उत्तर प्रदेश में सरकारी दावों की खुली पोल : कागजों में सड़क, हकीकत में कीचड़
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 10:01 PM
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के हमीरपुर जिले में सड़क अब तक कागज़ों से बाहर नहीं निकली है दो साल बाद भी गांववाले धूल और कीचड़ में फंसे हुए है जिसमें गर्भवती महिला को अस्पताल बैलगाड़ी से 7 केएम तक ले जाना पड़ा है। उत्तर प्रदेश की जानकारी हम आपको विस्तार के साथ बता रहे हैं। UP News
बता दे कि उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के सरकारी लापरवाही का ऐसा मंजर जिसने मानवता को झकझोर दिया है। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के हमीरपुर जिले में सड़क न होने के कारण एक गर्भवती महिला को अस्पताल तक बैलगाड़ी में ले जाना पड़ा। 7 किलोमीटर का यह सफर तीन घंटे में पूरा हुआ, जिसमें महिला प्रसव पीड़ा से कराहती रही। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
हमीरपुर जिले बैलगाड़ी से अस्पताल पहुंची प्रेग्नेंट महिला
बता दे कि उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के हमीरपुर जिले में शनिवार को परसदवा डेरा गऊघाट छानी गांव निवासी 23 वर्षीय रेशमा को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। गांव तक पहुंचने वाली सड़क की हालत बेहद खराब थी — कीचड़ और दलदल से भरी। एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। मजबूरी में रेशमा के ससुर कृष्ण कुमार केवट ने बैलगाड़ी का सहारा लिया और बहू को उसी में बैठाकर सिसोलर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) तक पहुंचाया। सफर महज 7 किलोमीटर का था, लेकिन खराब रास्ते के कारण इसे तय करने में 3 घंटे लग गए। हर झटके पर रेशमा दर्द से कराह उठती थी। कृष्ण कुमार ने थके स्वर में कहा कि “अगर सड़क होती तो बहू को इस हाल में बैलगाड़ी से नहीं ले जाना पड़ता। एम्बुलेंस आ सकती थी।” अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद बताया कि प्रसव की तिथि दो दिन बाद की है।
बता दे कि उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) गांव के समाजसेवी अरुण निषाद (राजेंद्र कुमार) ने बताया कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर 12 मार्च 2024 को छह दिन तक अनिश्चितकालीन धरना चला था। उस समय उपजिलाधिकारी रमेशचंद्र ने लोकसभा चुनाव के बाद सड़क बनवाने का आश्वासन दिया था। लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी सड़क अब तक केवल कागजों में ही मौजूद है। गांव के करीब 500 से अधिक परिवार हर बरसात में इसी दलदल से गुजरने को मजबूर हैं।
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के समाजसेवी अरुण निषाद ने कहा कि “हमने चिट्ठियां लिखीं, अफसरों से मिले, लेकिन किसी ने हमारी नहीं सुनी। जब तक पक्की सड़क नहीं बनेगी, न जाने कितनी ‘रेशमाओं’ को इसी दलदल में दर्द झेलना पड़ेगा।” गांववालों ने अब जिला कलेक्टर, स्थानीय विधायक और मुख्यमंत्री कार्यालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि पक्की सड़क केवल सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की डोर है, जो हर बरसात में कमजोर पड़ती जा रही है।
उत्तर प्रदेश की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बैलगाड़ी में कराहती रेशमा और दलदली रास्तों से गुजरते परिजन दिख रहे हैं। लोग प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।