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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुए दर्दनाक कोल्ड स्टोरेज हादसे ने एक तरफ चार परिवारों से उनके अपने छीन लिए, तो दूसरी तरफ इस त्रासदी के बाद सामने आई तस्वीरों ने समाज की संवेदनहीनता पर भी बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है।

UP News : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुए दर्दनाक कोल्ड स्टोरेज हादसे ने एक तरफ चार परिवारों से उनके अपने छीन लिए, तो दूसरी तरफ इस त्रासदी के बाद सामने आई तस्वीरों ने समाज की संवेदनहीनता पर भी बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है। फाफामऊ क्षेत्र के चंदापुर स्थित शीतगृह के ढहने से जहां चार लोगों की मौत हो गई और कई किसान अपनी उपज व पूंजी को लेकर बर्बाद हो गए, वहीं हादसे के अगले ही दिन मलबे से निकाले जा रहे आलू को मुफ्त में ले जाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। मंगलवार को दिनभर ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी को झकझोर दिया। जिस स्थान पर कुछ घंटे पहले तक राहत और बचाव अभियान चल रहा था, उसी इलाके में लोग बोरे, थैले और कपड़ों में आलू भरते नजर आए। सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम के कई वीडियो भी तेजी से वायरल हुए, जिनमें साफ दिखा कि हादसे की गंभीरता से इतर बड़ी संख्या में लोग सिर्फ मुफ्त आलू ले जाने की होड़ में जुटे थे।
स्थानीय लोगों को जैसे ही यह पता चला कि बेला कछार इलाके में मलबे के साथ बड़ी मात्रा में आलू भी फेंके जा रहे हैं, वहां लोगों का पहुंचना शुरू हो गया। देखते ही देखते भीड़ इतनी बढ़ गई कि हर कोई ज्यादा से ज्यादा आलू समेटने की कोशिश में लग गया। कोई ई-रिक्शा में बोरी लाद रहा था, तो कोई बाइक पर थैले टांगकर निकलता दिखा। कई लोग ऐसे भी नजर आए, जिन्हें बोरी नहीं मिली तो उन्होंने कपड़ों, बैग और प्लास्टिक के थैलों में ही आलू भर लिए। यूपी के इस दर्दनाक हादसे के बाद जो तस्वीर सामने आई, उसने यह भी दिखा दिया कि आपदा के क्षणों में समाज का एक चेहरा बेहद असहज करने वाला भी होता है। जो आलू किसी किसान या कारोबारी की मेहनत और कमाई का आधार था, वही कुछ ही घंटों में खुले मैदान में ‘मुफ्त सामान’ की तरह बंटता दिखाई दिया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा एक बोलेरो वाहन को लेकर रही। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मौके पर एक ऐसी बोलेरो भी पहुंची, जिस पर ‘उत्तर प्रदेश सरकार’ लिखा हुआ था। बताया गया कि उसमें भी आलू की बोरियां भरकर ले जाई गईं। इस दृश्य के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, वाहन किसका था और किस उद्देश्य से वहां पहुंचा था, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ स्पष्ट नहीं किया गया। जानकारी के अनुसार, हादसे के बाद बड़ी मात्रा में आलू खराब हो गया था। प्रशासन मलबे को हटवाने के साथ-साथ खराब उपज को कछार क्षेत्र में फिंकवा रहा था। इसी दौरान यह पूरा घटनाक्रम सामने आया। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुई इस घटना ने राहत कार्यों की निगरानी और आपदा प्रबंधन की संवेदनशीलता पर भी बहस छेड़ दी है। बता दें कि उत्तर प्रदेश के इस बहुचर्चित कोल्ड स्टोरेज हादसे में प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई भी तेज हुई है। चंदापुर स्थित आदर्श शीतगृह गिरने के मामले में पूर्व मंत्री और सपा नेता अंसार अहमद, उनके बेटे मंजूर अहमद और भतीजे अलाउद्दीन को अदालत ने न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। फाफामऊ पुलिस ने तीनों को हत्या समेत अन्य गंभीर धाराओं में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इस मामले में सख्त रुख दिखाया है। उद्यान विभाग के राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने जिला उद्यान अधिकारी सौरभ श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया। मंत्री ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ अस्पताल में भर्ती घायलों से भी मुलाकात की और पूरे मामले की जानकारी ली।
बता दें कि सोमवार को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चंदापुर स्थित आदर्श शीतगृह अचानक ढह गया था। इस हादसे में चार श्रमिकों की जान चली गई, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। कई घायलों का इलाज अभी भी अस्पताल में चल रहा है। राहत और बचाव कार्य के लिए देर रात सेना की मदद भी ली गई थी, जिससे मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास तेज किया जा सके। पुलिस ने इस मामले में शीतगृह प्रबंधन से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की है। मैनेजर उस्मान, मो. असलम बाबा, मो. इरफान और जावेद के खिलाफ भी हत्या के आरोप में नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अलावा पांच अज्ञात लोगों को भी केस में शामिल किया गया है।
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