प्रयागराज के मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम लगातार औचक निरीक्षण कर रहे हैं। कुंडा तहसील में वेतन रोकने से लेकर चांद खमरिया कृष्ण मृग आरक्षित क्षेत्र के विकास तक जानिए बड़े निर्देश।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज मंडल में इन दिनों मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम के लगातार निरीक्षण और कड़े निर्देश चर्चा में हैं। तहसील से लेकर अस्पताल, स्कूल, सड़क, बड़े निर्माण कार्य और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े क्षेत्रों तक मंडलायुक्त की सक्रियता दिखाई दे रही है। हालिया घटनाक्रमों में एक तरफ प्रतापगढ़ की कुंडा तहसील में अधिकारियों और कर्मचारियों की अनुपस्थिति तथा राजस्व वादों की लंबी पेंडेंसी पर जवाबदेही तय की गई, वहीं प्रयागराज के मेजा क्षेत्र में कृष्ण मृग आरक्षित क्षेत्र के संरक्षण और विकास के लिए व्यापक कार्ययोजना पर जोर दिया गया है। डॉ. लोकेश एम का मौजूदा प्रशासनिक फोकस केवल समीक्षा बैठकों तक सीमित नहीं दिखाई देता। कई मामलों में वह स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण कर रहे हैं और कमियां मिलने पर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण तथा सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दे रहे हैं।
संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम ने प्रतापगढ़ की कुंडा तहसील का औचक निरीक्षण किया। जनसुनवाई के दौरान उन्होंने फरियादियों से उनकी समस्याओं की जानकारी ली और शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान शिकायतों के निस्तारण के लिए लेखपालों की अनुपस्थिति सामने आई। अधिकारियों की ओर से लेखपालों और अधिवक्ताओं के बीच हालिया विवाद का हवाला दिया गया। मंडलायुक्त ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा कि प्रशासनिक विवादों के कारण आम फरियादियों को अपने मामलों के निस्तारण के लिए परेशान न होना पड़े। इसी मामले में जिलाधिकारी प्रतापगढ़ ने एसडीएम कुंडा को लेखपाल एसोसिएशन के महामंत्री और मंत्री के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए। मामला यहीं नहीं रुका। संपूर्ण समाधान दिवस में 11 विभागीय अधिकारी अनुपस्थित मिले। मंडलायुक्त ने सभी अनुपस्थित अधिकारियों का वेतन रोकने के निर्देश दिए। यह कार्रवाई इस बात की ओर इशारा करती है कि समाधान दिवस में केवल शिकायतें सुनना ही पर्याप्त नहीं माना जा रहा, बल्कि संबंधित विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति और मौके पर शिकायतों के निस्तारण को भी प्रशासनिक जवाबदेही का हिस्सा बनाया जा रहा है।

कुंडा तहसील में मंडलायुक्त ने जुलाई और अगस्त में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवसों से जुड़े निस्तारण रजिस्टरों की भी जांच की। जांच के दौरान शिकायतों के निस्तारण संबंधी आख्या में अनियमितता और अपूर्णता मिली। कुछ मामलों में मौके पर वास्तविक स्थिति का परीक्षण किए बिना ही आख्या दर्ज किए जाने की स्थिति प्रथम दृष्टया सामने आई। पंजीकरण रसीदों में भी खामियां मिलीं। अलग-अलग प्रकरणों में एक ही क्रमांक की रसीद अंकित पाए जाने की बात सामने आई। संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद मंडलायुक्त ने संबंधित माल बाबू के विरुद्ध एडवर्स एंट्री और विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए तथा सभी रजिस्टर तत्काल दुरुस्त कराने को कहा।
कुंडा तहसील में धारा 33 और 34 के अंतर्गत लंबित वादों की समीक्षा भी की गई। समीक्षा के दौरान धारा 34 के 90 दिन से अधिक पुराने 1,000 से ज्यादा वाद लंबित मिले। लंबित मामलों को लेकर तहसीलदार, तहसीलदार न्यायिक और तीनों नायब तहसीलदार संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद मंडलायुक्त ने इन अधिकारियों का लंबित वादों की पेंडेंसी समाप्त होने तक वेतन रोकने के निर्देश दिए। कुंडा तहसील की कार्रवाई की रिपोर्ट भी 19 सितंबर को प्रकाशित हुई, जिसमें एक हजार से अधिक पुराने वाद, रजिस्टर की गड़बड़ियों और अधिकारियों की अनुपस्थिति को निरीक्षण की प्रमुख कमियों के रूप में दर्ज किया गया।

