केशव मौर्य का पलटवार, अखिलेश के देशभक्ति पर सवाल उठाया

समाजवादी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने देश में एलपीजी की कमी के लिए केंद्र सरकार की विदेश नीति को जिम्मेदार ठहराया था।

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अखिलेश यादव, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य में तीखी प्रतिक्रिया
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar15 Mar 2026 04:39 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में गैस संकट को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने देश में एलपीजी की कमी के लिए केंद्र सरकार की विदेश नीति को जिम्मेदार ठहराया था। उनके इस बयान पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह अखिलेश यादव को देशद्रोही तो नहीं कहेंगे, लेकिन उनकी देशभक्ति पर सवाल जरूर उठते हैं।

देशद्रोही नहीं, लेकिन देशभक्ति पर शक

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया ऊर्जा संकट से जूझ रही है। ऐसे हालात में देश के जिम्मेदार नेताओं को संयमित बयान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ नेता अनावश्यक बयान देकर लोगों में भ्रम और घबराहट फैलाने का काम कर रहे हैं। मौर्य के अनुसार, पहले देश में रोजाना लगभग 50 से 55 लाख एलपीजी सिलेंडरों की बुकिंग होती थी, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के कारण यह संख्या बढ़कर करीब 88 लाख तक पहुंच गई है। इससे आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।

वैश्विक तनाव को बताया गैस संकट की वजह 

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है। इजराइल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की सप्लाई को प्रभावित किया है। इसका असर कई देशों की तरह भारत पर भी दिखाई दे रहा है।

केंद्र की विदेश नीति पर अखिलेश यादव का हमला

इससे पहले अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा था कि भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए थी। उनका कहना था कि ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर वैश्विक कूटनीति से जुड़ी होती है और यदि विदेश नीति मजबूत होती तो देश में एलपीजी की कमी जैसी स्थिति नहीं बनती। मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि मौजूदा हालात सरकार की नीतियों की कमजोरी को उजागर करते हैं।

वैश्विक ऊर्जा मार्ग पर तनाव का असर 

मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बाद स्ट्रेट आॅफ होर्मुज को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर इस क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के साथ-साथ भारत की आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।


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एशिया की सबसे बड़ी चीनी उत्तर प्रदेश में कहां है, लाखों किसानों की बनी है लाइफलाइन

उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन के मामले में देश का अग्रणी राज्य माना जाता है। पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती की जाती है। इसी गन्ना उत्पादन के दम पर प्रदेश में कई बड़ी चीनी मिलें संचालित होती हैं।

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त्रिवेणी इंजीनियरिंग एण्ड इंडस्ट्री द्वारा संचालित त्रिवेणी चीनी मिल
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar15 Mar 2026 03:10 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन के मामले में देश का अग्रणी राज्य माना जाता है। पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती की जाती है। इसी गन्ना उत्पादन के दम पर प्रदेश में कई बड़ी चीनी मिलें संचालित होती हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि एशिया की सबसे बड़ी चीनी मिल भी उत्तर प्रदेश में ही स्थित है, जो लाखों किसानों की आजीविका का बड़ा सहारा बनी हुई है।

भारत का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है उत्तर प्रदेश 

उत्तर प्रदेश लंबे समय से गन्ना उत्पादन में देश में पहले स्थान पर बना हुआ है। यहां की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और अनुकूल जलवायु गन्ने की खेती के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती है। कृषि आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022-23 में प्रदेश में करीब 2252.2 लाख टन गन्ने का उत्पादन हुआ था, जो देश में सबसे अधिक है। 

प्रदेश में करीब 125 चीनी मिलें संचालित

अगर चीनी उद्योग की बात करें तो उत्तर प्रदेश में लगभग 125 चीनी मिलें संचालित हैं। इनमें से अधिकतर मिलें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थित हैं। प्रमुख जिलों में बिजनौर, शामली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ के अलावा पूर्वांचल के गोरखपुर और कुशीनगर जैसे जिलों में भी कई चीनी मिलें मौजूद हैं।

मुजफ्फरनगर में स्थित है एशिया की सबसे बड़ी चीनी मिल

एशिया की सबसे बड़ी चीनी मिल उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के खतौली में स्थित है। इस मिल को त्रिवेणी इंजीनियरिंग एण्ड इंडस्ट्री द्वारा संचालित त्रिवेणी चीनी मिल के नाम से जाना जाता है। यह मिल उत्पादन और भंडारण क्षमता के मामले में एशिया की सबसे बड़ी मिलों में गिनी जाती है। यहां हर साल बड़ी मात्रा में गन्ने की पेराई की जाती है, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिलता है और आसपास के लाखों किसानों को सीधा लाभ पहुंचता है।

1993 से संचालित हो रही है खतौली की यह मिल

मुजफ्फरनगर के खतौली में स्थित यह विशाल चीनी मिल 1993 से संचालित हो रही है। इसका स्थान भी भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह गंग नहर क्षेत्र के पास स्थित है, जहां गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है। भारत दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक देशों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर चीनी उत्पादन में ब्राजील पहले स्थान पर है, जबकि उसके बाद इंडिया और चाइना का स्थान आता है। भारत में तैयार की गई चीनी का निर्यात कई देशों में किया जाता है।



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UP SI Exam के एक सवाल से क्यों मचा है बवाल? जानें कैसे बनता है प्रश्नपत्र

उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में एक सवाल के विकल्प में “पंडित” शब्द दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। कई नेताओं ने इसे लेकर आपत्ति जताई है और जांच की मांग की है। इस पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश में परीक्षा प्रणाली और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

