उत्तर प्रदेश के मेरठ में किसान महापंचायत और कमिश्नरी घेराव के दौरान देश के प्रसिद्ध किसान नेता तथा भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने 1987 के किसान आंदोलन की याद दिलाई।

UP News : भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता तथा देश के प्रसिद्ध किसान नेता राकेश टिकैत ने पुराने दिन याद दिलाते हुए भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत की यादों को सालों से सहेजने का बड़ा काम किया है। यह बड़ा काम राकेश टिकैत ने उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में चल रहे किसान आंदोलन के मंच से किया है। आपको बता दें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति में मेरठ एक बार फिर बड़े आंदोलन का केंद्र बनकर सामने आया है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की किसान-मजदूर महापंचायत और मेरठ कमिश्नरी के घेराव ने प्रशासन से लेकर सरकार तक हलचल पैदा कर दी है। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मेरठ पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर प्रशासन पर दबाव बनाया। इस दौरान भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने 1987 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन की याद दिलाते हुए साफ संकेत दिया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का किसान अपनी मांगों के लिए लंबे आंदोलन से पीछे हटने वाला नहीं है। मंगलवार 2 सितम्बर 2026 को मेरठ कमिश्नरी पर आयोजित किसान-मजदूर महापंचायत में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से किसान पहुंचे। किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के काफिलों के कारण कमिश्नरी क्षेत्र पूरी तरह से किसान आंदोलन के रंग में नजर आया। इस दौरान किसानों ने गन्ने के दाम, बकाया भुगतान, बिजली से जुड़े मामलों और खाद सहित कई मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। UP News
उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में चल रहे किसान-मजदूर महापंचायत में राकेश टिकैत ने किसानों को संबोधित करते हुए मेरठ की धरती पर हुए पुराने किसान आंदोलनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने मौजूदा आंदोलन को किसान आंदोलन की उसी परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया, जिसकी मजबूत जड़ें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रही हैं। दरअसल, किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत ने 1980 के दशक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को संगठित करते हुए बिजली के बिल और कृषि से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़े आंदोलन खड़े किए थे। बाद के वर्षों में मेरठ कमिश्नरी का घेराव किसान शक्ति प्रदर्शन का बड़ा प्रतीक बना। भाकियू के इतिहास में मेरठ का यह आंदोलन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि राकेश टिकैत का 1987 के आंदोलन को याद करना केवल एक पुरानी घटना का उल्लेख नहीं माना जा रहा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को पुराने संघर्षों की याद दिलाने और मौजूदा आंदोलन को उसी विरासत से जोड़ने का राजनीतिक-सामाजिक संदेश भी माना जा रहा है। UP News
उत्तर प्रदेश के मेरठ की किसान-मजदूर महापंचायत में किसानों ने कई स्थानीय और व्यापक कृषि समस्याओं को भी उठाया। किसानों की प्रमुख मांगों में गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने, गन्ने के लंबित भुगतान को जल्द दिलाने और चीनी के बढ़े बाजार भाव का लाभ किसानों तक पहुंचाने की मांगे शामिल रही। इसके अलावा बिजली के बढ़े हुए लोड, ओवरलोडिंग पेनल्टी, स्मार्ट मीटर, ट्यूबवेल कनेक्शन तथा बिजली बिलों से जुड़े मामलों को भी किसानों ने प्रमुखता से उठाया। किसानों ने सहकारी समितियों में खाद की उपलब्धता और ब्याज वसूली से जुड़े मामलों को भी महापंचायत में प्रमुखता से उठाया। UP News
महापंचायत में किनौनी शुगर मिल पर किसानों के बकाया गन्ना भुगतान का मुद्दा भी प्रमुख रहा। भाकियू नेताओं ने दावा किया कि किसानों का बड़ी रकम का भुगतान लंबित है। किसानों का कहना है कि चीनी के बाजार में कीमत बढ़ने के बावजूद गन्ना उत्पादकों को उसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। किसान नेताओं के अनुसार, इन समस्याओं को लेकर पहले भी प्रशासन को ज्ञापन दिया गया था। उनका आरोप था कि मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण किसानों को कमिश्नरी पर महापंचायत और घेराव का फैसला लेना पड़ा। UP News
भाकियू की महापंचायत से पहले बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के मेरठ पहुंचने का आह्वान किया गया था। संगठन की ओर से हजारों ट्रैक्टरों के पहुंचने का दावा किया गया। किसानों के काफिलों के कारण मेरठ के कई इलाकों में यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई और पुलिस-प्रशासन को अतिरिक्त इंतजाम करने पड़े। कमिश्नरी क्षेत्र में पुलिस और पीएसी की तैनाती की गई। प्रशासन की कोशिश रही कि किसानों के प्रदर्शन के साथ-साथ कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था भी बनी रहे। UP News
आंदोलन के दौरान किसान नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बातचीत हुई। अधिकारियों की ओर से किसानों की मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद भाकियू ने कमिश्नरी घेराव समाप्त करने का फैसला किया। हालांकि किसान नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन से मामला खत्म नहीं होगा। यदि तय समय में मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को दोबारा तेज किया जा सकता है। यानी फिलहाल मेरठ कमिश्नरी का घेराव खत्म जरूर हुआ है, लेकिन किसानों ने आंदोलन का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया है। UP News
मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश लंबे समय से किसान आंदोलनों की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं। यहां गन्ना, बिजली, कृषि लागत, फसलों के दाम और बकाया भुगतान जैसे मुद्दे सीधे बड़ी ग्रामीण आबादी से जुड़े हैं। भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक स्वरूप को मजबूत करने में भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बड़ी भूमिका रही है। महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में किसान आंदोलनों ने इस क्षेत्र में संगठन को व्यापक आधार दिया और मेरठ सहित पश्चिमी यूपी के कई जिलों में किसान एकजुटता की मजबूत पहचान बनी। ऐसे में राकेश टिकैत द्वारा मेरठ में पुराने आंदोलन की याद दिलाना मौजूदा किसान राजनीति के लिहाज से खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। UP News
मेरठ की महापंचायत ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान मुद्दों को लेकर भाकियू अपनी सक्रियता बढ़ा रही है। फिलहाल अधिकारियों के आश्वासन के बाद घेराव खत्म हो गया है, लेकिन किसानों की मांगों का समाधान जमीन पर कितना होता है, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेगा। यदि गन्ना भुगतान, गन्ने के भाव, बिजली और खाद जैसे मुद्दों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो मेरठ का यह आंदोलन आगे चलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दूसरे जिलों तक फैल सकता है। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा संदेश यही है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति में मेरठ आज भी बेहद महत्वपूर्ण केंद्र है और राकेश टिकैत ने 1987 के आंदोलन की याद दिलाकर किसान संगठनों की पुरानी आंदोलनकारी विरासत को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। UP News
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