
इस टिप्पणी को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बिना नाम लिए अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए लिखा - नेताजी ने 2012 में एक कच्चे आम को पका हुआ आम समझने की भूल की थी. और वो जीवन पर्यंत पछताते रहे। यह बयान सीधे तौर पर 2012 की उस राजनीतिक घटना की ओर इशारा करता है, जब मुलायम सिंह यादव ने पूर्ण बहुमत से सत्ता में लौटने के बाद मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी अखिलेश यादव को सौंप दी थी।
हालांकि इसके कुछ वर्षों बाद ही सपा में भीतरी कलह उभर आई और पार्टी दो धड़ों में बंटती नजर आई। 2017 के चुनाव से पहले अखिलेश ने पार्टी की कमान अपने हाथों में ले ली और मुलायम सिंह को मार्गदर्शक मंडल तक सीमित कर दिया गया। यह दौर पिता-पुत्र के संबंधों में भी काफी खटास का रहा। UP News