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राम मंदिर में चढ़ावे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर नए सिरे से मंथन शुरू हो गया है। चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की जांच जारी है, हालांकि अब तक किसी ठोस निष्कर्ष की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

UP News : राम मंदिर में चढ़ावे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर नए सिरे से मंथन शुरू हो गया है। चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की जांच जारी है, हालांकि अब तक किसी ठोस निष्कर्ष की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट अब दान और चढ़ावे की सुरक्षा व्यवस्था को नए मॉडल के तहत विकसित करने पर विचार कर रहा है। इसमें तिरुपति बालाजी मंदिर की व्यवस्था को आधार बनाकर निजी सुरक्षा एजेंसी की भूमिका बढ़ाने की संभावना पर चर्चा चल रही है। इस व्यवस्था की निगरानी ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी करेंगे। UP News
ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारी फिलहाल एसआईटी जांच के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नई व्यवस्था को जमीन पर उतारने की दिशा में औपचारिक कदम उठाए जाएंगे। सूत्र बताते हैं कि ट्रस्ट का फोकस अब पूरी तरह श्रद्धालुओं के दान की सुरक्षा और पारदर्शिता पर है। इस मुद्दे पर हाल के दिनों में वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच कई दौर की चर्चा हुई है, जिसमें देश के विभिन्न प्रमुख मंदिरों की व्यवस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन भी शामिल रहा। UP News
जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट के भीतर तिरुपति बालाजी मंदिर की व्यवस्था को लेकर सहमति बनती दिख रही है। इसे देश में सबसे अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। आगामी ट्रस्ट बैठक को इस दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उम्मीद है कि बैठक में सभी पदाधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर कोई ठोस निर्णय लिया जा सके। बैठक में विभिन्न जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण और भविष्य की प्रगति रिपोर्टिंग प्रणाली पर भी विचार संभव है। UP News
राम मंदिर में चढ़ावे के रूप में प्राप्त सोने-चांदी और अन्य धातुओं के प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था भी चर्चा में है। वर्तमान में धातुओं की शुद्धता की जांच विशेषज्ञों द्वारा की जाती है, जिसके बाद उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत स्मृति चिन्हों में परिवर्तित किया जाता है। यह प्रक्रिया एक अनुबंधित व्यवस्था के तहत चल रही है, जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन एक अर्ध-सरकारी संस्था से जुड़े विशेषज्ञ नियमित रूप से अयोध्या पहुंचकर धातुओं का परीक्षण और रिकॉर्ड तैयार करते हैं। UP News
सूत्रों के मुताबिक, तिरुपति देवस्थानम की व्यवस्था और राम मंदिर की मौजूदा प्रणाली की तुलना भी अंदरखाने में की जा रही है। माना जा रहा है कि भविष्य में व्यवस्था को और अधिक केंद्रीकृत और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जाएगा। इस पूरे मामले को लेकर ट्रस्ट के भीतर विभिन्न स्तरों पर विचार-विमर्श जारी है, हालांकि किसी भी औपचारिक बदलाव पर अंतिम निर्णय आने वाले समय में ही संभव होगा। UP News
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