रायबरेली में बंदरों और आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। जिला अस्पताल में हर महीने औसतन 150 लोग काटने की घटनाओं के बाद इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। डलमऊ, ऊंचाहार और ग्रामीण इलाकों में लोग परेशान हैं। जानिए क्यों उठ रहे हैं प्रशासन और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी पर सवाल।

UP News : उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में बंदरों और आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या ने शहर से लेकर गांवों तक लोगों की चिंता बढ़ा दी है। धार्मिक स्थलों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में बंदरों के झुंड लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। वहीं, आवारा कुत्तों के हमलों से भी लोग घायल हो रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में लोगों को घर से निकलते समय भी सतर्क रहना पड़ता है। जिला अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, हर महीने औसतन 150 लोग बंदरों और कुत्तों के काटने से घायल होकर इलाज के लिए पहुंचते हैं। बंदरों के हमले में गिरने और रेबीज संक्रमण से जिले में एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद समस्या से निपटने के लिए ठोस और प्रभावी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। UP News
रायबरेली के डलमऊ, अमावां, बछरावां और ऊंचाहार सहित कई क्षेत्रों में बंदरों की समस्या गंभीर बनी हुई है। गंगा घाटों के किनारे स्थित शिव मंदिरों के अलावा भवरेश्वर, बाल्हेश्वर और सोहलेश्वर मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं को बंदरों से परेशानी का सामना करना पड़ता है। मंदिरों और बाजारों में बंदरों के झुंड लोगों के हाथों से प्रसाद, खाने-पीने का सामान और मोबाइल फोन तक छीन लेते हैं। इससे श्रद्धालुओं, दुकानदारों और स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। जिले में बंदरों की संख्या 10 हजार से अधिक होने का अनुमान बताया जा रहा है, लेकिन इन्हें नियंत्रित करने के लिए स्थानीय निकायों और संबंधित संस्थाओं की व्यवस्था नाकाफी दिखाई देती है। UP News
ग्रामीण इलाकों में बंदरों का उत्पात लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है। कई जगह महिलाएं घरों में खाना बनाते समय भी बंदरों से बचाव के लिए लाठी-डंडे लेकर सतर्क रहती हैं। बंदर घरों में घुसकर बर्तन और अन्य सामान उठा ले जाते हैं। बच्चों के स्कूल जाने और लोगों के बाजार आने-जाने में भी परेशानी होने की शिकायतें सामने आई हैं। मिल एरिया थाना क्षेत्र के राही गांव में बंदरों के खदेड़ने के दौरान छत से जीने पर गिरकर एक युवक की मौत होने की घटना भी सामने आई थी। मिर्जापुर एहारी, छिपिया, लक्ष्मीगंज और रामचंद्रपुर जैसे गांवों में भी बंदरों के उत्पात से ग्रामीण परेशान बताए जा रहे हैं। UP News
बंदरों के साथ-साथ आवारा कुत्तों की समस्या भी जिले के लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। कुत्तों के काटने की घटनाओं के कारण लोगों को अस्पतालों में उपचार कराना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में समय पर चिकित्सा और रेबीज से बचाव के उपायों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। स्थानीय स्तर पर आवारा कुत्तों के प्रबंधन, टीकाकरण और बंदरों से बचाव के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है। खासकर धार्मिक स्थलों, बाजारों, स्कूलों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सुरक्षा के इंतजाम जरूरी हैं, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके। UP News
बंदरों और आवारा कुत्तों की समस्या के बीच संबंधित विभागों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी केके द्विवेदी ने बताया कि आवारा कुत्तों के संरक्षण की व्यवस्था नगर पालिका को करनी है, जबकि उनके टीकाकरण की जिम्मेदारी संबंधित विभाग निभाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बंदरों के संरक्षण के लिए फिलहाल कोई योजना नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब शहर से लेकर गांवों तक लोग इन जानवरों के हमलों से परेशान हैं, तो उनकी सुरक्षा के लिए ठोस कार्ययोजना कब तैयार होगी। बंदरों और आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय, नियमित निगरानी और प्रभावी प्रबंधन की आवश्यकता है। रायबरेली के लोगों को अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जिससे वे बिना डर के अपने घरों, बाजारों और धार्मिक स्थलों तक आ-जा सकें। UP News
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