जहां कुंडा में प्रशासनिक जवाबदेही का मामला सामने आया, वहीं प्रयागराज के मेजा तहसील स्थित चांद खमरिया कृष्ण मृग आरक्षित क्षेत्र में मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम ने संरक्षण और विकास की विस्तृत योजना पर जोर दिया। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, फॉरेस्ट कंजरवेटर, डीएफओ और अन्य अधिकारियों के साथ आरक्षित क्षेत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण में आरक्षित क्षेत्र की सुरक्षा, भूमि के डी-मार्केशन और स्पष्ट सीमांकन, वन विभाग को सुरक्षित हस्तांतरण, मजबूत बाउंड्री, जल स्रोतों, वर्षा जल संचयन, तालाब और बंधियों के निर्माण तथा आवश्यकतानुसार वृक्षारोपण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।
चांद खमरिया में सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव कृष्ण मृगों के लिए पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने से जुड़ा है। एनटीपीसी के सीएसआर फंड से अलग-अलग स्थानों पर सोलर पंप आधारित ब्लास्ट वेल विकसित करने पर सहमति बनी है। इनसे छोटे तालाब विकसित किए जाएंगे ताकि कृष्ण मृगों के लिए वर्षभर पानी उपलब्ध कराया जा सके। इसके अलावा आरक्षित क्षेत्र से कुछ दूरी पर बह रही नदी के पास पंपिंग स्टेशन बनाकर कैनाल के माध्यम से आरक्षित क्षेत्र तक पानी पहुंचाने की संभावनाओं का सर्वे कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। यानी आरक्षित क्षेत्र में संरक्षण की योजना केवल बाउंड्री तक सीमित नहीं है, बल्कि पानी और प्राकृतिक आहार की व्यवस्था को भी इसका हिस्सा बनाया जा रहा है।
आरक्षित क्षेत्र में कृष्ण मृगों के लिए प्राकृतिक आहार की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से मनरेगा के माध्यम से ग्रीन नर्सरी विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें स्थानीय परिस्थितियों और कृष्ण मृगों के प्राकृतिक आहार के अनुरूप वनस्पतियों के विकास पर ध्यान देने की योजना है। इसके साथ ही क्षेत्र में वर्षा जल संचयन, तालाब और बंधियों के निर्माण तथा जरूरत के अनुसार पौधरोपण पर भी जोर दिया गया है।
आरक्षित क्षेत्र में रह रहे लोगों के पुनर्वास को लेकर भी मंडलायुक्त ने निर्देश दिए हैं। प्रस्ताव के अनुसार वहां निवास कर रहे लोगों को एक स्थान पर आवासीय कॉलोनी के रूप में व्यवस्थित किया जाएगा। पात्र परिवारों को मुख्यमंत्री आवासीय योजना के माध्यम से आवास उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश मुख्य विकास अधिकारी को दिए गए हैं। इसका उद्देश्य एक तरफ आरक्षित क्षेत्र में मानव दबाव को व्यवस्थित करना और दूसरी तरफ वन्यजीवों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक क्षेत्र विकसित करना है।
चांद खमरिया आरक्षित क्षेत्र को विकसित करने की योजना में पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को भी शामिल किया गया है।
पर्यटन विभाग के इको पार्क में मिट्टी और खपरैल से बनी हट्स विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। उद्देश्य यह है कि पर्यटन सुविधाओं का विकास प्राकृतिक परिवेश को नुकसान पहुंचाए बिना किया जाए। वन विभाग द्वारा क्षेत्र में वॉच टावर भी विकसित किए जाएंगे। इससे एक ओर कृष्ण मृगों की निगरानी और संरक्षण में मदद मिलेगी, वहीं पर्यटकों को उनके प्राकृतिक आवास और विचरण क्षेत्र को देखने का अवसर मिलेगा।
डॉ. लोकेश एम की सक्रियता केवल राजस्व प्रशासन और पर्यावरणीय परियोजनाओं तक सीमित नहीं है।
