श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में पूजा व्यवस्था से जुड़ी व्यवस्थाओं में बदलाव का सिलसिला जारी है। अब मंदिर के सभी अर्चकों के लिए एक समान ड्रेस कोड लागू किया जा रहा है। इसके तहत श्रीरामलला की सेवा में लगे सभी पुजारी पीत रंग के धार्मिक वस्त्र धारण करेंगे।

UP News : अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में पूजा व्यवस्था से जुड़ी व्यवस्थाओं में बदलाव का सिलसिला जारी है। अब मंदिर के सभी अर्चकों के लिए एक समान ड्रेस कोड लागू किया जा रहा है। इसके तहत श्रीरामलला की सेवा में लगे सभी पुजारी पीत रंग के धार्मिक वस्त्र धारण करेंगे। नई व्यवस्था के तहत बिना सिले हुए वस्त्र पहनने पर विशेष जोर दिया गया है। मंदिर की पूजा व्यवस्था में यह बदलाव धार्मिक परंपराओं और शुचिता को ध्यान में रखकर किया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार गर्मी के मौसम में अर्चकों के लिए नीचे धोती और ऊपर कंधे पर रखने के लिए बिना सिला हुआ रेशमी अंगवस्त्र निर्धारित किया गया है। मंदिर ट्रस्ट की पिछली बैठक में इस ड्रेस कोड को लेकर निर्णय लिया गया था। UP News
नई व्यवस्था में मौसम के अनुसार पुजारियों के वस्त्रों में बदलाव किया जाएगा, लेकिन वस्त्रों का रंग पीत ही रहेगा। गर्मी के दौरान रेशमी वस्त्र निर्धारित किए गए हैं, जबकि सर्दियों में अर्चकों को मौसम के अनुरूप ऊनी वस्त्र उपलब्ध कराए जाएंगे। धार्मिक समिति से जुड़े लोगों के अनुसार रेशमी और ऊनी वस्त्र धार्मिक दृष्टि से पूजा के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। इसी परंपरा और शुचिता को आधार बनाकर मंदिर में सेवा देने वाले सभी अर्चकों के लिए एक जैसी वेशभूषा तय की गई है। नई ड्रेस व्यवस्था को लेकर पहले 13 अगस्त यानी सावन शुक्ल प्रतिपदा से बदलाव की चर्चा थी, लेकिन गुरुवार सुबह की आरती में अर्चक पुरानी वेशभूषा में दिखाई दिए। ऐसे में अब नई ड्रेस व्यवस्था 15 अगस्त से लागू होने की संभावना है। अर्चकों की ड्यूटी का रोस्टर अमावस्या और पूर्णिमा के आधार पर बदलता है। इसी वजह से ड्यूटी की पाली बदलने के साथ नई वेशभूषा लागू करने की व्यवस्था तय की गई है। रोस्टर के अनुसार एक समूह सुबह की पाली में और दूसरा समूह शाम की पाली में सेवा करता है। अमावस्या और पूर्णिमा के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोनों समूहों की पालियां बदल जाती हैं। UP News
धार्मिक न्यास समिति से जुड़े स्वामी राजकुमार दास के अनुसार वैष्णव परंपरा में मंदिर के गर्भगृह की मर्यादा और शुचिता का विशेष महत्व है। जहां भगवान के विग्रह विराजमान होते हैं, वहां पूजा-अर्चना से जुड़ी प्रत्येक व्यवस्था में धार्मिक नियमों का पालन किया जाता है। उनके अनुसार वैष्णव परंपरा में बिना सिले हुए वस्त्रों को अधिक शुद्ध माना जाता है। इसी मान्यता के चलते श्रीरामलला के अर्चकों के लिए बिना सिले हुए अंगवस्त्र निर्धारित किए गए हैं। UP News
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