UP SI Exam के एक सवाल से क्यों मचा है बवाल? जानें कैसे बनता है प्रश्नपत्र
उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में एक सवाल के विकल्प में “पंडित” शब्द दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। कई नेताओं ने इसे लेकर आपत्ति जताई है और जांच की मांग की है। इस पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश में परीक्षा प्रणाली और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

उत्तर प्रदेश में आयोजित उप निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा को लेकर इन दिनों बड़ा विवाद सामने आया है। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती से जुड़ी इस परीक्षा के एक सवाल में दिए गए विकल्प को लेकर आपत्ति जताई जा रही है। मामला इतना बढ़ गया कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी इसकी चर्चा होने लगी। इस परीक्षा में शामिल लाखों अभ्यर्थियों के बीच भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में एक सवाल के विकल्प में “पंडित” शब्द दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। कई नेताओं ने इसे लेकर आपत्ति जताई है और जांच की मांग की है। इस पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश में परीक्षा प्रणाली और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सवाल उठ रहा है कि उत्तर प्रदेश की इस महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र आखिर बनाता कौन है, उस पर अंतिम मुहर कौन लगाता है और गलती होने पर जिम्मेदारी किसकी होती है।
क्या है पूरा विवाद?
उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा 14 और 15 मार्च 2026 को आयोजित की जा रही है। यह परीक्षा चार पालियों में आयोजित की जा रही है। 14 मार्च की परीक्षा में सामान्य हिन्दी के प्रश्नपत्र में एक सवाल पूछा गया था-
“अवसर के अनुसार बदल जाने वाला” इस वाक्यांश के लिए एक शब्द चुनिए।
इसके लिए चार विकल्प दिए गए थे:
A – पंडित
B – अवसरवादी
C – निष्कपट
D – सदाचारी
इसी सवाल में “पंडित” शब्द को विकल्प के रूप में शामिल करने पर विवाद शुरू हो गया। कई लोगों ने इसे गलत और आपत्तिजनक बताया।
नेताओं की प्रतिक्रिया और जांच की मांग
इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी इस सवाल के विकल्प पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और किसी भी जाति या समुदाय का अपमान करने वाली चीज स्वीकार नहीं की जाएगी।
कितने पदों के लिए हो रही है परीक्षा?
उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा लगभग 4500 पदों के लिए आयोजित की जा रही है। इस भर्ती में करीब 15 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। परीक्षा के लिए पूरे राज्य में लगभग 1100 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं जहां सुरक्षा और गोपनीयता के साथ परीक्षा आयोजित की जा रही है।
प्रश्नपत्र बनाने की जिम्मेदारी किसकी होती है?
उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा का आयोजन उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा किया जाता है। इस बोर्ड के प्रमुख आमतौर पर महानिदेशक स्तर के अधिकारी होते हैं और उनके साथ पुलिस अधिकारियों की टीम काम करती है। हालांकि, प्रश्नपत्र तैयार करने का पूरा काम अक्सर किसी निजी एजेंसी को दिया जाता है। यह एजेंसी विशेषज्ञों की मदद से प्रश्न तैयार करवाती है, उनकी जांच करती है और फिर प्रश्नपत्र तैयार करती है।
विशेषज्ञों की टीम कैसे बनाती है प्रश्न?
किसी भी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा के लिए विषय विशेषज्ञों का एक पैनल तैयार किया जाता है। इसमें विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, सेवानिवृत्त अधिकारी और विषय के जानकार शामिल होते हैं। इन विशेषज्ञों को सिलेबस के अनुसार बड़ी संख्या में प्रश्न तैयार करने के निर्देश दिए जाते हैं। बाद में इन सभी प्रश्नों को एक सुरक्षित प्रश्न बैंक में रखा जाता है।
मॉडरेशन प्रक्रिया क्यों होती है जरूरी?
जब प्रश्न तैयार हो जाते हैं तो उन्हें एक विशेष समिति द्वारा जांचा जाता है। इसे मॉडरेशन प्रक्रिया कहा जाता है। इस दौरान यह देखा जाता है कि सवाल सिलेबस के अनुसार हैं या नहीं, किसी प्रश्न के एक से ज्यादा सही उत्तर तो नहीं हैं, भाषा स्पष्ट और सही है या नहीं, प्रश्नों का स्तर आसान, मध्यम और कठिन में संतुलित है या नहीं। माना जा रहा है कि इस मामले में इसी चरण में कहीं न कहीं गलती हुई है।
अंतिम प्रश्नपत्र पर कौन लगाता है मुहर?
जब सभी प्रश्नों की जांच पूरी हो जाती है, तो परीक्षा से पहले परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था का कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन या उच्च स्तरीय समिति अंतिम प्रश्नपत्र का चयन करती है। अक्सर दो या तीन अलग-अलग सेट तैयार रखे जाते हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में दूसरा प्रश्नपत्र इस्तेमाल किया जा सके। अंतिम चयन के बाद उस पर आधिकारिक मंजूरी दी जाती है।
प्रिंटिंग और सुरक्षा की सख्त व्यवस्था
प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उन्हें बेहद सुरक्षित प्रिंटिंग प्रेस में छापा जाता है। इस दौरान वहां काम करने वाले कर्मचारियों को बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग रखा जाता है। प्रिंटिंग के बाद प्रश्नपत्र सीलबंद बॉक्स में रखे जाते हैं और कड़ी सुरक्षा के साथ परीक्षा केंद्रों या बैंक के स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुंचाए जाते हैं।
भविष्य में कैसे रोके जा सकते हैं ऐसे विवाद?
विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा की पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जैसी संस्थाओं की मदद ली जा सकती है। इन संस्थाओं के पास देशभर के विशेषज्ञों का बड़ा नेटवर्क होता है और इनके जरिए प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता बेहतर बनाए रखी जा सकती है।
उत्तर प्रदेश में आयोजित उप निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा को लेकर इन दिनों बड़ा विवाद सामने आया है। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती से जुड़ी इस परीक्षा के एक सवाल में दिए गए विकल्प को लेकर आपत्ति जताई जा रही है। मामला इतना बढ़ गया कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी इसकी चर्चा होने लगी। इस परीक्षा में शामिल लाखों अभ्यर्थियों के बीच भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में एक सवाल के विकल्प में “पंडित” शब्द दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। कई नेताओं ने इसे लेकर आपत्ति जताई है और जांच की मांग की है। इस पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश में परीक्षा प्रणाली और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सवाल उठ रहा है कि उत्तर प्रदेश की इस महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र आखिर बनाता कौन है, उस पर अंतिम मुहर कौन लगाता है और गलती होने पर जिम्मेदारी किसकी होती है।
क्या है पूरा विवाद?
उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा 14 और 15 मार्च 2026 को आयोजित की जा रही है। यह परीक्षा चार पालियों में आयोजित की जा रही है। 14 मार्च की परीक्षा में सामान्य हिन्दी के प्रश्नपत्र में एक सवाल पूछा गया था-
“अवसर के अनुसार बदल जाने वाला” इस वाक्यांश के लिए एक शब्द चुनिए।
इसके लिए चार विकल्प दिए गए थे:
A – पंडित
B – अवसरवादी
C – निष्कपट
D – सदाचारी
इसी सवाल में “पंडित” शब्द को विकल्प के रूप में शामिल करने पर विवाद शुरू हो गया। कई लोगों ने इसे गलत और आपत्तिजनक बताया।
नेताओं की प्रतिक्रिया और जांच की मांग
इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी इस सवाल के विकल्प पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और किसी भी जाति या समुदाय का अपमान करने वाली चीज स्वीकार नहीं की जाएगी।
कितने पदों के लिए हो रही है परीक्षा?
उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा लगभग 4500 पदों के लिए आयोजित की जा रही है। इस भर्ती में करीब 15 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। परीक्षा के लिए पूरे राज्य में लगभग 1100 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं जहां सुरक्षा और गोपनीयता के साथ परीक्षा आयोजित की जा रही है।
प्रश्नपत्र बनाने की जिम्मेदारी किसकी होती है?
उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा का आयोजन उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा किया जाता है। इस बोर्ड के प्रमुख आमतौर पर महानिदेशक स्तर के अधिकारी होते हैं और उनके साथ पुलिस अधिकारियों की टीम काम करती है। हालांकि, प्रश्नपत्र तैयार करने का पूरा काम अक्सर किसी निजी एजेंसी को दिया जाता है। यह एजेंसी विशेषज्ञों की मदद से प्रश्न तैयार करवाती है, उनकी जांच करती है और फिर प्रश्नपत्र तैयार करती है।
विशेषज्ञों की टीम कैसे बनाती है प्रश्न?
किसी भी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा के लिए विषय विशेषज्ञों का एक पैनल तैयार किया जाता है। इसमें विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, सेवानिवृत्त अधिकारी और विषय के जानकार शामिल होते हैं। इन विशेषज्ञों को सिलेबस के अनुसार बड़ी संख्या में प्रश्न तैयार करने के निर्देश दिए जाते हैं। बाद में इन सभी प्रश्नों को एक सुरक्षित प्रश्न बैंक में रखा जाता है।
मॉडरेशन प्रक्रिया क्यों होती है जरूरी?
जब प्रश्न तैयार हो जाते हैं तो उन्हें एक विशेष समिति द्वारा जांचा जाता है। इसे मॉडरेशन प्रक्रिया कहा जाता है। इस दौरान यह देखा जाता है कि सवाल सिलेबस के अनुसार हैं या नहीं, किसी प्रश्न के एक से ज्यादा सही उत्तर तो नहीं हैं, भाषा स्पष्ट और सही है या नहीं, प्रश्नों का स्तर आसान, मध्यम और कठिन में संतुलित है या नहीं। माना जा रहा है कि इस मामले में इसी चरण में कहीं न कहीं गलती हुई है।
अंतिम प्रश्नपत्र पर कौन लगाता है मुहर?
जब सभी प्रश्नों की जांच पूरी हो जाती है, तो परीक्षा से पहले परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था का कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन या उच्च स्तरीय समिति अंतिम प्रश्नपत्र का चयन करती है। अक्सर दो या तीन अलग-अलग सेट तैयार रखे जाते हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में दूसरा प्रश्नपत्र इस्तेमाल किया जा सके। अंतिम चयन के बाद उस पर आधिकारिक मंजूरी दी जाती है।
प्रिंटिंग और सुरक्षा की सख्त व्यवस्था
प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उन्हें बेहद सुरक्षित प्रिंटिंग प्रेस में छापा जाता है। इस दौरान वहां काम करने वाले कर्मचारियों को बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग रखा जाता है। प्रिंटिंग के बाद प्रश्नपत्र सीलबंद बॉक्स में रखे जाते हैं और कड़ी सुरक्षा के साथ परीक्षा केंद्रों या बैंक के स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुंचाए जाते हैं।
भविष्य में कैसे रोके जा सकते हैं ऐसे विवाद?
विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा की पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जैसी संस्थाओं की मदद ली जा सकती है। इन संस्थाओं के पास देशभर के विशेषज्ञों का बड़ा नेटवर्क होता है और इनके जरिए प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता बेहतर बनाए रखी जा सकती है।