सितंबर में स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई, मरीजों की देखभाल, संक्रमण नियंत्रण और अस्पताल सेवाओं से संबंधित कमियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार मरीजों और तीमारदारों की ओर से अस्पताल के बाहर दवाएं और जांच कराने संबंधी शिकायतें भी सामने आई थीं। 18 सितंबर को शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा के दौरान सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में साफ-सफाई, मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी मंडलायुक्त ने अधिकारियों को प्राथमिकता से सुधार करने के निर्देश दिए। प्रयागराज में 24 विकासखंडों में 2,832 परिषदीय विद्यालय होने की जानकारी समीक्षा में सामने आई।
प्रयागराज में बारिश के बाद खराब हुई सड़कों को लेकर भी मंडलायुक्त ने समीक्षा की है। सितंबर में हुई समीक्षा के दौरान लगभग 245 सड़क हिस्सों को मरम्मत और गड्ढा भरने के लिए चिन्हित किए जाने की जानकारी सामने आई। नगर निगम क्षेत्र में लगभग 96 किलोमीटर सड़क की मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने की भी रिपोर्ट है। 17 सितंबर को एक समीक्षा बैठक में बिना तैयारी पहुंचे अधिकारियों को वापस भेजे जाने की खबर भी सामने आई। मंडलायुक्त ने सड़क और निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा के लिए तथ्यात्मक एवं सचित्र सर्वे रिपोर्ट के साथ अधिकारियों को दोबारा बैठक में आने के निर्देश दिए। नैनी में निर्माणाधीन वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट की धीमी प्रगति पर भी मंडलायुक्त ने नाराजगी जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार परियोजना की अपेक्षित 60 प्रतिशत प्रगति के मुकाबले मौके पर लगभग 20-25 प्रतिशत काम पाया गया था और अनुपस्थित एई के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि तथा स्थानांतरण की संस्तुति के निर्देश दिए गए।
प्रयागराज में माघ मेला 2027 की तैयारियां भी मंडलायुक्त की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। हालिया समीक्षा में अधिकारियों को कार्यों में तेजी लाने और निर्धारित समय सीमा के भीतर सड़क, बिजली, पानी और सफाई जैसी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले माघ मेला तैयारियों की शुरुआती बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े टेंडर और पोंटून पुलों समेत बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर कार्ययोजना तैयार की गई थी।
डॉ. लोकेश एम के हालिया एक्शन को एक साथ देखने पर प्रशासनिक स्तर पर तीन बातें प्रमुख रूप से सामने आती हैं—निरीक्षण, जवाबदेही और समयबद्ध निस्तारण। कुंडा में शिकायतों और राजस्व वादों की पेंडेंसी पर कार्रवाई हो या चांद खमरिया में कृष्ण मृगों के लिए पानी और प्राकृतिक आहार की व्यवस्था; अस्पताल की व्यवस्थाएं हों या स्कूलों की साफ-सफाई; सड़कें हों या बड़ी निर्माण परियोजनाएं—मंडलायुक्त की ओर से मौके की स्थिति के आधार पर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं। प्रयागराज मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर डॉ. लोकेश एम को वर्तमान मंडलायुक्त के रूप में दर्ज किया गया है। आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार उनका बैच 2005 है।
प्रयागराज में मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम के हालिया निरीक्षणों ने प्रशासनिक मशीनरी में जवाबदेही और समयबद्ध कामकाज को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है। खास बात यह है कि कार्रवाई का दायरा केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित नहीं है। राजस्व न्यायालयों की पेंडेंसी से लेकर जनता की शिकायतों, अस्पतालों, स्कूलों, सड़कों, निर्माण परियोजनाओं और कृष्ण मृगों के संरक्षण तक अलग-अलग क्षेत्रों में निरीक्षण और समीक्षा की जा रही है। चांद खमरिया की योजना इस पूरी कवायद का दूसरा पहलू सामने लाती है—जहां प्रशासनिक सख्ती के साथ वन्यजीव संरक्षण, जल प्रबंधन, पुनर्वास और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को एक साथ आगे बढ़ाने की तैयारी है। यही वजह है कि प्रयागराज मंडल में इस समय डॉ. लोकेश एम के निरीक्षण और उनके निर्देश लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं।
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