कोई राम-राम तक नहीं करता यहां पर
राम-राम जी! कहना उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत का प्राचीन प्रचलन है। दरअसल राम-राम सम्मान प्रकट करने वाला पारंपरिक अभिवादन है। इसी राम-राम को लेकर इच्छामृत्यु प्राप्त करने वाले हरीश राणा के पिता अशोक राणा का बड़ा दर्द झलक कर सामने आया है।

UP News : राम-राम जी! कहना उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत का प्राचीन प्रचलन है। दरअसल राम-राम सम्मान प्रकट करने वाला पारंपरिक अभिवादन है। इसी राम-राम को लेकर इच्छामृत्यु प्राप्त करने वाले हरीश राणा के पिता अशोक राणा का बड़ा दर्द झलक कर सामने आया है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रहने वाले हरीशा राणा के पिता अशोक राणा ने बड़े शहरों की जीवनशैली को लेकर अपना दर्द साझा किया है। हरीश राणा के पिता अशोक राणा का कहना है कि यहां किसी का दु:ख कोई क्या समझेगा यहां तो कोई राम-राम तक नहीं करता है।
पिछले 13 साल से कोमा में पड़ा हुआ है हरीश राणा
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद शहर में स्थित राजनगर एक्सटेंशन की राज एम्पायर सोसायटी में रहने वाले हरीश राणा पिछले 13 साल से कोमा में हैं। बेटे की लगातार बिगड़ती हालत और पीड़ा को देखते हुए पिता अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट में इच्छामृत्यु की अर्जी लगाई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। परिवार के वकील मनीष कुमार के अनुसार इच्छामृत्यु की प्रक्रिया लगभग एक सप्ताह के भीतर शुरू हो सकती है। इसके लिए हरीश राणा को घर से एम्स अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा। अशोक राणा ने समाज के बदलते स्वरूप पर चिंता जताते हुए कहा कि बड़े शहरों की सोसायटियों में लोग एक-दूसरे से कटते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पड़ोसियों से हाल-चाल पूछना, राम-राम करना और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़ा होना बहुत जरूरी है। इससे समाज में अपनापन और सहयोग की भावना बनी रहती है।
जल्दी ही एम्स में शिफ्ट किया जाएगा हरीश राणा को
अशोक राणा ने बताया कि हरीश को गोपनीय तरीके से अस्पताल ले जाने की तैयारी चल रही है। तीन डॉक्टरों की टीम उसकी निगरानी करेगी और तय मेडिकल नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले हरीश को नोएडा के एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन वहां साफ-सफाई और सुविधाओं की कमी के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से हरीश राणा के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही परिवार की आजीविका के लिए जीडीए या नगर निगम की ओर से एक स्थायी दुकान भी आवंटित की जाएगी। इसके अलावा हरीश के इलाज के दौरान दवाइयों और चिकित्सा पर हुए खर्च का पूरा भार भी चिकित्सा विभाग उठाएगा। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में भी यदि परिवार को किसी प्रकार की सहायता की जरूरत होगी तो प्राथमिकता के आधार पर मदद की जाएगी। UP News
UP News : राम-राम जी! कहना उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत का प्राचीन प्रचलन है। दरअसल राम-राम सम्मान प्रकट करने वाला पारंपरिक अभिवादन है। इसी राम-राम को लेकर इच्छामृत्यु प्राप्त करने वाले हरीश राणा के पिता अशोक राणा का बड़ा दर्द झलक कर सामने आया है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रहने वाले हरीशा राणा के पिता अशोक राणा ने बड़े शहरों की जीवनशैली को लेकर अपना दर्द साझा किया है। हरीश राणा के पिता अशोक राणा का कहना है कि यहां किसी का दु:ख कोई क्या समझेगा यहां तो कोई राम-राम तक नहीं करता है।
पिछले 13 साल से कोमा में पड़ा हुआ है हरीश राणा
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद शहर में स्थित राजनगर एक्सटेंशन की राज एम्पायर सोसायटी में रहने वाले हरीश राणा पिछले 13 साल से कोमा में हैं। बेटे की लगातार बिगड़ती हालत और पीड़ा को देखते हुए पिता अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट में इच्छामृत्यु की अर्जी लगाई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। परिवार के वकील मनीष कुमार के अनुसार इच्छामृत्यु की प्रक्रिया लगभग एक सप्ताह के भीतर शुरू हो सकती है। इसके लिए हरीश राणा को घर से एम्स अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा। अशोक राणा ने समाज के बदलते स्वरूप पर चिंता जताते हुए कहा कि बड़े शहरों की सोसायटियों में लोग एक-दूसरे से कटते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पड़ोसियों से हाल-चाल पूछना, राम-राम करना और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़ा होना बहुत जरूरी है। इससे समाज में अपनापन और सहयोग की भावना बनी रहती है।
जल्दी ही एम्स में शिफ्ट किया जाएगा हरीश राणा को
अशोक राणा ने बताया कि हरीश को गोपनीय तरीके से अस्पताल ले जाने की तैयारी चल रही है। तीन डॉक्टरों की टीम उसकी निगरानी करेगी और तय मेडिकल नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले हरीश को नोएडा के एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन वहां साफ-सफाई और सुविधाओं की कमी के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से हरीश राणा के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही परिवार की आजीविका के लिए जीडीए या नगर निगम की ओर से एक स्थायी दुकान भी आवंटित की जाएगी। इसके अलावा हरीश के इलाज के दौरान दवाइयों और चिकित्सा पर हुए खर्च का पूरा भार भी चिकित्सा विभाग उठाएगा। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में भी यदि परिवार को किसी प्रकार की सहायता की जरूरत होगी तो प्राथमिकता के आधार पर मदद की जाएगी। UP News












