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UP News: समाजवादी पार्टी जो सामाजिक न्याय की दलील देते हुए पीडीए- पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक के हकों की बात करती है, अक्सर ऐसे विवादों में उलझ रही है। दूसरों पर जातिवाद का आरोप लगाते-लगाते इसके नेता खुद ऐसे बयान देते हैं जिससे किसी न किसी समुदाय को ठेस पहुंच जाती है।

UP News : समाजवादी पार्टी एक बार फिर अपने प्रवक्ता के बयान की वजह से विवाद में फंस गई है। एक बार फिर पार्टी नेता ने जाति-धर्म का नाम लेकर आलोचनाओं को दावत दे दी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमीक जामेई ने एक न्यूज चैनल पर बहस में कहा कि देश में सबसे बड़े 20 मांस निर्यातकों (मीट एक्सपोर्टरों) में से 18 जैन समुदाय के हैं। जामेई के इस बयान पर जैन समुदाय नाराज हो गया है।
जामेई ने दी सफाई
विवाद बढ़ता देख अमीक जामेई ने तुरंत सफाई दी कि वह गलती से जैन बोल गए, वे बहुसंख्यक समाज बोलना चाहते थे।
उन्होंने एक्स पर लिखा कि एक टीवी डिबेट में मेरा कहना था कि भारत में जो बड़े (मीट) एक्सपोर्टर हैं, उन 20 में से 18 बहुसंख्यक समाज के हैं। मेरी जुबान से गलती से जैन समाज का नाम निकल गया। इसकी धारणा, इसके शो, इसके रिसोर्स पर मैं जाना नहीं चाहता हूं।
जामेई ने पोस्ट में कहा, "मैं जैन समुदाय से तहे दिल से माफी मांगता हूँ, क्योंकि वे हमारे अपने लोग हैं! हम उनकी संस्कृति, अहिंसा के संदेश और शांति का सर्वोच्च सम्मान करते हैं! मैं इस विषय पर अपने बयानों के आधार की बहुत ज्यादा गहराई में नहीं जाना चाहता, क्योंकि एक मुसलमान होने के नाते, जैन अल्पसंख्यक समुदाय के दर्द को हमसे बेहतर और कौन समझ सकता है!"
क्यों ऐसे विवादों में फंसती हैं सपा
समाजवादी पार्टी जो सामाजिक न्याय की दलील देते हुए पीडीए- पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक के हकों की बात करती है, अक्सर ऐसे विवादों में उलझ रही है। दूसरों पर जातिवाद का आरोप लगाते-लगाते इसके नेता खुद ऐसे बयान देते हैं जिससे किसी न किसी समुदाय को ठेस पहुंच जाती है।
इससे पहले सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी के बयान से बड़ा विवाद हो गया था। आरोप लगा कि उन्होंने अपने बयान में ब्राह्मण समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। विवाद बड़ा तो भाटी ने अपने बयान पर सफाई दी और माफी भी मांगी। UP News
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