उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले सियासी हलचल क्यों बढ़ गई है ? क्या भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसी बड़े सामाजिक समीकरण को साधने की तैयारी कर रही है ?

UP News : उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए आगामी 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव ने प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। चुनाव कार्यक्रम सामने आने के साथ ही सत्तारूढ़ भाजपा के संभावित प्रत्याशियों को लेकर राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो चला है। खासतौर पर बात सबसे अधिक सीटों वाले क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश की करें, तो जाट-राजपूत चेहरे के राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा ख़ूब जोर पकड़ रही है। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को इस बार महज उच्च सदन की सीटों का चुनाव नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरणों को साधने के एक अवसर के तौर पर भी देखा जा रहा है। UP News
मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुके डॉ. संजीव बालियान की गिनती पश्चिमी यूपी में भाजपा के प्रमुख जाट चेहरे के तौर पर होती हैं। 2014 और 2019 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद वह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री भी रहे हैं। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में बालियान को मुजफ्फरनगर सीट पर समाजवादी पार्टी के हरेंद्र मलिक से करीब 25 हजार मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। चुनावी हार के बावजूद पश्चिमी यूपी की राजनीति में उनका प्रभाव और जाट नेतृत्व के रूप में उनकी पहचान है। यही वजह है कि राज्यसभा के संभावित प्रत्याशी के तौर पर बालियान का नाम सामने आना केवल व्यक्तिगत राजनीतिक पुनर्स्थापन के रूप में नहीं, बल्कि पश्चिमी यूपी के सामाजिक समीकरणों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। UP News
वेस्ट यूपी में भाजपा और जयंत चौधरी की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन भी इस पूरे समीकरण को महत्वपूर्ण बना रहा है। 2024 में भाजपा के साथ आए जयंत चौधरी के केंद्र सरकार में मंत्री होने के बाद भाजपा-आरएलडी गठबंधन को पश्चिमी यूपी की राजनीति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मजबूती के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में भाजपा के सामने एक तरफ गठबंधन सहयोगी आरएलडी के साथ तालमेल बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ अपने संगठन और सामाजिक आधार को मजबूत रखने का सवाल भी है। इसी संदर्भ में भाजपा के किसी प्रमुख जाट चेहरे को राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा को देखा जा रहा है। हालांकि, संजीव बालियान के नाम पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। मग़र उनको मजबूत दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है। राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच डॉ. संजीव बालियान ने किसी तरह का दावा नहीं किया है। उनका कहना है कि प्रत्याशी चयन पार्टी नेतृत्व का विषय है और पार्टी जो भी निर्णय करेगी, वह उसे स्वीकार करेंगे। वहीं, बालियान पश्चिमी यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा की तैयारियों को लेकर सक्रिय नजर आ रहे हैं। UP News
पश्चिमी यूपी से भाजपा के एक और प्रमुख चेहरे सुरेश राणा का नाम भी संभावित प्रत्याशियों की चर्चा में है। राणा शामली जिले की थानाभवन सीट से दो बार विधायक रहे हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार के पहले कार्यकाल में गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री भी रह चुके हैं। पश्चिमी यूपी में भाजपा के संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर उनकी सक्रिय राजनीतिक भूमिका रही है। दिल्ली और लखनऊ दोनों के नजदीक माने जाते हैं। यदि भाजपा पश्चिमी यूपी से किसी चेहरे को राज्यसभा भेजने का निर्णय करती है, तो संभावित नामों के साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व का पहलू भी महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में बालियान का नाम जहां जाट नेतृत्व से जुड़ता है, वहीं राणा राजपूत समाज से आते हैं। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि पार्टी का अंतिम निर्णय कौन से राजनीतिक और संगठनात्मक मानदंडों पर आधारित होगा। UP News
दरअसल, राज्यसभा के लिए संजीव बालियान और सुरेश राणा के नाम की चर्चा इसलिए भी अधिक है, क्योंकि लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सहारनपुर मंडल में बड़ा डेंट लगा है। इस मंडल की सभी तीनों लोकसभा सीटों पर भाजपा को बड़ी हार मिली है। सहारनपुर से कांग्रेस के इमरान मसूद, शामली जिले की कैराना सीट से इकरा हसन और मुजफ्फरनगर से हरेंद्र मलिक सपा के सिंबल पर चुनाव जीते हैं। ऐसे में 2027 को देखते हुए भाजपा इस मंडल के जाट या राजपूत चेहरे पर राज्यसभा का दांव लगा सकती है। क्योंकि, 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू होने के साथ भाजपा के सामने पश्चिमी यूपी में अपने संगठनात्मक और सामाजिक आधार को मजबूत करने की चुनौती है। वैसे भी इस समय बालियान और राणा दोनों ही पश्चिम में बीजेपी का बड़ा चेहरा है। UP News
यही वजह है कि 16 अक्टूबर का राज्यसभा चुनाव पश्चिमी यूपी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि भाजपा पश्चिमी यूपी से किसी चेहरे को राज्यसभा भेजती है तो इससे पार्टी की क्षेत्रीय प्राथमिकताओं और सामाजिक प्रतिनिधित्व की रणनीति का संकेत मिल सकता है। हालांकि, संजीव बालियान या सुरेश राणा किस नाम पर मुहर लगेगी, यह फिलहाल भाजपा नेतृत्व के फैसले पर निर्भर है। लेकिन इतना तय है कि राज्यसभा की एक सीट को लेकर चल रही यह चर्चा पश्चिमी यूपी की 2027 की राजनीति से अलग नहीं है। ऐसे में सवाल सिर्फ राज्यसभा की सीट का नहीं, बल्कि पश्चिमी यूपी में भाजपा की अगली राजनीतिक रणनीति का भी है। UP News
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