
इलाहाबाद हाईकोर्ट(Allahabad Highcourt) ने मस्जिद कमेटी की अर्जी को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने मस्जिद में रंगाई पुताई की अनुमति दी, लेकिन केवल बाहरी दीवारों के लिए। इसके अलावा, कोर्ट ने मस्जिद की बाहरी दीवारों पर लाइटिंग लगाने की इजाजत भी दी, लेकिन यह स्पष्ट किया कि ऐसा बिना किसी ढांचे को नुकसान पहुंचाए किया जाना चाहिए। यह आदेश जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने सुनाया।
सुनवाई के दौरान एएसआई के वकील ने कोर्ट में मस्जिद की बाहरी दीवारों पर रंगाई पुताई करने के संदर्भ में रिपोर्ट पेश की। उन्होंने कहा कि पहले हुई पुताई से मस्जिद के ढांचे को नुकसान पहुंचा है। इस पर हाईकोर्ट ने एएसआई से सवाल किया कि अगर नुकसान हुआ है तो आप उस समय कहां थे, जब मस्जिद कमेटी सफेदी करा रही थी। कोर्ट ने एएसआई से यह भी पूछा कि उन्होंने 2010 से 2020 तक इस मामले में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की, और अब 2024 में क्यों जागे हैं।
हाईकोर्ट(Allahabad Highcourt) ने एएसआई के दलीलों को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट रूप से कहा कि एएसआई उन हिस्सों में सफेदी करेगा जहां इसकी आवश्यकता है। कोर्ट ने आदेश दिया कि अगले एक सप्ताह के भीतर मस्जिद में रंगाई-पुताई का कार्य शुरू कर दिया जाए। यह फैसला मस्जिद कमेटी के लिए राहत का कारण बना और प्रशासनिक स्तर पर भी इस विवाद को सुलझाने का रास्ता खोला। इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला शाही जामा मस्जिद के मामले में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। कोर्ट ने मस्जिद कमेटी को रंगाई पुताई की अनुमति दे दी, लेकिन यह भी सुनिश्चित किया कि ढांचे को कोई नुकसान न पहुंचे। इससे न केवल धार्मिक स्थल की मरम्मत की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया, बल्कि मस्जिद के संरक्षण के मामले में एक अहम न्यायिक निर्णय भी लिया गया।Allahabad Highcourt: