रायबरेली में सपा की अंदरूनी गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव के खिलाफ विवादित पोस्टर लगाए जाने से सियासी हलचल तेज हो गई।

रायबरेली: 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले रायबरेली की राजनीति में बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। आदित्य हत्याकांड में समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष आरपी यादव समेत 14 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद सपा के भीतर छिड़ा अंदरूनी घमासान अब चौराहों पर आ गया है। शहर के चर्चित मामा चौराहे पर रातों-रात लगे एक विवादित होर्डिंग ने जिले की सियासत में आग लगा दी है। पोस्टर में सपा के वर्तमान जिलाध्यक्ष ई. वीरेंद्र यादव के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलते हुए उन्हें "यादव समाज विरोधी" करार दिया गया है। UP News
मामा चौराहे पर लगाए गए इस बड़े बैनर पर साफ शब्दों में लिखा गया है- "यादव समाज के विरोधी सपा जिला अध्यक्ष ई. वीरेंद्र यादव। यादव समाज के विरोधी होने के कारण समाज से निष्कासित किया जाता है।" पोस्टर के नीचे निवेदक की जगह "यादव महासभा, रायबरेली" लिखा हुआ है।
दरअसल, मंगलवार को जब कोर्ट ने पूर्व जिलाध्यक्ष आरपी यादव को उम्रकैद की सजा सुनाई, तो न्यायालय से लेकर जिला कारागार तक उनके समर्थकों का भारी हुजूम मौजूद था। लेकिन इस दौरान वर्तमान जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव पूरे परिदृश्य से गायब रहे। जिलाध्यक्ष की इस दूरी से भड़के आरपी यादव के समर्थकों ने जिला जेल के बाहर वीरेंद्र यादव के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और "मुर्दाबाद" के नारे लगाए थे।
जेल के बाहर शुरू हुआ यह आक्रोश अब होर्डिंग युद्ध में बदल चुका है। 2027 के चुनाव से ठीक पहले अपनों के ही आमने-सामने आने से समाजवादी पार्टी के भीतर का 'गृहयुद्ध' जगजाहिर हो गया है। एक तरफ आरपी यादव का समर्थक गुट है, तो दूसरी तरफ वर्तमान जिलाध्यक्ष। अब देखना यह होगा कि लखनऊ बैठा सपा आलाकमान रायबरेली की इस गुटबाजी और सुलगती 'सियासी आग' को कैसे शांत कराता है, या फिर यह विवाद 2027 के समीकरणों को पूरी तरह बिगाड़ कर रख देगा।UP News
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