योगी सरकार 8.65 लाख करोड़ के बजट को खर्च ही नहीं कर सकी, 6 दिन में बकाया 40% खर्च चुनौती
प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल 8.65 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था, लेकिन अब तक विभागों ने सिर्फ करीब 60% राशि ही खर्च किया है। इसका मतलब है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक विभागों को अपने कुल बजट का 40% शेष बचे दिनों में खर्च करना होगा, जो व्यावहारिक रूप से बहुत कठिन दिख रहा है।

UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल 8.65 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था, लेकिन अब तक विभागों ने सिर्फ करीब 60% राशि ही खर्च किया है। इसका मतलब है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक विभागों को अपने कुल बजट का 40% शेष बचे दिनों में खर्च करना होगा, जो व्यावहारिक रूप से बहुत कठिन दिख रहा है।
बजट इस्तेमाल में सुस्ती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जताई नाराजगी
सूत्रों के मुताबिक कई विभागों ने अपनी आवंटित राशि का आधा से भी कम ही खर्च किया है। इसी को लेकर हाल ही में मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट खर्च में विलंब और सुस्ती पर गंभीर नाराजगी जताई थी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आवंटित धनराशि का समय पर उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
छह दिन में पूरी करनी होगी बकाया राशि, अवकाश बाधा
वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्त होने में अब सिर्फ छह दिन शेष हैं। लेकिन इन छह दिनों में भी वास्तविक कार्य दिवस कम हैं। गुरुवार और शुक्रवार को रामनवमी का अवकाश है, शनिवार को जिलों के कार्यालय खुलेंगे लेकिन शासन स्तर और बैंक बंद रहेंगे। 31 मार्च को महावीर जयंती का अवकाश है। इस वजह से विभागों पर बजट खर्च का दबाव बढ़ गया है, ताकि वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले योजनाओं और परियोजनाओं के लिए धन का उपयोग हो सके।
कौन से विभाग सबसे पीछे हैं
कुछ विभागों में बजट खर्च की स्थिति इतनी खराब है कि 50% से कम राशि ही खर्च हुई है। इनमें प्रमुख हैं:
* सिंचाई विभाग (निर्माण कार्य)
* संस्कृति विभाग
* संस्थागत वित्त विभाग (स्टांप और पंजीकरण)
* सामान्य प्रशासन विभाग
* समाज कल्याण विभाग (जनजाति कल्याण)
* लोक निर्माण विभाग (राज्य संपत्ति निदेशालय)
* राष्ट्रीय एकीकरण विभाग
* राजस्व विभाग (आपदा राहत)
* परिवहन और न्याय विभाग
* नगर विकास विभाग
* आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा
* कारागार, मत्स्य, ग्राम्य विकास, भूमि विकास एवं जल संसाधन
* भारी एवं मध्यम उद्योग
इन मदों में खर्च न होने से परियोजनाओं के समय पर पूरा होने में बाधा और जनता को योजनाओं का लाभ मिलने में देरी हो सकती है।
जिलों और अधिकारियों को निर्देश, जवाबदेही तय
बीते दिनों शासन ने जिलों और विभागों को ज्यादा से ज्यादा बजट खर्च करने के लिए निर्देश दिए हैं। उदाहरण के लिए, लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं को मौखिक रूप से कहा गया कि ठेकेदारों को एडवांस भुगतान करें। हालांकि, कई अभियंताओं ने इसका विरोध किया और मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुंचाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि बजट के समय पर उपयोग और देरी पर अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि इस संबंध में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अधिकारियों की जिम्मेदारी और योजनाओं का असर
सीएम ने यह भी कहा कि बजट में देरी से खर्च होने की वजह से परियोजनाओं का समय पर पूरा होना बाधित होता है और लोग सरकारी योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं उठा पाते। इसलिए सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि आवंटित राशि का उपयोग समय सीमा के भीतर सुनिश्चित करें।
UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल 8.65 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था, लेकिन अब तक विभागों ने सिर्फ करीब 60% राशि ही खर्च किया है। इसका मतलब है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक विभागों को अपने कुल बजट का 40% शेष बचे दिनों में खर्च करना होगा, जो व्यावहारिक रूप से बहुत कठिन दिख रहा है।
बजट इस्तेमाल में सुस्ती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जताई नाराजगी
सूत्रों के मुताबिक कई विभागों ने अपनी आवंटित राशि का आधा से भी कम ही खर्च किया है। इसी को लेकर हाल ही में मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट खर्च में विलंब और सुस्ती पर गंभीर नाराजगी जताई थी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आवंटित धनराशि का समय पर उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
छह दिन में पूरी करनी होगी बकाया राशि, अवकाश बाधा
वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्त होने में अब सिर्फ छह दिन शेष हैं। लेकिन इन छह दिनों में भी वास्तविक कार्य दिवस कम हैं। गुरुवार और शुक्रवार को रामनवमी का अवकाश है, शनिवार को जिलों के कार्यालय खुलेंगे लेकिन शासन स्तर और बैंक बंद रहेंगे। 31 मार्च को महावीर जयंती का अवकाश है। इस वजह से विभागों पर बजट खर्च का दबाव बढ़ गया है, ताकि वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले योजनाओं और परियोजनाओं के लिए धन का उपयोग हो सके।
कौन से विभाग सबसे पीछे हैं
कुछ विभागों में बजट खर्च की स्थिति इतनी खराब है कि 50% से कम राशि ही खर्च हुई है। इनमें प्रमुख हैं:
* सिंचाई विभाग (निर्माण कार्य)
* संस्कृति विभाग
* संस्थागत वित्त विभाग (स्टांप और पंजीकरण)
* सामान्य प्रशासन विभाग
* समाज कल्याण विभाग (जनजाति कल्याण)
* लोक निर्माण विभाग (राज्य संपत्ति निदेशालय)
* राष्ट्रीय एकीकरण विभाग
* राजस्व विभाग (आपदा राहत)
* परिवहन और न्याय विभाग
* नगर विकास विभाग
* आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा
* कारागार, मत्स्य, ग्राम्य विकास, भूमि विकास एवं जल संसाधन
* भारी एवं मध्यम उद्योग
इन मदों में खर्च न होने से परियोजनाओं के समय पर पूरा होने में बाधा और जनता को योजनाओं का लाभ मिलने में देरी हो सकती है।
जिलों और अधिकारियों को निर्देश, जवाबदेही तय
बीते दिनों शासन ने जिलों और विभागों को ज्यादा से ज्यादा बजट खर्च करने के लिए निर्देश दिए हैं। उदाहरण के लिए, लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं को मौखिक रूप से कहा गया कि ठेकेदारों को एडवांस भुगतान करें। हालांकि, कई अभियंताओं ने इसका विरोध किया और मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुंचाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि बजट के समय पर उपयोग और देरी पर अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि इस संबंध में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अधिकारियों की जिम्मेदारी और योजनाओं का असर
सीएम ने यह भी कहा कि बजट में देरी से खर्च होने की वजह से परियोजनाओं का समय पर पूरा होना बाधित होता है और लोग सरकारी योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं उठा पाते। इसलिए सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि आवंटित राशि का उपयोग समय सीमा के भीतर सुनिश्चित करें।












