अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासनिक बदलाव की चर्चा तेज हो गई है।

UP News : अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासनिक बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के CEO पद पर नियुक्ति को लेकर संत समाज ने महत्वपूर्ण मांग रखी है। संतों का कहना है कि मंदिर की जिम्मेदारी केवल प्रशासनिक अनुभव रखने वाले व्यक्ति को देने के बजाय ऐसे व्यक्ति को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, जिसे मठ-मंदिरों की परंपरा, पूजा-पद्धति और धार्मिक व्यवस्थाओं की गहरी जानकारी हो।
ट्रस्ट की ओर से CEO पद के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है और बताया गया है कि इस पद के लिए करीब 5300 आवेदन प्राप्त हुए हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से आए आवेदनों के बीच अब संत समाज की मांग ने नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर धार्मिक और प्रशासनिक समझ के संतुलन का सवाल खड़ा कर दिया है।
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ट्रस्ट की धार्मिक समिति के सदस्य और सिद्धपीठ हनुमन्निवास के महंत आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण ने CEO की नियुक्ति को लेकर अपनी राय रखी है। उनका कहना है कि राम मंदिर की व्यवस्था संभालने वाले व्यक्ति को मंदिर और आश्रम की परंपराओं की गहरी समझ होनी चाहिए। संत समाज की मांग है कि CEO पद के लिए ऐसे व्यक्ति को प्राथमिकता दी जाए, जिसका जीवन मठ-मंदिर और आश्रम की धार्मिक परंपराओं के बीच बीता हो। खास तौर पर रामानंदी परंपरा की जानकारी रखने वाले व्यक्ति को मंदिर की जिम्मेदारी दिए जाने की बात कही गई है।
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आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण के मुताबिक मंदिर प्रबंधन में प्रशासनिक दक्षता जरूरी है, लेकिन इसके साथ धार्मिक समझ और भगवान के प्रति निष्ठा भी महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि मंदिर की व्यवस्थाएं केवल सरकारी या प्रशासनिक तरीके से नहीं चलाई जानी चाहिए। संतों का तर्क है कि मंदिर की पूजा-पद्धति, धार्मिक परंपराओं और मठ-मंदिरों की कार्यप्रणाली को समझने वाला व्यक्ति व्यवस्थाओं को ज्यादा बेहतर तरीके से संभाल सकता है। इसलिए CEO के चयन में प्रशासनिक योग्यता के साथ धार्मिक अनुभव को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
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आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि राम मंदिर में CEO की नियुक्ति की जाती है तो वह इसका विरोध नहीं करेंगे। हालांकि उनका कहना है कि CEO की भूमिका और अधिकार पहले से स्पष्ट होने चाहिए, ताकि मंदिर की धार्मिक व्यवस्थाओं और प्रशासनिक संचालन के बीच उचित संतुलन बना रहे। उन्होंने कहा कि देश के कई बड़े मंदिरों में CEO के माध्यम से व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं। ऐसे में राम मंदिर में भी CEO की नियुक्ति हो सकती है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि मंदिर की मूल धार्मिक परंपराओं और अधिकारों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
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अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की नवगठित धार्मिक समिति की पहली बैठक श्री रामवल्लभा कुंज मंदिर में हुई। करीब तीन घंटे चली बैठक में ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन, समिति सदस्य मिथिलेश नंदिनी शरण, महंत रामानंद दास, महंत राजकुमार दास समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। समिति के अध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ऑनलाइन बैठक में शामिल हुए।
बैठक में 15 अगस्त को राम मंदिर के गर्भगृह से भगवान राम की पालकी यात्रा निकालने का निर्णय भी लिया गया। शाम करीब पांच बजे प्रस्तावित इस यात्रा में गाजे-बाजे के साथ भगवान राम की पालकी निकाली जाएगी। 22 जुलाई को आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की धार्मिक समिति का सदस्य बनाया गया था। CEO की नियुक्ति को लेकर उनकी टिप्पणी के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रस्ट चयन प्रक्रिया में प्रशासनिक योग्यता के साथ धार्मिक अनुभव को कितनी प्राथमिकता देता है।
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