उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के करनैलगंज में दशहरे से एक दिन पहले रामलीला के दौरान ‘फांसी के नाटक’ का मंचन किया जाता है। इसमें हत्या की घटना से लेकर पुलिस जांच, अदालत की सुनवाई और सजा तक की प्रक्रिया दिखाई जाती है।

UP News : देशभर में दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के करनैलगंज में इस पर्व से पहले रामलीला के दौरान एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। यहां दशहरे से एक दिन पहले ऐतिहासिक रामलीला में ‘फांसी के नाटक’ का मंचन होता है। इस आयोजन को देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में दर्शक जुटते हैं।
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करनैलगंज की रामलीला में मंचित होने वाले इस नाटक की कहानी एक सौदागर के इर्द-गिर्द घूमती है। नाटक के अनुसार, सौदागर दशहरे के मेले में कारोबार करने आता है। इसी दौरान एक आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति उसकी हत्या कर देता है। इसके बाद कहानी पुलिस की जांच से आगे बढ़ती है और अदालत में सुनवाई, फैसला तथा सजा सुनाए जाने की प्रक्रिया का मंचन किया जाता है।
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इस नाटक की खास बात यह है कि रामलीला कमेटी के स्थानीय कलाकार ही अलग-अलग भूमिकाएं निभाते हैं। कोई पुलिसकर्मी बनता है तो कोई डॉक्टर, वकील, जज या जल्लाद की भूमिका में नजर आता है। मंचन के जरिए अपराध की घटना से लेकर न्यायिक प्रक्रिया तक को नाटकीय अंदाज में दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाता है। UP News :
नाटक का सबसे चर्चित दृश्य अंत में आता है। रामलीला मैदान में करीब 30 फीट ऊंचे तख्ते पर प्रतीकात्मक रूप से दोषी युवक को फांसी के फंदे पर लटकाते हुए दिखाया जाता है। इस दृश्य को देखने के लिए मैदान में दर्शकों की भीड़ जुटती है। नाटक का यह हिस्सा आयोजन को दूसरी रामलीलाओं से अलग पहचान देता है। करनैलगंज की रामलीला में होने वाले इस आयोजन का उद्देश्य केवल दर्शकों का मनोरंजन करना नहीं, बल्कि समाज को अपराध के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना भी है। नाटक के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की जाती है कि अपराध के गंभीर परिणाम हो सकते हैं और कानून तथा न्याय व्यवस्था की समाज में महत्वपूर्ण भूमिका है। धार्मिक परंपरा के साथ सामाजिक संदेश जोड़ने वाला करनैलगंज का यह ‘फांसी का नाटक’ दशहरे से पहले रामलीला का एक प्रमुख आकर्षण माना जाता है। यह आयोजन स्थानीय सांस्कृतिक परंपरा की विशिष्ट पहचान भी प्रस्तुत करता है। UP News :
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