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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। सोमवार को आयोजित ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में एक अहम फैसला लिया गया। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों को मंजूरी दे दी गई है।

UP News : उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। सोमवार को आयोजित ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में एक अहम फैसला लिया गया। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों को मंजूरी दे दी गई है। कोषाअध्यक्ष गोविंद देवगिरि ने इस बात की जानकारी दी। UP News
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की नगीना तहसील में जन्मे 79 वर्षीय चंपत राय ने अपनी शुरुआती पहचान एक शिक्षक के रूप में बनाई। भौतिकी में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने नगीना के एक कॉलेज में लगभग 11 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया। इसी दौरान उनका झुकाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा की ओर और मजबूत हुआ। आपातकाल के दौर में वे सक्रिय रूप से संघ के प्रचारक बने और संगठनात्मक गतिविधियों में पूरी तरह शामिल हो गए। इस दौरान उन्होंने गत नायक और सह-जिला कार्यवाह जैसे पदों पर काम किया और आपातकाल के समय गिरफ्तार होने वालों में भी उनका नाम शामिल रहा। 1981 से 1984 के बीच उन्होंने देहरादून में संघ के जिला प्रचारक के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उनका कार्यक्षेत्र सहारनपुर और फिर मेरठ तक विस्तारित हुआ। 1980 के दशक के मध्य में जब विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन को गति दी, तब कई आरएसएस प्रचारकों को वीएचपी में भेजा गया। चंपत राय भी इसी क्रम में संगठन से जुड़े और दिवंगत अशोक सिंघल के नेतृत्व में कार्य किया। जुलाई 1986 में उन्हें वीएचपी का प्रांत सह-संगठन सचिव बनाया गया, जिसके बाद उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन सचिव के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। राम जन्मभूमि आंदोलन के निर्णायक दौर में 1991 में उन्हें अयोध्या भेजा गया। 1991 से 1995 तक वे उत्तर प्रदेश में वीएचपी के सह-संगठन सचिव रहे। बाद में 1996 में उन्हें दिल्ली स्थानांतरित करते हुए केंद्रीय स्तर की जिम्मेदारी सौंपी गई। धीरे-धीरे संगठन में उनका कद बढ़ता गया और उन्होंने सचिव, संयुक्त महासचिव तथा महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वर्ष 2018 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर पदोन्नत किया गया। राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया में वे सबसे प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव के रूप में उन्होंने अयोध्या के कारसेवकपुरम से पूरे निर्माण कार्य की निगरानी की। हालांकि, हाल के समय में दान और ट्रस्ट संचालन से जुड़े विवादों के बीच उनका नाम चर्चा में आया है। कुछ राजनीतिक आरोपों और जांच के सवालों के बीच विभिन्न स्तरों पर उनके पक्ष और विरोध दोनों में प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। UP News
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65 वर्षीय अनिल मिश्रा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के 15 ट्रस्टियों में शामिल हैं, जिसका गठन फरवरी 2020 में किया गया था। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले, 22 जनवरी 2024 को उन्होंने अपनी पत्नी उषा मिश्रा के साथ मुख्य यजमान की भूमिका निभाई थी। 16 जनवरी को सरयू नदी में स्नान के साथ उन्होंने अनुष्ठान की शुरुआत की और इसके बाद उपवास रखते हुए विधिवत धार्मिक प्रक्रियाओं का पालन किया। उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले के पटौना गांव से आने वाले अनिल मिश्रा का आरएसएस (RSS) से जुड़ाव आपातकाल के दौर में हुआ। हालांकि 1990 के बाद उनकी संगठनात्मक सक्रियता और अधिक बढ़ गई। वे धीरे-धीरे संगठन में आगे बढ़ते हुए प्रांत सहकार्यवाह और बाद में अवध क्षेत्र के प्रांत कार्यवाह बने। वे राम मंदिर आंदोलन से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे और वर्तमान में आरएसएस की अवध क्षेत्रीय इकाई से जुड़े हुए हैं। ट्रस्ट में उनकी भूमिका प्रशासनिक और प्रबंधन से जुड़ी रही है। वे मंदिर परिसर में होने वाली खरीद-बिक्री और संबंधित प्रक्रियाओं की निगरानी भी करते हैं। उनका कार्यालय तीर्थयात्री सुविधा केंद्र के बेसमेंट में स्थित है, जो दान गणना केंद्र के पास है। पेशे से वे होम्योपैथिक मेडिकल ऑफिसर रहे हैं और अयोध्या के रकाबगंज क्षेत्र में अपना क्लिनिक चलाते थे। वर्ष 2020 में सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पूरी तरह से मंदिर निर्माण कार्य को अपना समय देना शुरू कर दिया। उनके परिवार में तीन बेटे हैं, जिनमें से एक जर्मनी में चिकित्सा सेवा से जुड़ा हुआ है। UP News
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