क्या संभल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सहारनपुर मस्जिद विवाद में भी नया कानूनी मोड़ आने वाला है ? कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने ऐसा क्या कहा कि सहारनपुर मामले में अदालत के अगले आदेश को लेकर चर्चा अभी से तेज हो गई ?

UP News : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने एक बार फिर कानूनी लड़ाई का मुद्दा उठाया है। संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सहारनपुर मामले में भी देर-सवेर अदालत का आदेश सामने आएगा और कानून अपना काम करेगा। इमरान मसूद ने कहा कि अधिकारियों को संविधान और कानून के दायरे में रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को किसी खास एजेंडे के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। सांसद ने अपने बयान में अधिकारियों को उनके अधिकारों और कानूनी सीमाओं का ध्यान रखने की बात कही। UP News
सांसद इमरान मसूद ने कहा कि सहारनपुर मामले में भी अदालत का आदेश आना बाकी है। उन्होंने कानून व्यवस्था और संवैधानिक प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कहा कि किसी भी मामले में अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान ने उन्हें अधिकार और जिम्मेदारी दी है। ऐसे में यदि कोई अधिकारी कानून के विपरीत कार्रवाई करता है तो भविष्य में उसे अदालत के सामने उसका जवाब देना पड़ सकता है। UP News
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। 2 सितंबर 2026 को जिला अदालत ने मस्जिद से जुड़े मामले में दाखिल अपील खारिज करते हुए पहले दिए गए बेदखली आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद 5 सितंबर को कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित ढांचे को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। रिपोर्टों के अनुसार, निचली अदालत के आदेश में इस ढांचे को सरकारी भूमि पर अनधिकृत निर्माण माना गया था। इमरान मसूद इस कार्रवाई का विरोध करते हुए पहले ही मामले को उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की बात कह चुके हैं। UP News
इमरान मसूद का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को संभल हिंसा मामले में मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत निवारक हिरासत को रद्द कर दिया। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का खर्च भी लगाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस हिरासत में कथित तौर पर दिए गए अतिरिक्त न्यायिक कबूलनामे को अकेले निवारक हिरासत का आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने इस आधार पर हिरासत के आदेश को कानून के अनुरूप नहीं माना। UP News
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