UP News; भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत के आह्वान पर उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।

UP News; उत्तर प्रदेश से बड़ी खबर आई है। उत्तर प्रदेश की बड़ी खबर यह है कि दिल्ली में चल रहे छात्रों के समर्थन में प्रसिद्ध किसान नेता राकेश टिकैत मैदान में उतर गए हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत के आह्वान पर उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा की पहल पर उत्तर प्रदेश के किसानों ने मुजफ्फरनगर की कचहरी में पंचायत बुलाई थी। पंचायत में पहुंचे किसानों से राय मशविरा करके किसान नेता राकेश टिकैत ने पंचायत को अनिश्चितकालीन धरने में बदलने की घोषणा कर दी।
यह लाठी चार्ज नहीं बल्कि छात्रों के आंदोलन को चार्ज कर दिया
उत्तर प्रदेश के किसानों के द्वारा मुजफ्फरनगर की कचहरी में शुरू किए गए धरने को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध किसान नेता राकेश टिकैत ने बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि दिल्ली में छात्रों पर हुआ लाठीचार्ज बेहद दु:खद घटना है। उन्होंने कहा कि छात्रों पर हुए इस लाठीचार्ज ने छात्रों के आंदोलन को पूरी तरह से चार्ज कर दिया है। इस दौरान प्रसिद्ध किसान नेता राकेश टिकैत ने आगे कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा उत्तर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर किसान पंचायतों का आयोजन करेगा। उनका कहना है कि किसानों, मजदूरों और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदेशव्यापी जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। श्री टिकैत ने कहा कि भर्ती, पेपर लीक, रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाने वाले छात्रों के साथ बल प्रयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं है। उनके अनुसार, इस कार्रवाई का असर केवल शहरों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि गांवों तक पहुंचेगा और इसका राजनीतिक प्रभाव भी दिखाई देगा।
दिल्ली की घटना को लेकर यूपी में बढ़ा आक्रोश
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और किसानों को रोका गया तथा शांतिपूर्ण विरोध पर सख्ती की गई। इसी के विरोध में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में आयोजित पंचायत को अनिश्चितकालीन धरने का रूप दिया गया। किसान संगठनों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन का दायरा पूरे प्रदेश में बढ़ाया जाएगा। राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार की कृषि एवं व्यापार नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विदेशी देशों के साथ होने वाले कृषि व्यापार समझौते, मक्का और दुग्ध क्षेत्र से जुड़े फैसले तथा बिजली संशोधन विधेयक जैसे मुद्दे किसानों की आजीविका को प्रभावित कर सकते हैं। भूमि अधिग्रहण के मामलों को भी उन्होंने आंदोलन का प्रमुख कारण बताया।
जौहर यूनिवर्सिटी पर भी दिया बड़ा बयान
धरने के दौरान जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े सवाल पर टिकैत ने कहा कि विश्वविद्यालय बनाए जाते हैं, तोड़े नहीं जाते। उन्होंने कहा कि यदि किसी विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने जैसी कार्रवाई होती है तो किसान संगठन उसका विरोध करेंगे, क्योंकि इससे शिक्षा व्यवस्था और देश की छवि दोनों प्रभावित होंगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों का प्रभाव बहुत मजबूत है। ऐसे में यदि किसान आंदोलन छात्रों और रोजगार जैसे मुद्दों के साथ जुड़ता है तो इसका असर प्रदेश की राजनीति पर भी पड़ सकता है। मुजफ्फरनगर से शुरू हुआ यह आंदोलन आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों तक फैल सकता है।
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