यह कानून लागू होने पर देश में गंभीर सामाजिक तनाव पैदा हो सकता है और इसे तुरंत वापस लेना ही सरकार के लिए जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक वे धर्माचार्य पद पर हैं, इस कानून को किसी भी हालत में लागू नहीं होने देंगे।

UP News : उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में आयोजित रामकथा के दौरान जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने यूजीसी की नई गाइडलाइंस को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह कानून लागू होने पर देश में गंभीर सामाजिक तनाव पैदा हो सकता है और इसे तुरंत वापस लेना ही सरकार के लिए जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक वे धर्माचार्य पद पर हैं, इस कानून को किसी भी हालत में लागू नहीं होने देंगे।
साथ ही लखनऊ में सवर्ण मोर्चा के नेतृत्व में यूजीसी एक्ट के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ। सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे और अपने विरोध में नारेबाजी की। इस दौरान एसडीएम अलंकार अग्निहोत्री, जिन्होंने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया था, प्रदर्शन में शामिल हुए। भारी पुलिस बल तैनात किया गया और भीड़ को नियंत्रण में रखा गया।
रामभद्राचार्य ने अपने भाषण में ब्राह्मण समाज और जातिवाद पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि ब्राह्मण समाज कभी जातिवादी नहीं रहा। उन्होंने महाभारत के द्रोणाचार्य-कर्ण प्रसंग और गुरु वशिष्ठ के उदाहरण के जरिए यह बताया कि शिक्षा और सम्मान सभी वर्गों को समान मिलना चाहिए।
जगद्गुरु ने समाज में फैली छुआछूत और कुरीतियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सभी वर्गों को समान सम्मान और अवसर देने की आवश्यकता है। इसके अलावा, उन्होंने बस्ती जिले का नाम बदलकर वशिष्ठ नगर करने की मांग दोहराई और ब्राह्मण समाज को अपनी सांस्कृतिक और नैतिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।