माना जा रहा है कि इन छापों के दौरान जब्त दस्तावेजों, की गई कार्रवाई और संबंधित फाइलों की बारीकी से पड़ताल की जाएगी। ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं छापेमारी के बाद सेटिंग और लेन-देन का कोई पैटर्न तो नहीं चला।

UP News : उत्तर प्रदेश के झांसी में सामने आए जीएसटी विभाग से जुड़े कथित रिश्वत प्रकरण में सीबीआई (CBI) की जांच अब सिर्फ एक-दो अफसरों तक सीमित नहीं रहने वाली है। सूत्रों के मुताबिक एजेंसी ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए पिछले चार वर्षों में उत्तर प्रदेश में बड़े कारोबारियों के यहां हुई जीएसटी/सीजीएसटी छापेमारी (GST raids) का रिकॉर्ड जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि इन छापों के दौरान जब्त दस्तावेजों, की गई कार्रवाई और संबंधित फाइलों की बारीकी से पड़ताल की जाएगी। ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं छापेमारी के बाद सेटिंग और लेन-देन का कोई पैटर्न तो नहीं चला। सीबीआई ने इस मामले में झांसी की डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी समेत कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, कार्रवाई के दौरान नकदी, जेवर और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद होने की बात सामने आई है। इसके बाद जब विभाग के भीतर के कुछ कर्मचारियों और व्यापारियों के बयान दर्ज किए गए, तो एजेंसी को कथित तौर पर ऐसे संकेत मिले कि रिश्वत और डील का खेल कुछ मामलों में पहले भी चलाया गया हो सकता है। हालांकि, सीबीआई अभी इन जानकारियों की सत्यता की पुष्टि कर रही है और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई अब उत्तर प्रदेश में 2022 से 2025 के बीच लखनऊ, कानपुर समेत कई बड़े शहरों में हुई जीएसटी/सीजीएसटी की हाई-प्रोफाइल छापेमारियों की फाइलें भी री-चेक करने जा रही है। जांच एजेंसी इन केस फाइलों में यह तलाशेगी कि रेड किस आधार पर पड़ी, मौके से कौन-कौन से दस्तावेज जब्त हुए, उसके बाद विभाग ने क्या कार्रवाई की और फाइल किन-किन टेबलों से होकर पास हुई। यानी सिर्फ छापे की रिपोर्ट नहीं, बल्कि नोटशीट, अनुमोदन और पूरे फाइल मूवमेंट तक की कड़ी जांच होगी।
जांच से जुड़े लोगों का कहना है कि झांसी प्रकरण में सिर्फ अफसर ही नहीं, बल्कि कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। दावा किया जा रहा है कि कथित रिश्वतखोरी को मैनेज करने के लिए विभाग के भीतर सहायक नेटवर्क सक्रिय था। यदि दस्तावेज और बयानों से इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश में कई और अफसर-कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक सकती है। फिलहाल सीबीआई की जांच जारी है और एजेंसी का फोकस उत्तर प्रदेश में जीएसटी छापों के बाद हुए निर्णयों, फाइल मूवमेंट और कथित लेन-देन के संकेतों को दस्तावेजी तौर पर जोड़ने पर बताया जा रहा है। UP News