प्रयागराज में ग्राम प्रधान के अचानक लापता होने से पुलिस महकमे में मचा हड़कंप, नहर से लेकर रेलवे स्टेशन तक चली तलाश और 13 टीमों के सर्च ऑपरेशन के बीच सातवें दिन सामने आया ऐसा सुराग, जिसने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी। आखिर कहां मिले ग्राम प्रधान और घर छोड़ने के पीछे क्या थी वजह?

सात दिन तक परिवार और पुलिस की बढ़ी रही चिंता, अपहरण की आशंका में दर्ज हुआ था मुकदमा; पूछताछ में ग्राम प्रधान ने बताई घर छोड़ने की असली वजह
UP News : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से लापता हुए एक ग्राम प्रधान की तलाश में पुलिस ने दिन-रात एक कर दिया। नहरों से लेकर रेलवे स्टेशनों तक खोजबीन हुई, ड्रोन उड़ाए गए और कई टीमें लगातार सुराग तलाशती रहीं। परिवार भी किसी अनहोनी की आशंका से परेशान था। लेकिन सात दिन बाद इस मामले में कुछ ऐसा सामने आया, जिसने पुलिस से लेकर परिवार तक सभी को हैरान कर दिया। आखिर ग्राम प्रधान कहां थे और अचानक गायब होने के पीछे क्या राज था ?
मामला प्रयागराज कमिश्नरेट के थरवई थाना क्षेत्र के मनसैता गांव का है। यहां के 29 वर्षीय ग्राम प्रधान जानकीनाथ यादव 29 अक्टूबर 2026 की शाम अचानक लापता हो गए थे। बताया गया कि वह घर से लुंगी और बनियान पहनकर निकले थे। काफी देर तक वापस नहीं लौटने और मोबाइल फोन बंद आने के बाद परिवार के लोगों की चिंता बढ़ गई। रिश्तेदारों और परिचितों के यहां तलाश की गई, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद 30 अक्टूबर को उनके भाई छत्रपाल यादव ने थरवई थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
ग्राम प्रधान का कई दिनों तक पता नहीं चलने पर परिवार की चिंता और बढ़ गई। परिजनों ने आशंका जताई कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनका अपहरण कर लिया है और उनके साथ कोई अनहोनी हो सकती है।
तीन नवंबर को परिवार की ओर से अपहरण और हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस को शिकायत दी गई। इसके बाद मामले में अपहरण से संबंधित मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने ग्राम प्रधान की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित कर दीं।
ग्राम प्रधान की तलाश के लिए पुलिस ने व्यापक अभियान चलाया। कुल 13 टीमों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं। पुलिस की तीन टीमें सर्विलांस के माध्यम से मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और तकनीकी जानकारी जुटाने में लगी थीं। पांच टीमें सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही थीं। तीन टीमें उनके रिश्तेदारों और परिचितों से पूछताछ कर रही थीं, जबकि थरवई थाने की दो टीमें संभावित ठिकानों पर तलाश कर रही थीं। पुलिस ने ड्रोन कैमरों और डॉग स्क्वायड की मदद भी ली। यहां तक कि मनसैता नदी में भी ग्राम प्रधान की तलाश कराई गई। इसके लिए एसडीआरएफ की सहायता ली गई।
एक तरफ परिवार किसी अनहोनी की आशंका से परेशान था तो दूसरी तरफ पुलिस हर संभावित रास्ते और ठिकाने की जांच कर रही थी।
पुलिस की तलाश के बीच चार नवंबर की रात इस मामले में अचानक बड़ा मोड़ आया। लापता ग्राम प्रधान जानकीनाथ यादव ने नया सिम कार्ड खरीदा और अपने चाचा तथा थरवई थाना प्रभारी को फोन किया।
उन्होंने फोन पर बताया कि वह वृंदावन में संत प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम के पास हैं। यह जानकारी मिलते ही प्रयागराज पुलिस की टीम सक्रिय हो गई। तकनीकी जांच और लगातार चल रही तलाश के बाद पुलिस को आखिरकार ग्राम प्रधान का पता मिल गया।
पुलिस की पूछताछ में जानकीनाथ यादव ने बताया कि परिवार के लोगों के साथ कहासुनी होने के बाद वह नाराज हो गए थे। इसी नाराजगी में उन्होंने घर छोड़ने का फैसला किया और अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया। उन्होंने बताया कि घर से निकलने के बाद वह पैदल कछार के रास्ते फाफामऊ पहुंचे। वहां उन्होंने नए कपड़े खरीदे और कपड़े बदलकर रेलवे स्टेशन पहुंच गए।
इसके बाद उनकी यात्रा कुछ इस तरह रही:
इस तरह परिवार से नाराज होकर घर छोड़ने वाले ग्राम प्रधान प्रयागराज से होते हुए लखनऊ, आगरा और फिर मथुरा पहुंच गए।
जानकीनाथ यादव के वृंदावन में होने की जानकारी मिलने के बाद थरवई पुलिस और सर्विलांस सेल गंगानगर की संयुक्त टीम मथुरा पहुंची। पुलिस ने पांच नवंबर को उन्हें सकुशल बरामद कर लिया और प्रयागराज लाकर परिजनों को सौंप दिया। पुलिस की पूछताछ में ग्राम प्रधान ने स्पष्ट किया कि उनका किसी ने अपहरण नहीं किया था। वह पारिवारिक नाराजगी के कारण स्वयं घर से चले गए थे। इस मामले में पुलिस की 13 टीमों की मेहनत, तकनीकी निगरानी और लगातार चलाए गए तलाशी अभियान के बाद ग्राम प्रधान का पता चल सका।
सात दिनों तक चले इस घटनाक्रम में परिवार को अपने परिजन की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता थी। अपहरण और हत्या की आशंका के कारण मामला और संवेदनशील हो गया था। पुलिस ने भी किसी संभावित आपराधिक घटना की आशंका को ध्यान में रखते हुए व्यापक स्तर पर तलाश की। हालांकि ग्राम प्रधान के सकुशल मिलने और उनके बयान के बाद मामले की तस्वीर बदल गई। जिस व्यक्ति की तलाश में पुलिस नदी और नहरों तक पहुंच गई थी, वह आखिरकार वृंदावन में मिला। उत्तर प्रदेश की यह घटना एक बार फिर बताती है कि किसी व्यक्ति के अचानक लापता होने पर परिवार को तत्काल पुलिस को सूचना देनी चाहिए। समय रहते सूचना मिलने से पुलिस को तलाश और जांच में मदद मिलती है।
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