इटावा कांड पर गरमाई सियासत, अखिलेश की चेतावनी पर योगी सरकार का पलटवार
UP News
उत्तर प्रदेश
RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 03:16 AM
उत्तर प्रदेश
RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 03:16 AM
UP News : उत्तर प्रदेश के इटावा में कथावाचकों के साथ हुई बदसलूकी ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मामले में कड़ी कार्रवाई न होने पर बड़ा आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है। वहीं, इस चेतावनी का जवाब देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने स्पष्ट कहा है कि "इस मामले में तत्काल कार्रवाई हुई है, इसलिए आंदोलन की कोई आवश्यकता नहीं।
कपिल देव अग्रवाल ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, लेकिन साथ ही जोर देकर कहा कि सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की और आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है। उनका कहना था कि योगी सरकार पिछली सरकारों की तरह नहीं है, जो ऐसे मामलों में ढील देती थी। "सत्ता की राजनीति के बजाय अखिलेश यादव को सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में सहयोग देना चाहिए ।
PDA की बात पर तीखा जवाब
अखिलेश यादव द्वारा इस घटना को ‘पीडीए’ यानी पिछड़े-दलित-अल्पसंख्यक वर्ग से जोड़ने पर कपिल देव ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि “हर मामले में पीडीए का एंगल जोड़ना गलत है। यह एक सामाजिक विद्वेष का मामला है, जिसे कानून के दायरे में लाकर सुलझाया जा रहा है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कोई भी हो।
अखिलेश यादव की चेतावनी
इससे पहले, अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए लिखा था कि इटावा जिले के बकेवर थाना क्षेत्र के दान्दरपुर गांव में भागवत कथा के दौरान कथावाचकों की जाति पूछकर अपमानित किया गया। आरोप है कि कथावाचक मुकुट मणि यादव और उनके सहयोगी संत कुमार यादव के साथ अभद्रता करते हुए उनके बाल काटे गए, नाक रगड़वाई गई, और क्षेत्र की ‘शुद्धि’ करवाई गई।
अखिलेश ने इस कृत्य को संविधान और मानव गरिमा के खिलाफ बताया और तीन दिन के भीतर सभी आरोपियों की गिरफ्तारी तथा कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की। चेतावनी दी गई कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो पीडीए के मान-सम्मान की रक्षा के लिए बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
घटना इटावा के दान्दरपुर गांव की है, जहां कथावाचक मुकुट मणि यादव और संत कुमार यादव के साथ कथित रूप से ब्राह्मण समुदाय के कुछ लोगों ने जातिगत आधार पर अभद्रता की। आरोप है कि बाल और चोटी काटी गई, वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया, और पीड़ितों पर मानव मूत्र तक छिड़का गया। इसके साथ ही कथावाचकों के साज-सामान तोड़े गए और उन्हें बंधक बनाकर फर्जी करार देने की कोशिश भी की गई। पीड़ितों की शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की है।
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