पीएम मोदी से मिले जयंत चौधरी, अखिलेश यादव के जुबानी हमलों के बीच मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल; कैबिनेट विस्तार को लेकर भी चर्चाएं तेज

उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच चल रही जुबानी जंग के बीच बुधवार को एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। केंद्रीय राज्य मंत्री तथा RLD के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात को उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और आने वाले विधानसभा चुनावों के लिहाज से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जयंत चौधरी ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की जानकारी साझा की।
जयंत चौधरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। हाल ही में अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी को लेकर 'चवन्नी' वाला तंज किया था। इसके जवाब में जयंत चौधरी ने भी तीखा पलटवार करते हुए कहा था कि राजनीति में अहंकार का परिणाम पतन होता है। इस बयान के बाद दोनों दलों के बीच पुरानी राजनीतिक नजदीकियों के मुकाबले मौजूदा दूरी और अधिक स्पष्ट दिखाई देने लगी है। दरअसल, 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में RLD ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया था, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जयंत चौधरी की पार्टी एनडीए में शामिल हो गई। इसके बाद से जयंत चौधरी और अखिलेश यादव के राजनीतिक रास्ते अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं। मौजूदा बयानबाजी ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश के सियासी समीकरणों को लेकर चर्चाएं और तेज कर दी हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के साथ जयंत चौधरी की मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आगामी केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में जयंत चौधरी को कैबिनेट स्तर की जिम्मेदारी दी जा सकती है। फिलहाल जयंत चौधरी केंद्र सरकार में कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
जयंत चौधरी की राजनीति का सबसे मजबूत आधार पश्चिमी उत्तर प्रदेश माना जाता है। RLD का प्रभाव विशेष रूप से किसान और जाट राजनीति से जुड़ा रहा है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और RLD के बीच तालमेल उत्तर प्रदेश के चुनावी समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। अखिलेश यादव की ओर से जयंत चौधरी पर लगातार हमले और दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी के साथ जयंत की मुलाकात ने इस चर्चा को और हवा दी है कि उत्तर प्रदेश में एनडीए अपने सहयोगी दलों के साथ राजनीतिक समीकरण को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
जयंत चौधरी के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत का केंद्र कृषि, कौशल प्रतियोगिताएं, नीति निर्माण, रचनात्मक सोच और सुशासन में जनभागीदारी जैसे विषय रहे। यानी जयंत चौधरी ने सार्वजनिक रूप से मुलाकात को नीतिगत और विकास से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित बताया है। लेकिन राजनीतिक घटनाक्रम का समय इस मुलाकात को अलग महत्व दे रहा है। एक तरफ अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच बयानबाजी तेज है, दूसरी तरफ केंद्र में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाएं भी चल रही हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री और जयंत चौधरी की मुलाकात को लेकर राजनीतिक विश्लेषक इसके व्यापक राजनीतिक संकेत तलाश रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में RLD की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। वहीं समाजवादी पार्टी भी अपने सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच बढ़ती तल्खी केवल दो नेताओं की बयानबाजी नहीं, बल्कि आने वाले समय में गठबंधन की राजनीति पर भी असर डाल सकती है। प्रधानमंत्री मोदी से जयंत चौधरी की ताजा मुलाकात ने इसी राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह मुलाकात केवल नीतिगत विषयों पर चर्चा तक सीमित थी या आने वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी कोई महत्वपूर्ण राजनीतिक बातचीत हुई? इसका जवाब आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।
विज्ञापन