रायबरेली में 12 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने दोषी विजय बहादुर शर्मा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने दोषी पर 1.50 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया।

UP News : उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में 12 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश अनुपम शौर्य की अदालत ने दोषी विजय बहादुर शर्मा निवासी जोहवाशर्की को उम्रकैद के साथ 1.50 लाख रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले से जुड़े गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने की पैरवी की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने विजय बहादुर शर्मा को दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई।
अभियोजन के अनुसार मामला 23 मई 2022 का है। घटना के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू की थी। जांच के दौरान पीड़िता का बयान महिला मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराया गया। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश अनुपम शौर्य की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता अशोक ने पैरवी की और पांच गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए गए।
अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष गवाहों के बयान और मामले से संबंधित उपलब्ध साक्ष्य प्रस्तुत किए। सुनवाई के दौरान आरोपी को अपना पक्ष रखने और सफाई पेश करने का पूरा अवसर दिया गया। बचाव पक्ष की ओर से अदालत में दलील दी गई कि पीड़िता के एक रिश्तेदार ने आरोपी से 25 हजार रुपये उधार लिए थे। आरोप लगाया गया कि रकम वापस नहीं करने के कारण आरोपी को इस मामले में फंसा दिया गया। हालांकि, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और मामले में पेश किए गए साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी माना।
अभियोजन के अनुसार मामले में दुष्कर्म के साथ विरोध करने पर जातिसूचक गालियां देने का भी आरोप लगाया गया था। पुलिस विवेचना के बाद आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया गया और मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने अपने पक्ष के गवाह और साक्ष्य प्रस्तुत किए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अदालत में सजा सुनाए जाने के दौरान विजय बहादुर शर्मा भावुक हो गया और रोने लगा। इससे पहले आरोपी की ओर से दो बार जमानत के लिए प्रार्थनापत्र भी प्रस्तुत किए गए थे, लेकिन उसे राहत नहीं मिली थी। अंततः मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास और 1.50 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
अदालत के फैसले के बाद पीड़िता पक्ष ने न्यायालय के निर्णय पर संतोष जताया। अभियोजन पक्ष का कहना है कि गवाहों के बयान और अदालत के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध हुआ, जिसके बाद न्यायालय ने आरोपी को सजा सुनाई। UP News :
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