स्थानीय नागरिक और सामाजिक संगठन सिग्नलों की तकनीकी खामियां दूर कर उन्हें तत्काल चालू कराने तथा यातायात व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कब ठोस कदम उठाता है।

UP News : उत्तर प्रदेश के रायबरेली शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए करीब तीन साल पहले प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे। इन सिग्नलों से उम्मीद थी कि शहर में वाहनों की आवाजाही व्यवस्थित होगी और लोगों को आए दिन लगने वाले जाम से राहत मिलेगी। लेकिन समय बीतने के साथ व्यवस्था ही सवालों के घेरे में आ गई है। पुलिस लाइन चौराहा, डिग्री कॉलेज चौराहा और सिविल लाइंस चौराहे पर लगाए गए ट्रैफिक सिग्नल लंबे समय से सुचारु रूप से संचालित नहीं हो पा रहे हैं। शहर में वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन यातायात को नियंत्रित करने वाली सिग्नल व्यवस्था प्रभावी नहीं होने के कारण लोगों को पुराने तरीके से ही चौराहों पर यातायात संभालने का इंतजार करना पड़ रहा है। UP News
रायबरेली में बड़े शहरों की तर्ज पर ट्रैफिक सिग्नल लगाने का उद्देश्य यातायात व्यवस्था को आधुनिक और व्यवस्थित बनाना था। प्रमुख चौराहों पर सिग्नल लगने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि रेड लाइट, ग्रीन लाइट और निर्धारित टाइमिंग के जरिए वाहनों का आवागमन नियंत्रित होगा। हालांकि, नगर पालिका और यातायात विभाग के बीच अपेक्षित समन्वय नहीं बन पाने के कारण यह व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं हो सकी। नतीजा यह है कि जिन सिग्नलों से यातायात सुचारु होने की उम्मीद थी, वही अब लंबे समय से निष्क्रिय नजर आ रहे हैं। UP News
पुलिस लाइन, डिग्री कॉलेज और सिविल लाइंस जैसे चौराहों पर दिनभर वाहनों की आवाजाही रहती है। सुबह और शाम के व्यस्त समय में यहां वाहनों का दबाव और बढ़ जाता है।
सिग्नल व्यवस्था प्रभावी नहीं होने के कारण वाहनों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में परेशानी होती है। कई बार कुछ ही मिनट में वाहनों की लंबी कतार लग जाती है और राहगीरों को जाम खुलने का इंतजार करना पड़ता है। UP News
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