ब्रज के प्रसिद्ध संत और पद्मश्री सम्मानित रमेश बाबा महाराज का गोलोक गमन हो गया। 60 हजार से अधिक निराश्रित और बीमार गौवंश की सेवा से लेकर ब्रजभूमि और पर्यावरण संरक्षण तक उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित किया।

UP News : उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के बरसाना में ब्रज की भक्ति, गौ-सेवा और पर्यावरण संरक्षण के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले विरक्त संत और पद्मश्री सम्मानित रमेश बाबा महाराज को खो दिया है। उनके गोलोक गमन की खबर सामने आते ही बरसाना सहित पूरे ब्रजमंडल में शोक की लहर दौड़ गई। मान मंदिर बरसाना से जुड़े संत, श्रद्धालु और अनुयायी उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। रमेश बाबा महाराज ने अपना पूरा जीवन राधा-कृष्ण भक्ति, गौ-सेवा और ब्रजभूमि के संरक्षण के लिए समर्पित किया। बरसाना में उनके प्रयासों से स्थापित मान मंदिर और श्री माताजी गौशाला आज उनकी सेवा भावना की पहचान बने हुए हैं।
रमेश बाबा का जन्म वर्ष 1938 में तीर्थराज प्रयाग में हुआ था। वे प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य बलदेव प्रसाद शुक्ल के पुत्र थे। बचपन से ही उनका झुकाव आध्यात्मिकता और वैराग्य की ओर था। युवावस्था में ही उन्होंने गृह त्याग कर ब्रजभूमि को अपनी कर्मभूमि बना लिया। इसके बाद उनका जीवन राधा-कृष्ण भक्ति और ब्रज सेवा के लिए समर्पित हो गया। बरसाना पहुंचने के बाद रमेश बाबा ने मान मंदिर की स्थापना की। इसके साथ ही उन्होंने गौ-सेवा को भी अपने जीवन का प्रमुख उद्देश्य बनाया। उनके प्रयासों से स्थापित श्री माताजी गौशाला में बड़ी संख्या में निराश्रित और बीमार गौवंश की सेवा की जाती है। रमेश बाबा की पहचान देशभर में गौ-सेवा के लिए भी बनी। बताया जाता है कि श्री माताजी गौशाला में 60 हजार से अधिक निराश्रित, बीमार और वृद्ध गौवंश की सेवा की जाती है। गौशाला की विशेषता यह भी बताई जाती है कि यहां गौवंश की सेवा बिना किसी सरकारी अनुदान के की जाती है। बाबा का मानना था कि गौ-सेवा केवल धार्मिक दायित्व नहीं, बल्कि समाज की जिम्मेदारी भी है। रमेश बाबा ने अपना पूरा जीवन गौवंश की सेवा और संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया। उनके अनुयायियों के लिए उनका जीवन सादगी, सेवा और भक्ति का उदाहरण रहा। UP News:
रमेश बाबा केवल गौ-सेवक के रूप में ही नहीं, बल्कि ब्रज के पर्यावरण और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने ब्रज के पर्वतों पर कथित अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाई। इसके साथ ही यमुना को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए भी उन्होंने लंबे समय तक अभियान चलाया। उनके प्रयासों ने ब्रज की पर्यावरणीय चिंताओं को व्यापक स्तर पर उठाने में भूमिका निभाई। गौ-सेवा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक-आध्यात्मिक योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2019 में रमेश बाबा को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया था। यह सम्मान उनके दशकों लंबे सेवा कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना। UP News:
रमेश बाबा के गोलोक गमन की खबर के बाद बरसाना के मान मंदिर, राधा रानी मंदिर और माताजी गौशाला में संतों और श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई। उनके अनुयायी उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंच रहे हैं। उनके शिष्य ब्रजशरण महाराज सहित अन्य संतों ने उनके जीवन को सादगी, गौ-प्रेम और राधा नाम के प्रचार के लिए समर्पित बताया। रमेश बाबा नियमित रूप से राधा नाम संकीर्तन और प्रभात फेरी से जुड़े रहते थे। भक्ति और सेवा उनके दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा थी। उनके जाने से ब्रज के संत समाज और भक्तों में गहरा शोक है।
रमेश बाबा के गोलोक गमन के बाद उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं। उनका अंतिम संस्कार बरसाना धाम में वैष्णव परंपरा के अनुसार किए जाने की जानकारी सामने आई है। रमेश बाबा के निधन पर संत समाज के साथ राजनीतिक जगत से भी शोक संदेश सामने आए हैं। मुख्यमंत्री और कई केंद्रीय मंत्रियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।
रमेश बाबा का जाना ब्रज के लिए एक ऐसे संत की विदाई है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन राधा-कृष्ण भक्ति, गौ-सेवा और प्रकृति संरक्षण को समर्पित कर दिया। UP News:
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