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अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान पात्र की गिनती के दौरान कथित अनियमितता के आरोपों ने सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है।

UP News : उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी कहे जाने वाले अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान पात्र की गिनती के दौरान कथित अनियमितता के आरोपों ने सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। सूत्रों के अनुसार, देर रात मंदिर परिसर में लंबी जांच प्रक्रिया चली, जिसके बाद चार लोगों को हिरासत में लिया गया है। वहीं एक वरिष्ठ अधिकारी को अस्थायी रूप से कार्यमुक्त किए जाने की भी चर्चा है। UP News
मामले की शुरुआत तब हुई जब अखिलेश यादव ने राम मंदिर ट्रस्ट के दान संग्रह को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उनके बयान के बाद अयोध्या में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सरगर्मी तेज हो गई। हालांकि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए आधिकारिक बयान जारी किया गया था। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्पष्ट किया था कि नियमित ऑडिट प्रक्रिया के तहत सभी दान और गणना की जांच समय-समय पर की जाती है और अब तक किसी प्रकार की अनियमितता सामने नहीं आई है। सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के मुताबिक, एसबीआई द्वारा दान राशि की गणना के लिए तैनात चार कर्मचारियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई यात्री सुविधा केंद्र में हुई रिकवरी और जांच के बाद की गई। हालांकि प्रशासनिक और ट्रस्ट स्तर से इस मामले पर आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। UP News
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने इसे ट्रस्ट का आंतरिक मामला बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोपों पर सरकार की सीधी भूमिका नहीं होती। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि यदि किसी ने आरोप लगाए हैं तो वह उनकी राय है, उस पर बार-बार जवाब देना आवश्यक नहीं है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से पहले ही स्पष्ट किया गया है कि मंदिर में दान और नकदी प्रबंधन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। ट्रस्ट के अनुसार, हुंडी काउंटिंग और ऑडिट का काम नियमित रूप से कई दिनों तक चलता है और यह एक सतत प्रक्रिया है। अब तक किसी बड़े वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है। UP News
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