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उत्तर प्रदेश में रेलवे नौकरी दिलाने के नाम पर 70 युवकों से लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। गोरखपुर में फर्जी इंटरव्यू के लिए बुलाए गए युवकों के मामले में बर्खास्त पूर्व रेलकर्मी दीपक कुमार सिंह पर केस दर्ज किया गया है।

उत्तर प्रदेश गोरखपुर। रेलवे में सरकारी नौकरी पाने का सपना देख रहे बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाकर किए गए एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। मामले में सामने आया है कि लखनऊ रेलवे कार्यालय से बर्खास्त किया जा चुका एक पूर्व रेलकर्मी खुद को रेलवे का बड़ा अधिकारी बताकर देश के विभिन्न जिलों के करीब 70 युवकों से लाखों रुपये की ठगी कर चुका है। आरोपी ने युवाओं को रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा दिया और उनसे ऑनलाइन माध्यम से हजारों रुपये वसूल लिए। मामला सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार आरोपी दीपक कुमार सिंह ने सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए रेलवे भर्ती से जुड़ा एक फर्जी विज्ञापन जारी किया था। इस विज्ञापन के माध्यम से युवाओं को रेलवे के विभिन्न पदों पर नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया। बेरोजगार युवकों को बताया गया कि भर्ती प्रक्रिया चल रही है और उन्हें आवेदन, पंजीकरण तथा अन्य औपचारिकताओं के लिए शुल्क जमा करना होगा।
आरोपी ने अभ्यर्थियों से 5 हजार रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक की रकम वसूली। पैसे जमा कराने के लिए युवाओं को उनके मोबाइल फोन पर क्यूआर कोड भेजा जाता था, जिसके जरिए ऑनलाइन भुगतान कराया जाता था। नौकरी मिलने की उम्मीद में कई युवकों ने बिना जांच-पड़ताल किए पैसे जमा कर दिए।
मामले का खुलासा 23 मई को तब हुआ, जब अलग-अलग जिलों से करीब 60 से 70 युवक नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे के गोरखपुर स्थित मैकेनिकल वर्कशॉप परिसर में इंटरव्यू देने पहुंच गए। युवकों के हाथों में इंटरव्यू और नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज भी थे। इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को अचानक कारखाना परिसर में पहुंचता देख रेलवे अधिकारियों को संदेह हुआ।
जब अधिकारियों ने युवकों से पूछताछ की तो पता चला कि सभी को एक ही व्यक्ति की ओर से कॉल और पत्र भेजकर इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। इसके बाद रेलवे अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी।
रेलवे प्रशासन की जांच में पता चला कि युवाओं को भेजे गए क्यूआर कोड और कुछ विभागीय नंबरों का संबंध दीपक कुमार सिंह से है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले रेलवे में कार्यरत था, लेकिन उसे विभाग से बर्खास्त किया जा चुका है। इसके बावजूद उसने खुद को रेलवे का अधिकारी बताकर युवाओं को झांसे में लिया और उनसे पैसे वसूल लिए।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार आरोपी ने भर्ती प्रक्रिया को असली दिखाने के लिए इंटरव्यू से जुड़े दस्तावेज भी तैयार कराए थे, जिससे युवाओं को किसी तरह का संदेह न हो।
मामले की पुष्टि होने के बाद रेलवे के वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी आरपीएफ निरीक्षकों के साथ शाहपुर थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ लिखित शिकायत दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने दीपक कुमार सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
गोरखनाथ क्षेत्राधिकारी रवि सिंह ने बताया कि रेलवे की ओर से प्राप्त तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपी के बैंक खातों, ऑनलाइन लेनदेन और फर्जी भर्ती विज्ञापन से जुड़े सोशल मीडिया खातों की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में कोई अन्य व्यक्ति या गिरोह शामिल है या नहीं।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह लगातार सक्रिय हैं। ऐसे में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को किसी भी भर्ती प्रक्रिया में आवेदन करने से पहले उसकी आधिकारिक जानकारी की जांच अवश्य करनी चाहिए। रेलवे समेत सभी सरकारी विभाग भर्ती संबंधी सूचनाएं केवल अपने आधिकारिक माध्यमों से जारी करते हैं। किसी भी व्यक्ति द्वारा निजी तौर पर नौकरी दिलाने का दावा किए जाने पर सतर्क रहना जरूरी है।
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