साहित्य के साथ-साथ शिक्षा जगत में भी उनकी पहचान रही, वे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में उर्दू साहित्य के प्राध्यापक रहे। 11 अगस्त 2020 को हृदयाघात से उनका निधन हुआ, लेकिन उनके शब्द आज भी उतनी ही शिद्दत से जिंदा हैं।

Rahat Indori : राहत इंदौरी (1 जनवरी 1950 – 11 अगस्त 2020) उर्दू शायरी की दुनिया का वो चमकता नाम थे, जिनकी दमदार आवाज और तीखे अल्फ़ाज ने मुशायरों को भी जिंदा कर दिया और आम लोगों की ज़ुबान पर भी अपनी जगह बना ली। उनकी शायरी में जज़्बात, बगावत और जिंदगी की सच्चाई इतनी साफ़ झलकती थी कि सुनने वाला खुद को उनसे जुड़ा हुआ महसूस करता था। मंच पर उनका अंदाज जितना असरदार था, उतनी ही मजबूती से उन्होंने हिंदी फिल्मों के लिए यादगार गीत भी लिखे। साहित्य के साथ-साथ शिक्षा जगत में भी उनकी पहचान रही, वे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में उर्दू साहित्य के प्राध्यापक रहे। 11 अगस्त 2020 को हृदयाघात से उनका निधन हुआ, लेकिन उनके शब्द आज भी उतनी ही शिद्दत से जिंदा हैं।
राहत इंदौरी का जन्म इंदौर में रफ्तुल्लाह कुरैशी और मकबूल-उन-निशा बेगम के घर हुआ। उनके पिता एक कपड़ा कारख़ाने में नौकरी करते थे। राहत अपने माता-पिता की चौथी संतान थे। परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित थी, इसलिए बचपन से ही उन्होंने संघर्ष और जिम्मेदारियों को करीब से देखा। कम उम्र में ही मेहनत की राह पकड़ते हुए, उन्होंने लगभग 10 साल की आयु से साइन पेंटिंग/चित्रकारी का काम शुरू कर दिया। उनकी शुरुआती पढ़ाई इंदौर के नूतन स्कूल में हुई। आगे उन्होंने इस्लामिया करीमिया कॉलेज, इंदौर से 1973 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। फिर 1975 में बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल से उर्दू साहित्य में एम.ए. किया। उर्दू साहित्य में उनकी शैक्षणिक यात्रा यहीं नहीं रुकी। उन्होंने उर्दू में उच्च अध्ययन जारी रखा और 1985 में मध्य प्रदेश के भोज विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएच.डी. पूरी की। उनकी थीसिस “उर्दू मुख्य मुशायरा” के लिए उन्हें सम्मान भी मिला जो उनके शोध और साहित्यिक समझ की गहराई को दर्शाता है।
1 - शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
2 - दोस्ती जब किसी से की जाए
दुश्मनों की भी राय ली जाए

3 - हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं

4 - रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है

5 - सूरज सितारे चाँद मिरे साथ में रहे
जब तक तुम्हारे हाथ मिरे हाथ में रहे
