योगी सरकार का बड़ा ऐलान करीब, इन शिक्षकों की बदलेगी भुगतान व्यवस्था
नियम लागू होते ही उत्तर प्रदेश के वित्तविहीन स्कूलों में शिक्षक रखने से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया मानकों से बंधेगी, यानी स्कूल प्रबंधन की मनमर्जी की जगह अब सरकारी नियम तय करेंगे कि शिक्षक को कितना और कैसे भुगतान मिलेगा।

UP News : उत्तर प्रदेश में वित्तविहीन माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाने वाले लाखों अंशकालिक शिक्षकों के लिए जल्द बड़ी खबर आ सकती है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अब इन शिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय दिलाने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। माध्यमिक शिक्षा विभाग एक नई नियमावली को अंतिम रूप दे रहा है, जिसमें शिक्षकों की सेवा शर्तें स्पष्ट होंगी और मानदेय को लेकर एक तय व पारदर्शी ढांचा बनाया जाएगा। नियम लागू होते ही उत्तर प्रदेश के वित्तविहीन स्कूलों में शिक्षक रखने से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया मानकों से बंधेगी, यानी स्कूल प्रबंधन की मनमर्जी की जगह अब सरकारी नियम तय करेंगे कि शिक्षक को कितना और कैसे भुगतान मिलेगा।
मानदेय पर योगी सरकार का फोकस
उत्तर प्रदेश में इस समय करीब 23 हजार वित्तविहीन माध्यमिक स्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों में चार लाख से अधिक अंशकालिक शिक्षक छात्रों को पढ़ा रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था में इन शिक्षकों की भागीदारी को 70 से 80 प्रतिशत तक बताया जाता है। यानी उत्तर प्रदेश के माध्यमिक स्तर पर शिक्षा की बड़ी जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर है, लेकिन वर्षों से मानदेय और नियमों को लेकर स्थिति असंतोषजनक बनी हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने नियमावली बनाने के लिए सचिव, माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर दी है। कमेटी को निर्देश हैं कि वह एक माह में रिपोर्ट सौंपे। रिपोर्ट में हर बिंदु की समीक्षा कर ऐसे प्रावधान शामिल किए जाएंगे, जिससे वित्तविहीन स्कूलों में शिक्षकों के मानदेय को लेकर एक समान और पारदर्शी व्यवस्था बन सके। नियमावली जारी होते ही स्कूल प्रबंधनों की मनमर्जी पर रोक लगने की उम्मीद है।
विधानमंडल तक पहुंचा था मामला
उत्तर प्रदेश विधानमंडल में भी वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय का मुद्दा उठ चुका है। उस समय सरकार ने कहा था कि कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद इस दिशा में कार्रवाई की जाएगी। अब कमेटी का गठन और नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया को उसी वादे की अगली कड़ी माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के महामंत्री राजीव यादव ने कहा है कि वित्तविहीन शिक्षकों के लिए मजबूत सेवा नियमावली बननी चाहिए और उन्हें सम्मानजनक मानदेय मिलना चाहिए। साथ ही नियमावली को जल्द जारी कर ज़मीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाए, ताकि उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में व्यवस्था एक जैसी रहे।
2001 के शासनादेश के बावजूद मानदेय में गड़बड़ी
वित्तविहीन माध्यमिक स्कूलों में अंशकालिक शिक्षकों की सेवा शर्तें 10 अगस्त 2001 को जारी शासनादेश के अनुसार तय हैं। शासनादेश में यह व्यवस्था है कि स्कूल प्रबंधन अपने संसाधनों के आधार पर भुगतान करेगा, पूरे शिक्षण सत्र में नियमित भुगतान होगा और उसका रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। इसके अनुसार कुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी से कम मानदेय नहीं दिया जा सकता और भविष्य निधि (PF) व जीवन बीमा जैसी सुविधाओं का भी प्रावधान है। लेकिन तस्वीर यह है कि उत्तर प्रदेश के कई स्कूलों में इन नियमों का पूरा पालन नहीं हो रहा। कई जगहों पर शिक्षकों को सिर्फ 5,000 से 6,000 रुपये प्रतिमाह तक मानदेय मिलने की शिकायतें सामने आती रही हैं। