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अब राज्य में सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्री कराना बेहद जरूरी हो गया है। साफ किया गया है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त उन्हीं किसानों को मिलेगी, जिनके पास वैध फार्मर आईडी होगी।

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UP News : उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए एक बड़ा प्रशासनिक अपडेट सामने आया है। अब राज्य में सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्री कराना बेहद जरूरी हो गया है। साफ किया गया है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त उन्हीं किसानों को मिलेगी, जिनके पास वैध फार्मर आईडी होगी। ऐसे में उत्तर प्रदेश के किसानों को समय रहते यह प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है, ताकि किसी भी सरकारी सहायता से वंचित न रहना पड़े। रामपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कृषि से जुड़ी लाभार्थी योजनाओं को अब एक अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित तंत्र से जोड़ा जा रहा है। इसी दिशा में फार्मर रजिस्ट्री को अनिवार्य बनाया गया है।
प्रशासन के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में केवल पीएम किसान सम्मान निधि ही नहीं, बल्कि कृषि विभाग की दूसरी सुविधाएं भी अब फार्मर रजिस्ट्री से जुड़ेंगी। इसके अलावा उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता और लघु सिंचाई जैसे विभागों की लाभार्थीपरक योजनाओं में भी इस पहचान प्रणाली को अहम आधार बनाया जा रहा है। सरकार की मंशा यह है कि प्रदेश में किसानों के डाटा को व्यवस्थित किया जाए और पात्र लाभार्थियों की सही पहचान हो सके। पहले चरण में खाद, उन्नत बीज, कीटनाशक और दूसरे कृषि इनपुट के वितरण में फार्मर आईडी की भूमिका बढ़ेगी। यानी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए आगे चलकर खेती से जुड़ी जरूरी सरकारी सुविधाएं पाने में यह रजिस्ट्री बेहद अहम साबित होने वाली है। लाभार्थियों के चयन से लेकर सहायता वितरण तक, पूरी प्रक्रिया को इसी डेटाबेस से जोड़े जाने की तैयारी की जा रही है।
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए सबसे अहम बात यह है कि आने वाले समय में सरकारी खरीद केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल बेचने के लिए भी फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य होगी। यानी गेहूं, धान, दालें, सरसों और दूसरी फसलों को सरकारी दर पर बेचने के लिए किसान के पास यह पहचान दर्ज होना जरूरी रहेगा। बिना फार्मर आईडी के सरकारी खरीद प्रक्रिया में परेशानी आ सकती है। इस फैसले का सीधा असर उत्तर प्रदेश के उन किसानों पर पड़ेगा, जो अपनी उपज सरकार को बेचकर MSP का लाभ लेते हैं। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया को टालें नहीं, क्योंकि बाद में जल्दबाजी में दस्तावेज या पंजीकरण संबंधी दिक्कतें सामने आ सकती हैं।
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। गांवों के पंचायत भवनों में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां किसान जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी जन सुविधा केंद्र (CSC) पर भी यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है। प्रशासन की कोशिश है कि किसानों को ज्यादा भागदौड़ न करनी पड़े और गांव या ब्लॉक स्तर पर ही उनका काम पूरा हो जाए। इस अभियान को तेजी देने के लिए लेखपाल, कृषि प्राविधिक सहायक, पंचायत सचिव और पंचायत सहायकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन्हें किसान पंजीकरण में मदद करने के लिए तैनात किया गया है, ताकि उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में भी अधिक से अधिक किसान इस व्यवस्था से जुड़ सकें।
फार्मर रजिस्ट्री कराने के लिए किसानों को कुछ जरूरी दस्तावेज अपने साथ रखने होंगे। इनमें आधार कार्ड, जमीन की नवीनतम खतौनी और आधार से लिंक मोबाइल नंबर शामिल है। पंजीकरण के दौरान मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी के जरिए ही प्रक्रिया पूरी होगी। इसलिए उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए यह जरूरी है कि वे वही मोबाइल नंबर साथ रखें जो आधार से जुड़ा हुआ हो। UP News
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