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Mid-day Meal Cooks: सरकार का यह कदम फैसला लाखों रसोइयों के लिए राहत भरा है, जो वर्षों से अनिश्चितता में काम कर रही थे।

UP News: उत्तर प्रदेश सरकार बेसिक स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनाने वाली रसोइयों के लिए सेवा नियमावली बनाने जा रही है। इसमें उनकी सेवानिवृत्ति की उम्र 62 वर्ष तय करने का प्रस्ताव है। सरकार का यह कदम फैसला लाखों रसोइयों के लिए राहत भरा है, जो वर्षों से अनिश्चितता में काम कर रही थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्तमान में 1.41 लाख सरकारी स्कूलों में करीब 3.63 लाख रसोइये कार्यरत हैं, जो 1.52 करोड़ बच्चों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराती हैं। इन रसोइयों को मात्र 2000 रुपये मासिक मानदेय मिलता है, लेकिन सेवा शर्तों की कमी के कारण कोई तय रिटायरमेंट उम्र नहीं थी। कई रसोइये 70-75 साल की उम्र तक काम करते हैं।
रसोइयों ने किया था विरोध प्रदर्शन
हाल ही में रसोइयों के प्रदर्शन के बाद अधिकारियों के साथ हुई बैठकों में यह मुद्दा जोर-शोर से उठा। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण अब पूर्ण सेवा नियमावली तैयार कर रहा है, जिसमें रिटायरमेंट उम्र तय करने के अलावा छुट्टियां, नियुक्ति प्रक्रिया, मातृत्व अवकाश और चाइल्ड केयर लीव जैसे प्रावधान शामिल किए जाएंगे।
रसोइयों के को मिल सकती हैं ये सुविधाएं :
रिटायरमेंट उम्र 62 साल हो सकती है। ग्राम समितियों की मनमानी पर अंकुश लगाया जाएगा। अब तक ग्राम समिति इनका चयन करती हैं और जब चाहे निकाल देती है। मानदेय को लेकर शर्तें तय की जाएंगी। शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को 11 महीने का मानदेय मिलता है जबकि रसोइयों को 10 महीने का मानदेय मिलता है।
मध्याह्न भोजन योजना 2004 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शुरू हुई थी, जिसका मकसद बच्चों की उपस्थिति बढ़ाना और पोषण सुनिश्चित करना है। सेवा नियमावली बनने से रसोइयों को स्थिरता मिलेगी और योजना और बेहतर तरीके से संचालित हो सकेगी। UP News
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