उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। कई इलाकों में जलभराव की स्थिति को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है।

UP News : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। कई इलाकों में जलभराव की स्थिति को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने नगर निगम को निर्देश दिया है कि निचले इलाकों में जमा पानी को 24 घंटे के भीतर निकालकर सफाई और सैनिटेशन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने दो टूक कहा कि अगली सुनवाई में शहर के किसी भी निचले इलाके में जलभराव कायम रहने की शिकायत नहीं मिलनी चाहिए। नगर आयुक्त प्रयागराज सीलम साईं तेजा को भी चेतावनी दी गई है कि आदेश के पालन में लापरवाही मिली तो उन्हें खुद अदालत में जवाब देना पड़ सकता है। UP News
पिछली सुनवाई में भी हाईकोर्ट ने नगर आयुक्त को निचले इलाकों से 24 से 48 घंटे के भीतर पानी निकालने का निर्देश दिया था। आपात स्थिति में मोरी गेट और दारागंज की दिशा में पंप लगाकर पानी बाहर निकालने को कहा गया था। ताजा सुनवाई में नगर आयुक्त ने अदालत को बताया कि जलभराव वाले अलग-अलग स्थानों पर पर्याप्त संख्या में पंप लगाए जा चुके हैं। उनका कहना था कि अगले चार से आठ घंटे में निचले इलाकों में जमा बारिश के पानी को निकालने का प्रयास किया जा रहा है। पानी निकलने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में सैनिटेशन भी कराया जाएगा, ताकि संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों को रोका जा सके। हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ताओं टीपी सिंह, अमरेंद्र नाथ सिंह और अरुण कुमार गुप्ता ने अदालत को बताया कि जमीनी स्थिति अभी सामान्य नहीं हुई है। उनके अनुसार कई क्षेत्रों में अब भी पानी जमा है और पर्याप्त पंपों की व्यवस्था किए बिना लोगों को राहत देना मुश्किल है। अदालत के समक्ष बताया गया कि जलभराव से प्रभावित इलाकों में अधिवक्ताओं के चैंबर और आवास भी मौजूद हैं। कुछ स्थानों पर बारिश का पानी भवनों के अंदर तक पहुंच गया है। ऐसे में केवल सड़कों से पानी निकालना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि नगर निगम को प्रभावित भवनों के भीतर से भी पानी निकालकर सफाई की व्यवस्था करनी होगी। UP News
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने नगर विकास एवं नियोजन विभाग के सचिव का व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल किया। इसमें जलभराव की समस्या से निपटने और वर्षाजल प्रबंधन के लिए तैयार दीर्घकालिक योजना से संबंधित जानकारी अदालत के सामने रखी गई। सरकार की ओर से बताया गया कि योजना के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। समिति की बैठक से संबंधित कार्यवाही भी रिकॉर्ड पर रखी गई। हालांकि, हाईकोर्ट ने फिलहाल दीर्घकालिक योजना के बजाय तत्काल राहत को प्राथमिकता दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन इलाकों में पानी जमा है, वहां पर्याप्त संख्या में पंप तुरंत लगाए जाएं। नगर निगम के पास पंपों की कमी होने पर उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय), प्रयागराज से पंप उपलब्ध कराने को कहा गया है। यदि वहां भी पर्याप्त पंप न मिलें तो राज्य सरकार को 12 घंटे के भीतर जरूरी संख्या में पंप उपलब्ध कराने होंगे। UP News
हाईकोर्ट ने नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि शहर की स्थिति का तत्काल आकलन कर यह सुनिश्चित करें कि जलभराव वाले प्रत्येक क्षेत्र में जरूरत के मुताबिक पंप मौजूद हों। अगली सुनवाई में उन्हें व्यक्तिगत हलफनामे के माध्यम से अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल करनी होगी। रिपोर्ट में वार्डवार और क्षेत्रवार जानकारी देनी होगी कि किन स्थानों पर जलभराव हुआ, कहां से पानी निकाला गया और किन इलाकों में सैनिटेशन कराया गया। इसके अलावा अभी भी जाम पड़े नालों की जानकारी और जल निकासी बाधित होने के कारण भी बताए जाएंगे। UP News
अदालत ने नगर निगम से यह भी जानकारी मांगी है कि मानसून शुरू होने से पहले नालों की डी-सिल्टिंग यानी गाद की सफाई कराई गई थी या नहीं। जिन खुले नालों में अभी भी सिल्ट जमा है, उनकी मौजूदा स्थिति और सफाई के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा भी अगली सुनवाई में पेश करना होगा। हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद अब नगर निगम के सामने तत्काल पानी निकालने के साथ प्रभावित क्षेत्रों में सफाई और सैनिटेशन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है। 25 अगस्त की सुनवाई में अदालत के सामने पेश होने वाली रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि आदेश के बाद जलभराव की समस्या से निपटने के लिए क्या कार्रवाई की गई। UP News
विज्ञापन