खून से सनी चारपाई पर 10 साल से बहनें निभा रही हैं राखी का रिश्ता, हर रक्षाबंधन पर पूरे गांव की आंखें हो जाती हैं नम
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 05:48 PM
फतेहपुर, उत्तर प्रदेश: यूपी के फतेहपुर जिले के बकेवर कोतवाली क्षेत्र के सदान बदान का पुरवा गांव में रक्षाबंधन का त्योहार हर साल एक अलग ही कहानी लेकर आता है। एक ऐसा दृश्य, जो जितना मार्मिक है, उतना ही अद्भुत भी।
यहां राघवेंद्र यादव की हत्या को 10 साल हो चुके हैं, लेकिन उनकी चार बहनें आज भी उस चारपाई को राखी बांधती हैं जिस पर भाई की हत्या हुई थी। वह चारपाई अब खून से सनी नहीं, बल्कि बहनों की श्रद्धा और प्रेम से सराबोर है।
21 जून 2015 की रात करीब 11 बजे राघवेंद्र की हत्या घर के बाहर चारपाई पर सोते समय कर दी गई थी। आरोपी सुधीर यादव ने मामूली रंजिश में बांके से ताबड़तोड़ नौ वार किए थे। उस चारपाई पर गिरा भाई का खून अब दाग़ नहीं, बहनों के लिए भाई की आखिरी निशानी बन गया है।
राघवेंद्र की चार बहनें निशा, रिषा, नीता और नीतू, हर साल सावन की पूर्णिमा पर मायके लौटती हैं। भले ही सालभर न आएं, लेकिन रक्षाबंधन के दिन उस चारपाई को बाहर निकालकर रोली-चावल से तिलक करती हैं और राखी बांधती हैं। उनकी आंखों से आंसुओं की धारा बहती है, जिसे देखकर गांव के लोग भी खुद को रोक नहीं पाते।
राघवेंद्र के पिता राजेन्द्र सिंह और मां सोमवती अब भी इस दर्द से उबर नहीं पाए हैं। मां का कहना है, "हमने तो न्याय की उम्मीद में देखा था, लेकिन सिर्फ उम्रकैद से मन नहीं भरता। उसे फांसी मिलनी चाहिए थी।"
गुरुवार को कोर्ट ने आरोपी सुधीर यादव को उम्रकैद की सजा और 40 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। घटना के दौरान मौजूद नौकर तुसार बहेरा ने आरोपी को वारदात करते देखा था, लेकिन बाद में वह लापता हो गया, जिससे यह शक भी बना कि आरोपी ने उसे रास्ते से हटा दिया।
गांववालों का कहना है कि जब बहनें राखी लेकर आती हैं और उस खून से सनी चारपाई को राखियों से सजाती हैं, तो पूरा गांव सन्नाटा ओढ़ लेता है। हर आंख नम हो जाती है, और हर दिल भारी।
यह महज एक हत्या की कहानी नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते की अटूट डोर की मिसाल है, जो मृत्यु के बाद भी नहीं टूटी।
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