क्या उत्तर प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान ने राहुल गांधी के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है ? आखिर यूपी कांग्रेस की कमान को लेकर ऐसा क्या पेंच फंसा है, जिस पर पार्टी हाईकमान को फैसला लेना है ?

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश की राजनीति की बड़ी खबर यह है कि भारत के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश में नेतृत्व को लेकर पेंच फंस गया है। पेंच इतना बड़ा है कि कांग्रेस के अघोषित मुखिया राहुल गांधी उस पेंच को सुलझा नहीं पा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि राहुल गांधी के खासम-खास एक नेता ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में फंसे हुए पेंच को इतना टाइट कर दिया है कि वह पेंच सुलझने का नाम ही नहीं ले रहा है। UP News
उत्तर प्रदेश की राजनीति को गहराई से जानने वाले राजनैतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी अपने ही घर के अंदर बुरी तरह लड़ाई में उलझ गई है। यह लड़ाई उस समय हो रही है जब भारत के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव सिर पर है। हाल ही में राहुल गांधी ने कांग्रेस के बड़े दलित चेहरे के रूप में स्थापित राजेन्द्र गौतम को उत्तर प्रदेश कांग्रेस का प्रभारी बनाकर लखनऊ भेजा है। राजेन्द्र गौतम के लखनऊ जाते ही उत्तर प्रदेश में पहले से तैनात कांग्रेस के बड़े क्षत्रप उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय तथा राजेन्द्र गौतम के बीच तलवारें खिंच गई हैं। इन दोनों महारथियों के बीच खिंची हुई तलवारों के ठीक बीच में आराधना खड़ी हैं। राजनैतिक विश्लेषकों का दावा है कि यदि राहुल गांधी उत्तर प्रदेश कांग्रेस में अपने घर की लड़ाई को ठीक नहीं कर पाये तो उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव-2027 में कांग्रेस के पास पक्षपात के अलावा कुछ नहीं बचेगा। UP News
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव बिल्कुल सामने खड़े हैं। इसी दौरान उत्तर प्रदेश कांग्रेस अपने ही घर की लड़ाई में उलझी है। सवाल यह है कि संगठन की कमान किसके हाथ रहेगी। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अजय राय काँ हटाने पर अड़े हैं, तो दूसरी ओर विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने कुर्सी के लिए अलग से पूरी ताकत लगा रखी है। गौतम किसी भी कीमत पर राय के साथ चलने को तैयार नहीं, ऐसे में पार्टी के भीतर बदलाव की संभावना ज्यादा मानी जा रही है। इस खींचतान से सहयोगी सपा भी खासी नाराज है। अखिलेश यादव के करीबी सूत्रों का कहना है कि जब सीटों और रणनीति पर बात होनी है, तब कांग्रेस यह तय नहीं कर पा रही कि प्रदेश में उसकी ओर से बात करेगा कौन। अजय राय और गौतम के बीच जरा भी नहीं बनती। 23 सितंबर को नाराज कार्यकर्ताओं की बैठक में गौतम अकेले नजर आए। सूत्रों के मुताबिक मायावती से मुलाकात की कोशिश, जिला अध्यक्षों में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व और सपा से सीट बंटवारे जैसे मुद्दों पर दोनों के रुख अलग हैं। अध्यक्ष बदलने की अटकलों के बीच पिछले दो दिनों में अजय राय राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से लेकर राहुल गांधी तक से मिल चुके हैं। प्रभारी गौतम ने भी शीर्ष नेतृत्व के साथ अहम बैठक की है और प्रदेश में संगठन सृजन पर अलग से बैठक ली है। दोनों नेताओं की लड़ाई सिर्फ कुर्सी की नहीं, राजनीतिक शैली की भी है। सूत्रों के मुताबिक आंबेडकरवादी राजनीति से आने वाले गौतम ने अजय राय के मंदिर जाने पर सवाल उठाए हैं। गौतम खेमे का तर्क है कि राय की शैली से दलित मतदाता कांग्रेस से नहीं जुड़ेंगे। वहीं राय समर्थकों का कहना है कि चुनाव से पहले अध्यक्ष बदलना पार्टी के लिए नुकसानदेह होगा। दोनों के पीछे दिल्ली की ताकत खड़ी है। सूत्रों के मुताबिक अजय राय पर संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल का हाथ है, जबकि गौतम राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं। UP News
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