UP SI Exam Controversy
UP Police SI Exam Controversy
locationभारत
userअसमीना
calendar15 Mar 2026 11:02 AM
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उत्तर प्रदेश में आयोजित उप निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा को लेकर इन दिनों बड़ा विवाद सामने आया है। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती से जुड़ी इस परीक्षा के एक सवाल में दिए गए विकल्प को लेकर आपत्ति जताई जा रही है। मामला इतना बढ़ गया कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी इसकी चर्चा होने लगी। इस परीक्षा में शामिल लाखों अभ्यर्थियों के बीच भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में एक सवाल के विकल्प में “पंडित” शब्द दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। कई नेताओं ने इसे लेकर आपत्ति जताई है और जांच की मांग की है। इस पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश में परीक्षा प्रणाली और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सवाल उठ रहा है कि उत्तर प्रदेश की इस महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र आखिर बनाता कौन है, उस पर अंतिम मुहर कौन लगाता है और गलती होने पर जिम्मेदारी किसकी होती है।

क्या है पूरा विवाद?

उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा 14 और 15 मार्च 2026 को आयोजित की जा रही है। यह परीक्षा चार पालियों में आयोजित की जा रही है। 14 मार्च की परीक्षा में सामान्य हिन्दी के प्रश्नपत्र में एक सवाल पूछा गया था-

“अवसर के अनुसार बदल जाने वाला” इस वाक्यांश के लिए एक शब्द चुनिए।

इसके लिए चार विकल्प दिए गए थे:

A – पंडित

B – अवसरवादी

C – निष्कपट

D – सदाचारी

इसी सवाल में “पंडित” शब्द को विकल्प के रूप में शामिल करने पर विवाद शुरू हो गया। कई लोगों ने इसे गलत और आपत्तिजनक बताया।

नेताओं की प्रतिक्रिया और जांच की मांग

इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी इस सवाल के विकल्प पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और किसी भी जाति या समुदाय का अपमान करने वाली चीज स्वीकार नहीं की जाएगी।

कितने पदों के लिए हो रही है परीक्षा?

उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा लगभग 4500 पदों के लिए आयोजित की जा रही है। इस भर्ती में करीब 15 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। परीक्षा के लिए पूरे राज्य में लगभग 1100 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं जहां सुरक्षा और गोपनीयता के साथ परीक्षा आयोजित की जा रही है।

प्रश्नपत्र बनाने की जिम्मेदारी किसकी होती है?

उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा का आयोजन उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा किया जाता है। इस बोर्ड के प्रमुख आमतौर पर महानिदेशक स्तर के अधिकारी होते हैं और उनके साथ पुलिस अधिकारियों की टीम काम करती है। हालांकि, प्रश्नपत्र तैयार करने का पूरा काम अक्सर किसी निजी एजेंसी को दिया जाता है। यह एजेंसी विशेषज्ञों की मदद से प्रश्न तैयार करवाती है, उनकी जांच करती है और फिर प्रश्नपत्र तैयार करती है।

विशेषज्ञों की टीम कैसे बनाती है प्रश्न?

किसी भी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा के लिए विषय विशेषज्ञों का एक पैनल तैयार किया जाता है। इसमें विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, सेवानिवृत्त अधिकारी और विषय के जानकार शामिल होते हैं। इन विशेषज्ञों को सिलेबस के अनुसार बड़ी संख्या में प्रश्न तैयार करने के निर्देश दिए जाते हैं। बाद में इन सभी प्रश्नों को एक सुरक्षित प्रश्न बैंक में रखा जाता है।

मॉडरेशन प्रक्रिया क्यों होती है जरूरी?

जब प्रश्न तैयार हो जाते हैं तो उन्हें एक विशेष समिति द्वारा जांचा जाता है। इसे मॉडरेशन प्रक्रिया कहा जाता है। इस दौरान यह देखा जाता है कि सवाल सिलेबस के अनुसार हैं या नहीं, किसी प्रश्न के एक से ज्यादा सही उत्तर तो नहीं हैं, भाषा स्पष्ट और सही है या नहीं, प्रश्नों का स्तर आसान, मध्यम और कठिन में संतुलित है या नहीं। माना जा रहा है कि इस मामले में इसी चरण में कहीं न कहीं गलती हुई है।

अंतिम प्रश्नपत्र पर कौन लगाता है मुहर?

जब सभी प्रश्नों की जांच पूरी हो जाती है, तो परीक्षा से पहले परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था का कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन या उच्च स्तरीय समिति अंतिम प्रश्नपत्र का चयन करती है। अक्सर दो या तीन अलग-अलग सेट तैयार रखे जाते हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में दूसरा प्रश्नपत्र इस्तेमाल किया जा सके। अंतिम चयन के बाद उस पर आधिकारिक मंजूरी दी जाती है।

प्रिंटिंग और सुरक्षा की सख्त व्यवस्था

प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उन्हें बेहद सुरक्षित प्रिंटिंग प्रेस में छापा जाता है। इस दौरान वहां काम करने वाले कर्मचारियों को बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग रखा जाता है। प्रिंटिंग के बाद प्रश्नपत्र सीलबंद बॉक्स में रखे जाते हैं और कड़ी सुरक्षा के साथ परीक्षा केंद्रों या बैंक के स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुंचाए जाते हैं।

भविष्य में कैसे रोके जा सकते हैं ऐसे विवाद?

विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा की पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जैसी संस्थाओं की मदद ली जा सकती है। इन संस्थाओं के पास देशभर के विशेषज्ञों का बड़ा नेटवर्क होता है और इनके जरिए प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता बेहतर बनाए रखी जा सकती है।

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