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Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या के श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया। क्या इस पूरे विवाद ने प्रदेश में बीजेपी के सामने नई चुनौती पेश की है।

Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावे विवाद में शुक्रवार को मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। यह एक बड़ा घटनाक्रम है जो यूपी की सियासत पर दूरगामी असर डाल सकता है। जहां तक उत्तर प्रदेश की राजनीति का प्रश्न है तो विपक्ष खासतौर से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव इन इस्तीफों को अपनी जीत के तौर पर पेश करेंगे क्योंकि उन्होंने यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया था।
सपा सरकार में पूर्व मंत्री पवन पांडेय (सपा) ने 7 जून को दावा किया कि राम मंदिर में चढ़े चढ़ावे से साढ़े 7 करोड़ रुपये की चोरी हुई। इसके बाद अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को पकड़ लिया और लगातार बीजेपी पर हमला करने लगे। सपा के साथ ही कांग्रेस, आप, शिवसेना यूबीटी और यहां तक की तमिलनाडु की डीएमके ने भी इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधा।
बीजेपी की मजबूरी
अयोध्या में राम मंदिर- बीजेपी का कोर एजेंडा रहा है। उसी ने राम मंदिर आंदोलन चलाकर इसे भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बना दिया था। फिर इसके निर्माण का पूरा श्रेय भी बीजेपी लेती है। शायद यही वजह है कि चढ़ावे में कथित चोरी के आरोप लगे तो योगी सरकार से लेकर केंद्र की मोदी सरकार तक वैसा रुख नहीं दिखा सकी जैसा अक्सर बीजेपी सरकारें विपक्ष के आरोपों पर दिखाती हैं।
विपक्षी दल बीेजपी की इस मजबूरी को समझ गए। जबकि बीएसपी इस मुद्दे पर उतनी मुखर नहीं रही। बसपा प्रमुख की इस पूरे विवाद पर नपी तुली टिप्पणियां ही सामने आई।
गुरुवार (25 जून) देर शाम इस मामले में पहली एफआईआर दर्ज हुई थी। हालांकि, एफआईआर में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा समेत अन्य बड़े पदाधिकारियों के नाम नहीं हैं। लेकिन उनके इस्तीफे से विपक्ष को बड़ा मुद्दा मिल गया है।
आगे क्या होगा?
विपक्षी दल अब इस मुद्दे को और जोर-शोर से उठाएंगे। बीजेपी दावा करेगी कि उसने आरोपों पर तुरंत कार्रवाई की। एसआईटी का गठन किया जिसने बहुत जल्दी अपनी शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। इसके बाद तुरंत एफआईआर दर्ज हुई और अब दो बड़े नामों का इस्तीफा हुआ है। देखना यह है कि विपक्ष और सत्ता के नैरेटिव में कौन जनता पर प्रभाव डालता है।
राम मंदिर करोड़ों राम भक्तों की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में चढ़ावे की पूरी पारदर्शिता, सही लेखा-जोखा और जवाबदेही सबसे जरूरी है। अभी जांच चल रही है और आरोप साबित होना बाकी है। लेकिन इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान जारी रहेगा यह तय है। Ram Mandir
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