आवश्यक सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम लगवाने के बाद ही उसे छोड़े जाने की व्यवस्था बताई गई है। UP News :
प्रशासन ने किसानों से पराली नहीं जलाने की अपील करते हुए इसके उपयोग का विकल्प भी बताया। किसानों को कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से फसल अवशेष एकत्रित करने और उससे जैविक खाद तैयार करने की सलाह दी गई। किसान फसल अवशेष को धुरियापार, गोरखपुर स्थित सीबीजी प्लांट को बेचकर अतिरिक्त आय भी प्राप्त कर सकते हैं। प्रशासन का जोर है कि पराली को खेत में जलाने के बजाय उसका उपयोग आर्थिक गतिविधि और जैविक संसाधन के रूप में किया जाए।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि फसल कटाई के दौरान पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नजर रखी जाए। बैठक में उप कृषि निदेशक राजेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी रविशंकर पाण्डेय, सीबीजी प्लांट के प्रतिनिधि, कंबाइन हार्वेस्टर मालिक और ग्राम प्रधान मौजूद रहे। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेष को खेत में न जलाएं। पराली प्रबंधन के लिए उपलब्ध कृषि यंत्रों और कस्टम हायरिंग सेंटर की मदद लेकर किसान पर्यावरण संरक्षण के साथ अतिरिक्त आय का विकल्प भी अपना सकते हैं। UP News :
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