सहारनपुर में पुलिस ने नकली सिक्के बनाने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक गिरोह मशीनों और विशेष डाई की मदद से 20 रुपये के नकली सिक्के तैयार करता था

UP News: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में नकली सिक्कों के एक बड़े नेटवर्क का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। थाना कोतवाली नगर पुलिस, एसओजी, स्वाट और सर्विलांस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी मशीनों और विशेष डाई की मदद से 20 रुपये के नकली सिक्के तैयार करते थे और उन्हें बाजार में खपाने के लिए अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल करते थे। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से बड़ी संख्या में नकली सिक्कों के अलावा सिक्के बनाने वाली मशीनें, लोहे की डाई, अधबने सिक्के, उपकरण, मोबाइल फोन, हिसाब-किताब से संबंधित रजिस्टर और दो कारें बरामद की हैं। पूछताछ में गिरोह द्वारा अब तक 70 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नकली सिक्के बाजार में चलाने का दावा सामने आया है। हालांकि, यह आंकड़ा पुलिस पूछताछ में सामने आया दावा है और इसकी विस्तृत जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ने चेकिंग अभियान चलाया। इसी दौरान संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनकी निशानदेही और कब्जे से नकली सिक्के बनाने से जुड़े सामान को बरामद किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह निवासी मोहाली, पंजाब, हिमांशु उर्फ गुल्लू निवासी सहारनपुर, कुलदीप निवासी मुजफ्फरनगर, संतोष चौरसिया उर्फ जनार्दन निवासी मधुबनी, बिहार और अनुराग पाल उर्फ लंकेश निवासी भदोही के रूप में हुई है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से 20 रुपये के 6,400 नकली सिक्के बरामद किए हैं। इन सिक्कों की कुल अंकित कीमत 1 लाख 28 हजार रुपये बताई गई है। इसके अलावा आरोपियों से 10 हजार रुपये नकद और आठ मोबाइल फोन भी मिले हैं। पुलिस की बरामदगी में सिक्के तैयार करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पांच लोहे की डाई और छह मशीनें भी शामिल हैं। इसके साथ ही डाई पॉलिश करने वाली मशीन, घिसाई के पत्थर, हथौड़े, रेती, रिंच, पेचकश, प्लास, वर्नियर कैलिपर्स, इलेक्ट्रॉनिक कांटा और ओवन जैसे उपकरण भी बरामद किए गए हैं। पुलिस को सात हिसाब-किताब रजिस्टर/पैड और चेकबुक भी मिली हैं, जिनसे गिरोह के आर्थिक लेनदेन और नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में सामने आया कि गिरोह के सदस्य नकली सिक्के तैयार करने के लिए मशीनों और डाई का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद तैयार सिक्कों को बाजार में अलग-अलग स्थानों पर खपाया जाता था। आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि नकली सिक्कों को छोटी दुकानों, सरकारी शराब के ठेकों और टोल टैक्स जैसे स्थानों पर चलाया जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह के नकली सिक्के किन-किन इलाकों तक पहुंचे और इनके नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला दावा नकली सिक्कों की कथित मात्रा को लेकर सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि गिरोह अब तक 70 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नकली सिक्के बाजार में खपा चुका है। हालांकि, पुलिस ने इस दावे की जांच शुरू कर दी है। इतनी बड़ी रकम के नकली सिक्कों को बाजार में चलाए जाने की बात सामने आने के बाद जांच एजेंसियां गिरोह के नेटवर्क, उत्पादन क्षमता, सप्लाई चैन और अब तक के लेनदेन की जानकारी जुटाने में लगी हैं।
एसएसपी अभिनंदन के अनुसार, यह कोई छोटा गिरोह नहीं था बल्कि इसके पीछे एक लंबी चेन काम कर रही थी। गिरोह में शामिल लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं।
पुलिस के मुताबिक, कुछ सदस्य नकली सिक्कों की मैन्युफैक्चरिंग का काम देखते थे, जबकि कुछ लोग मशीन और प्लांट लगाने से जुड़े काम में मदद करते थे। इसके अलावा फाइनेंस और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने वाले लोग भी नेटवर्क का हिस्सा थे। तैयार नकली सिक्कों को आगे छोटे ग्राहकों, दुकानदारों और अन्य माध्यमों के जरिए बाजार में पहुंचाने की व्यवस्था होने की बात पुलिस ने बताई है।
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का मुख्य सरगना उपकार लूथरा है, जो मोहाली, पंजाब का रहने वाला है। पुलिस का दावा है कि वह करीब वर्ष 2001 से नकली सिक्के बनाने के अवैध कारोबार में सक्रिय रहा है। जांच में पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इतने लंबे समय से चल रहे इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग जुड़े रहे हैं और अलग-अलग राज्यों में इसका नेटवर्क कितना फैला हुआ है।
गिरफ्तार आरोपियों के पते अलग-अलग राज्यों और जिलों से जुड़े हैं। आरोपियों में पंजाब के मोहाली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिहार के मधुबनी और भदोही के लोग शामिल हैं।
आरोपियों के अलग-अलग स्थानों से होने के कारण पुलिस को आशंका है कि नकली सिक्कों की सप्लाई का नेटवर्क एक से अधिक राज्यों तक फैला हो सकता है। अब जांच का फोकस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और उन स्थानों पर है, जहां कथित तौर पर नकली सिक्कों की सप्लाई की जाती थी।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से स्विफ्ट डिजायर और ईको स्पोर्ट कार भी बरामद की हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन वाहनों का इस्तेमाल नकली सिक्कों और मशीनों की आवाजाही के लिए किया जाता था या नहीं। बरामद रजिस्टर, चेकबुक, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेजों को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इनसे गिरोह के आर्थिक लेनदेन और संपर्कों की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस के सामने इस नेटवर्क की पूरी सप्लाई चेन का पता लगाने की चुनौती है। जांच में यह जानने की कोशिश की जा रही है कि नकली सिक्कों के निर्माण के लिए कच्चा माल कहां से आता था, मशीनें और डाई किसने उपलब्ध कराईं और तैयार सिक्कों को किन राज्यों में भेजा जाता था। इसके साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोग कौन हैं और क्या नकली सिक्कों को बाजार में चलाने के लिए कोई संगठित नेटवर्क अलग से काम करता था। UP News:
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