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश में वित्तविहीन माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाने वाले लाखों अंशकालिक शिक्षकों के लिए जल्द बड़ी खबर आ सकती है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अब इन शिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय दिलाने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। माध्यमिक शिक्षा विभाग एक नई नियमावली को अंतिम रूप दे रहा है, जिसमें शिक्षकों की सेवा शर्तें स्पष्ट होंगी और मानदेय को लेकर एक तय व पारदर्शी ढांचा बनाया जाएगा। नियम लागू होते ही उत्तर प्रदेश के वित्तविहीन स्कूलों में शिक्षक रखने से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया मानकों से बंधेगी, यानी स्कूल प्रबंधन की मनमर्जी की जगह अब सरकारी नियम तय करेंगे कि शिक्षक को कितना और कैसे भुगतान मिलेगा।
मानदेय पर योगी सरकार का फोकस
उत्तर प्रदेश में इस समय करीब 23 हजार वित्तविहीन माध्यमिक स्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों में चार लाख से अधिक अंशकालिक शिक्षक छात्रों को पढ़ा रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था में इन शिक्षकों की भागीदारी को 70 से 80 प्रतिशत तक बताया जाता है। यानी उत्तर प्रदेश के माध्यमिक स्तर पर शिक्षा की बड़ी जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर है, लेकिन वर्षों से मानदेय और नियमों को लेकर स्थिति असंतोषजनक बनी हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने नियमावली बनाने के लिए सचिव, माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर दी है। कमेटी को निर्देश हैं कि वह एक माह में रिपोर्ट सौंपे। रिपोर्ट में हर बिंदु की समीक्षा कर ऐसे प्रावधान शामिल किए जाएंगे, जिससे वित्तविहीन स्कूलों में शिक्षकों के मानदेय को लेकर एक समान और पारदर्शी व्यवस्था बन सके। नियमावली जारी होते ही स्कूल प्रबंधनों की मनमर्जी पर रोक लगने की उम्मीद है।
विधानमंडल तक पहुंचा था मामला
उत्तर प्रदेश विधानमंडल में भी वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय का मुद्दा उठ चुका है। उस समय सरकार ने कहा था कि कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद इस दिशा में कार्रवाई की जाएगी। अब कमेटी का गठन और नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया को उसी वादे की अगली कड़ी माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के महामंत्री राजीव यादव ने कहा है कि वित्तविहीन शिक्षकों के लिए मजबूत सेवा नियमावली बननी चाहिए और उन्हें सम्मानजनक मानदेय मिलना चाहिए। साथ ही नियमावली को जल्द जारी कर ज़मीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाए, ताकि उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में व्यवस्था एक जैसी रहे।
2001 के शासनादेश के बावजूद मानदेय में गड़बड़ी
वित्तविहीन माध्यमिक स्कूलों में अंशकालिक शिक्षकों की सेवा शर्तें 10 अगस्त 2001 को जारी शासनादेश के अनुसार तय हैं। शासनादेश में यह व्यवस्था है कि स्कूल प्रबंधन अपने संसाधनों के आधार पर भुगतान करेगा, पूरे शिक्षण सत्र में नियमित भुगतान होगा और उसका रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। इसके अनुसार कुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी से कम मानदेय नहीं दिया जा सकता और भविष्य निधि (PF) व जीवन बीमा जैसी सुविधाओं का भी प्रावधान है। लेकिन तस्वीर यह है कि उत्तर प्रदेश के कई स्कूलों में इन नियमों का पूरा पालन नहीं हो रहा। कई जगहों पर शिक्षकों को सिर्फ 5,000 से 6,000 रुपये प्रतिमाह तक मानदेय मिलने की शिकायतें सामने आती रही हैं। UP News












