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अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित गबन और अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को कई महत्वपूर्ण साक्ष्य हाथ लगे हैं। सूत्रों के अनुसार जांच में वित्तीय प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था से जुड़ी गंभीर खामियां सामने आई हैं।

UP News : अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित गबन और अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को कई महत्वपूर्ण साक्ष्य हाथ लगे हैं। सूत्रों के अनुसार जांच में वित्तीय प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था से जुड़ी गंभीर खामियां सामने आई हैं। SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट रविवार या सोमवार तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जा सकती है। जांच में यह संकेत मिले हैं कि दान राशि की गणना और उसके प्रबंधन से जुड़े सिस्टम में कई स्तरों पर चूक हुई है। साथ ही कुछ सीसीटीवी फुटेज के आधार पर धनराशि के कथित हेरफेर के प्रमाण मिलने की बात सामने आ रही है, जबकि कुछ रिकॉर्ड्स को हटाए जाने की आशंका भी जताई जा रही है। UP News
सूत्रों के अनुसार जांच में अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इनके अलावा कुछ अन्य कर्मचारियों और संबंधित लोगों की भूमिका पर भी जांच केंद्रित है। इसी क्रम में टिन्नू यादव, कुछ सुरक्षा कर्मियों और बैंक से जुड़े कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई है, और एफआईआर दर्ज होने की संभावना जताई जा रही है। SIT ने ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों के अयोध्या छोड़ने पर अस्थायी रोक भी लगाई है। जांच टीम ने अब तक लगभग 150 लोगों से पूछताछ की है, जिनमें ट्रस्ट प्रबंधन से जुड़े अधिकारी, बैंक कर्मी और तकनीकी एजेंसियों के कर्मचारी शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि दान राशि की गिनती, बैंक में जमा प्रक्रिया और निगरानी तंत्र में पारदर्शिता की कमी रही है। प्रारंभिक निष्कर्षों में यह भी संकेत मिले हैं कि कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय करने में लापरवाही हुई। इस पूरे मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। हालांकि, अभी इस पर आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की गहन समीक्षा कर रही हैं। UP News
सूत्रों के मुताबिक SIT की रिपोर्ट के बाद मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन ढांचे में बड़े बदलाव संभव हैं। साथ ही कई अहम प्रशासनिक सिफारिशें भी रिपोर्ट का हिस्सा हो सकती हैं। इनमें ट्रस्ट के पुनर्गठन, पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कार्यपालक अधिकारी की नियुक्ति, चढ़ावे की ऑडिट प्रक्रिया को नियमित और समयबद्ध करने, तथा निगरानी तंत्र को मजबूत करने जैसे सुझाव शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और बैंकिंग कार्यों में नियमित स्टाफ की तैनाती की सिफारिश भी की जा सकती है। UP News
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