वाराणसी की जेलों में पढ़े-लिखे बंदी अब साथी कैदियों को शिक्षा दे रहे हैं। उन्हें पढ़ाने के बदले 80 रुपये प्रतिदिन पारिश्रमिक मिलता है। 2022 से 2026 के बीच कई बंदियों ने हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा पास की।

UP News: उत्तर प्रदेश के वाराणसी की जेलों से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जहां सजा काट रहे पढ़े-लिखे बंदी अब अपने साथी बंदियों के लिए शिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। केंद्रीय और जिला कारागार में बंदियों को पढ़ाई के साथ कौशल विकास से भी जोड़ा जा रहा है। पढ़े-लिखे बंदी साथी कैदियों को विभिन्न विषयों की तैयारी कराते हैं और इसके बदले उन्हें प्रतिदिन 80 रुपये का पारिश्रमिक भी दिया जाता है। खास बात यह है कि पिछले पांच वर्षों में केंद्रीय और जिला कारागार के 43 बंदियों ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया और सभी सफल रहे। जेल प्रशासन का उद्देश्य बंदियों को शिक्षा और हुनर के जरिए रिहाई के बाद समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
वाराणसी केंद्रीय कारागार में अलग-अलग सर्किल में कक्षाएं संचालित की जाती हैं। यहां पढ़े-लिखे बंदी अपने साथी बंदियों को पढ़ाते हैं और उन्हें बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं। केंद्रीय कारागार में वाराणसी समेत करीब 18 जिलों के बंदी निरुद्ध हैं। इस वर्ष हाईस्कूल के आठ और इंटरमीडिएट के 10 बंदियों ने बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया है। केंद्रीय कारागार में पढ़ाई के लिए दो शिफ्ट निर्धारित की गई हैं। पहली शिफ्ट सुबह 7:30 से 10:30 बजे और दूसरी शिफ्ट दोपहर 1:30 से शाम 4:30 बजे तक चलती है। जेल में शिक्षा हासिल करने के लिए उम्र की कोई बाध्यता नहीं रखी गई है। बंदियों को किताबों और अन्य अध्ययन सामग्री की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है, जिससे वे नियमित रूप से पढ़ाई कर सकें। UP News:
जेल प्रशासन की ओर से बंदियों को केवल औपचारिक शिक्षा तक सीमित नहीं रखा गया है। उन्हें कंप्यूटर, कढ़ाई, बुनाई और अन्य कौशल का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य बंदियों को रिहाई के बाद रोजगार के अवसरों से जोड़ना और उन्हें दोबारा अपराध की दुनिया में लौटने से रोकने के लिए व्यावहारिक हुनर उपलब्ध कराना है।
जिला कारागार में वर्ष 2022 से 2026 के बीच 25 बंदियों ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया। इनमें नौ हाईस्कूल और 16 इंटरमीडिएट के विद्यार्थी शामिल रहे। जेल प्रशासन के अनुसार, वर्तमान में हाईस्कूल के नौ और इंटरमीडिएट के नौ बंदी परीक्षा पास कर चुके हैं, जबकि सात बंदी सजा पूरी होने के बाद रिहा भी हो चुके हैं। जिला जेल के अधीक्षक सौरभ श्रीवास्तव के अनुसार, बंदियों को पढ़ाई के लिए किताबें उपलब्ध कराने के साथ कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। उनके मुताबिक, रिहाई के बाद कई बंदी रोजगार से जुड़ चुके हैं। UP News:
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