विज्ञापन
Prateek Yadav's Funeral: ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने दामाद प्रतीक को मुखाग्नि दी। इसे लेकर सवाल उठाने लगे कि क्या ससुर अपने दामाद की अंत्येष्टि क्रिया कर सकता है।

UP NEWS : समाजवादी पार्टी के संस्थापक दिवंगत मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार गुरुवार को लखनऊ के बैकुंठ धाम में संपन्न हुआ। इस दौरान सपा प्रमुख सहित पूरा यादव परिवार मौजूद रहा। प्रतीक की पत्नी और बीजेपी नेता अपर्णा यादव, उनकी बेटियां प्रथमा तथा पद्मजा एवं अन्य रिश्तेदारों ने उन्हें अश्रुपूर्ण विदाई दी। शव यात्रा के दौरान सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव के बेटे आदित्य यादव ने अर्थी को कंधा दिया।
ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने दामाद प्रतीक को मुखाग्नि दी। इसे लेकर सवाल उठाने लगे कि क्या ससुर अपने दामाद की अंत्येष्टि क्रिया कर सकता है। आमतौर ऐसा नहीं देखा जाता। लोगों ने सोशल मीडिया पर भी पूछा कि भाई अखिलेश यादव के होते हुए ससुर ने चिता को आग क्यों दी?
सनातन धर्म में संबंधों का महत्व
सनातन धर्म में संबंधों को बहुत महत्व दिया गया है। हिंदू परंपरा में जो सोलह संस्कार निर्धारित किए गए हैं वह किसी न किसी रिश्तेदार के द्वारा ही संपन्न होते हैं। अंतिम संस्कार एक तरीके से जीव की आत्मा को भौतिक संसार से अलग करता है। UP NEWS
गरुण पुराण क्या कहता है?
जानकार बताते हैं कि गरुण पुराण में विस्तार से हिंदू रीतियों और संस्कारों के बारे में बताया गया है। गरुण पुराण के 14 वें और 15 वें अध्याय अंतिम संस्कार और मुखाग्नि से संबंधित है। मुखाग्नि का सबसे पहला दायित्व पुत्र का है. अगर पुत्र नहीं है या ज्यादा छोटा है तो पिता और भाई मुखाग्नि दे सकते हैं। यदि पुत्र, पिता और भाई भी नहीं है तो कोई भी रक्त संबंधी भी मुखाग्नि दे सकता । पुत्री के भी मुखाग्नि देने को निषेध नहीं माना गया है लेकिन संबोधन सिर्फ पुत्र के नाम का ही मिलता है।
कोई एक नियम नहीं
मुखाग्नि का मुख्य् उद्देश्य मृत शरीर को मुक्ति और आत्म को शांति प्रदान करना होता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में जोर इस बात पर है कि कर्तव्य ठीक ढंग से पूरा हो। क्षेत्रीय, संप्रदायगत और पारिवारिक मान्यताएं अलग-अलग हो सकती है। इसलिए इस विषय में कोई अंतिम या एकमात्र नियम नहीं मिलता। जो भी नियम है वह परिस्थितियों और जानकारों के सुझाव के आधार पर तय होते हैं। UP NEWS
विज्ञापन