सहारनपुर के रामपुर मनिहारान में RLD की स्वाभिमान रैली में जयंत चौधरी ने शक्ति प्रदर्शन किया। 2027 चुनाव से पहले किसान, जाट और गुर्जर समीकरणों पर RLD की नजर है।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में राष्ट्रीय लोक दल (RLD) तथा RLD के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी के महत्व को हर कोई जानता है। राजनीतिक विश्लेषकों का हमेशा से मानना रहा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जयंत चौधरी के दादा जी स्वर्गीय चौ0 चरण सिंह तथा जयंत चौधरी के पिता स्वर्गीय चौ0 अजित सिंह हमेशा से जनता के लिए सम्मानित नेता के तौर पर स्थापित रहे हैं। वर्तमान दौर में वही स्थिति पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जयंत चौधरी की बनती जा रही है। जयंत चौधरी राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ साथ ही भारत सरकार में मंत्री भी हैं। 3 सितंबर 2026 (बृहस्पतिवार) का दिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में RLD के अध्यक्ष तथा केन्द्रीय मंत्री जयंत चौधरी के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है। चेतना मंच की वेबसाइट https://chetnamanch.com/. पर यह समाचार अपलोड करने के वक्त तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में जयंत चौधरी की शक्ति प्रदर्शन वाली बहुत बड़ी रैली शुरू होने वाली थी।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत गर्माने लगी है। इसी क्रम में आज यानी 3 सितंबर 2026 को सहारनपुर के रामपुर मनिहारान में राष्ट्रीय लोकदल (RLD) की बड़ी ‘स्वाभिमान रैली’ आयोजित हो रही है। रैली को राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने संबोधित किया। रैली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में RLD के शक्ति प्रदर्शन और चुनावी तैयारियों के आगाज के तौर पर देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय लोकदल की यह रैली गोचर कृषि इंटर कॉलेज मैदान, रामपुर मनिहारान में आयोजित हो रही है। रैली को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खासा उत्साह है। स्थानीय स्तर पर कई दिनों से जनसंपर्क अभियान चलाकर लोगों से रैली में पहुंचने की अपील की जा रही थी। रैली के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की गई थीं। UP News :
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में राष्ट्रीय लोकदल की पहचान लंबे समय से किसान राजनीति से जुड़ी रही है। ऐसे में ‘स्वाभिमान रैली’ में किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, गन्ना किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है। इसके साथ ही रालोद की नजर पश्चिमी यूपी के महत्वपूर्ण जाट वोट बैंक पर भी है। सहारनपुर और आसपास के क्षेत्रों में जाट मतदाताओं के अलावा किसान और अन्य ग्रामीण समुदाय चुनावी समीकरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रैली के जरिए जयंत चौधरी इन वर्गों को RLD के साथ जोड़ने का राजनीतिक संदेश दिया।
इस रैली की एक खास बात यह भी है कि RLD केवल अपने पारंपरिक जाट-किसान आधार तक सीमित रहने के बजाय गुर्जर समेत दूसरे ग्रामीण और सामाजिक समूहों तक अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश करती दिखाई दी। रैली से जुड़े कार्यक्रम को लेकर गुर्जर समाज की भागीदारी भी सामने आई है।
सहारनपुर में RLD की स्वाभिमान रैली ऐसे समय हो रही है जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी भी अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर रही है। जयंत चौधरी की रैली से ठीक एक दिन पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सहारनपुर का दौरा किया और पार्टी पदाधिकारियों के साथ 2027 की तैयारियों को लेकर संवाद किया। इसी वजह से सहारनपुर का मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम केवल एक रैली तक सीमित नहीं माना जा रहा। इसे पश्चिमी यूपी में अलग-अलग दलों द्वारा अपने सामाजिक और राजनीतिक समीकरण मजबूत करने की शुरुआती कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है।UP News :
राष्ट्रीय लोकदल इस समय भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में है और जयंत चौधरी केंद्र सरकार में मंत्री हैं। ऐसे में RLD की सहारनपुर रैली का महत्व और बढ़ जाता है। एक तरफ पार्टी गठबंधन की राजनीति में अपनी भूमिका निभा रही है, वहीं दूसरी तरफ उसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने स्वतंत्र संगठन और पारंपरिक जनाधार को मजबूत रखना है। 2027 के विधानसभा चुनाव में सीटों और राजनीतिक प्रभाव को लेकर RLD के लिए पश्चिमी यूपी सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बना हुआ है।
2027 के विधानसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का किसान मतदाता एक बार फिर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। RLD का पारंपरिक आधार किसान और जाट राजनीति से जुड़ा रहा है, जबकि दूसरे राजनीतिक दल भी पश्चिमी यूपी में अपने-अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। कुल मिलाकर, सहारनपुर की यह रैली RLD के लिए सिर्फ एक जनसभा नहीं बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक ताकत, संगठन और सामाजिक आधार का प्रदर्शन करने का महत्वपूर्ण अवसर है। UP News :
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